नवरात्रि के पावन अवसर पर नौ दिनों तक देवी दुर्गा की उपासना के साथ खानपान के नियमों का पालन करना श्रद्धालुओं की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन जाता है। इस दौरान उपवास रखने वाले लोग ऐसे सात्विक आहार की तलाश में रहते हैं जो पौष्टिक होने के साथ तुरंत ऊर्जा भी प्रदान करे। राजस्थान के धौलपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में फलाहार के रूप में आलू से तैयार होने वाले दो पारंपरिक पकवान विशेष रूप से बनाए जाते हैं। इनमें पहला मीठा आलू का हलवा है और दूसरा चटपटा नमकीन आलू, जिन्हें तैयार करने में न तो अधिक समय लगता है और न ही बहुत ज्यादा सामग्री की आवश्यकता होती है।
झटपट तैयार करें चटपटे नमकीन आलू
उपवास के दिनों में नमकीन और हल्का तीखा स्वाद पसंद करने वालों के लिए यह एक बेहद सरल व्यंजन है। धौलपुर की गृहिणी प्रभा शर्मा के मुताबिक, इसे बनाने के लिए सबसे पहले आलुओं को अच्छी तरह साफ पानी से धोकर प्रेशर कुकर में रख लें। कुकर में दो सीटी आने तक आलुओं को उबालें, जिससे वे अंदर तक पक जाएं लेकिन अधिक गलें नहीं। जब आलू ठंडे हो जाएं, तो उनके छिलके उतार लें और हर आलू को चाकू की मदद से चार बराबर टुकड़ों में काट लें।
इसके बाद गैस पर कढ़ाई चढ़ाएं और उसमें चार चम्मच शुद्ध देसी घी डालकर गर्म करें। घी पिघलने पर उसमें कटे हुए उबले आलू डाल दें। अब इसमें स्वादानुसार सेंधा नमक और ताजी कुटी हुई काली मिर्च का पाउडर मिलाएं। सभी चीजों को करछुल से अच्छी तरह चलाएं ताकि नमक और मिर्च आलुओं पर समान रूप से लिपट जाएं। इसके बाद कढ़ाई को ढक्कन से ढक दें और मध्यम आंच पर लगभग तीन मिनट तक पकने दें। तय समय बाद ढक्कन हटाएं, आपके गरमागरम चटपटे नमकीन आलू परोसने के लिए तैयार हैं, जिन्हें परिवार के सभी सदस्य चाव से खा सकते हैं।
व्रत में ऊर्जा देने वाला स्वादिष्ट आलू का हलवा
उपवास के दौरान यदि कुछ मीठा और शरीर को तुरंत स्फूर्ति देने वाला फलाहार चाहिए, तो आलू का हलवा एक उम्दा विकल्प साबित होता है। इसे बनाने की शुरुआत भी उबले हुए आलुओं से होती है। उबले हुए आलुओं को छीलकर किसी बर्तन में हाथ या मैशर की सहायता से पूरी तरह महीन मैश कर लें, जिससे उसमें कोई बड़ी गांठ न बचे।
अब एक कढ़ाई में चार से पांच चम्मच शुद्ध देसी घी गर्म करें। जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब मैश किया हुआ आलू कढ़ाई में डालें। गैस की आंच धीमी रखें और आलू को लगातार चलाते हुए भूनें, जिससे वह कढ़ाई की तली में चिपककर जले नहीं। धीमी आंच पर करीब पांच मिनट तक भूनने के बाद जब आलू घी सोखकर सिकने लगे, तब उसमें स्वादानुसार चीनी मिला दें। चीनी डालने के बाद मिश्रण को तब तक चलाते रहें जब तक उसका रंग हल्का सुनहरा न हो जाए। जैसे ही हलवे से भीनी-भीनी सौंधी खुशबू आने लगे, समझ लीजिए कि सात्विक आलू का हलवा बनकर तैयार हो चुका है।
सात्विक भोजन और पारिवारिक परंपराएं
धौलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में लोक मान्यता है कि व्रत का आहार न केवल सात्विक होना चाहिए, बल्कि वह सुपाच्य भी होना आवश्यक है ताकि दिनभर पेट हल्का महसूस हो। इन दोनों ही पकवानों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री शरीर को तत्काल पोषण और ताकत देती है। गृहिणी प्रभा शर्मा का कहना है कि व्रत के फलाहार में नमक अथवा मसालों का चुनाव करते समय हर श्रद्धालु को अपने परिवार की मान्यताओं और कुल परंपराओं का अवश्य ध्यान रखना चाहिए। रसोई में कम खर्च और कम मेहनत में तैयार होने वाले ये दोनों व्यंजन नवरात्रि के नौ दिनों को स्वाद और सेहत दोनों से भरपूर बना देते हैं।





















