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गर्मियों में हरे चारे की किल्लत दूर करेगा साइलेज, जानें दुधारू पशुओं के लिए इसे तैयार करने का तरीकाजीवनशैली
19 सित॰ 2026, 7:31 pm (29 मिनट पहले)· 0

गर्मियों में हरे चारे की किल्लत दूर करेगा साइलेज, जानें दुधारू पशुओं के लिए इसे तैयार करने का तरीका

सूखे और चिलचिलाती धूप के दिनों में पशुओं के लिए हरा चारा जुटाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है। ऐसे में मक्का, ज्वार या बाजरा से बना साइलेज पशुपालकों के लिए चारे के बेहतर बैंक के तौर पर काम आ सकता है।

डेयरी कारोबार अथवा पशुपालन से जुड़े किसानों के सामने अक्सर गर्मियों और सूखे के मौसम में हरे चारे की गंभीर किल्लत खड़ी हो जाती है। इस कमी को दूर करने और पशुओं के दूध उत्पादन को सामान्य बनाए रखने के लिए साइलेज एक बेहद उपयोगी विकल्प साबित हो सकता है। आम बोलचाल में कई लोग इसे पशुओं के चारे का आचार भी कहते हैं। वैज्ञानिक पद्धति और विशेष तकनीक से तैयार यह किण्वित हरा चारा कई महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है और जब ताजे चारे का संकट गहराए, तब इसे निकालकर पशुओं को खिलाया जा सकता है। गाय और भैंस जैसे दुधारू मवेशी अपने खट्टे-मीठे स्वाद के चलते इसे काफी चाव से खाते हैं। पोषक तत्वों की दृष्टि से साइलेज के भीतर पर्याप्त ऊर्जा, प्रोटीन और जरूरी तत्व मौजूद रहते हैं, जो संतुलित आहार का हिस्सा बनकर मवेशियों की दैनिक पोषण जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं। हालांकि पशुपालकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि दूध की वास्तविक मात्रा केवल चारे पर ही नहीं, बल्कि पशु की नस्ल, शारीरिक स्वास्थ्य, पर्याप्त पानी की उपलब्धता और समग्र देखभाल पर भी निर्भर करती है।

चारा बैंक की तरह काम आता है किण्वित चारा

साइलेज मूल रूप से किण्वन यानी फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से तैयार किया गया हरा चारा है। इसे हवा की गैर-मौजूदगी में विशेष गड्ढों या थैलियों में दबाकर सुरक्षित किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब खेतों में ताजी घास या हरा चारा उपलब्ध नहीं होता, तब पशुपालक पहले से जमा किए गए इस स्टॉक का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह व्यवस्था विषम परिस्थितियों, सूखे और भीषण गर्मी के दौरान मवेशियों के लिए एक मजबूत चारा बैंक की तरह काम करती है। किसान अनुकूल मौसम में एक ही समय पर अपने खेतों से बड़ी मात्रा में फसल काटकर साइलेज बना सकते हैं और बाद में जरूरत के अनुसार धीरे-धीरे महीनों तक अपने पशुओं को खिला सकते हैं।

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मक्का, ज्वार और बाजरा से बनाएं उच्च गुणवत्ता वाला साइलेज

साइलेज तैयार करने के लिए मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी फसलें सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। इन फसलों में प्राकृतिक तौर पर पर्याप्त नमी और घुलनशील शर्करा मौजूद होती है, जो किण्वन की प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के तेज करती है। पशुपालकों के बीच मक्के से बना साइलेज सबसे ज्यादा लोकप्रिय और कारगर माना गया है।

इस प्रक्रिया में फसल की कटाई का सही समय तय करना सबसे अहम कदम होता है। जब खड़ी फसल में लगभग 65 से 70 प्रतिशत तक नमी मौजूद हो और भुट्टे के दाने दूधिया अवस्था से कड़े होने की ओर बढ़ रहे हों, ठीक उसी वक्त फसल की कटाई की जानी चाहिए। यदि फसल ज्यादा सूख गई या बहुत कच्ची रह गई, तो किण्वन सही ढंग से नहीं हो पाता।

कुट्टी का आकार और साइलो में दबाकर भरने की विधि

फसल की कटाई पूरी होने के तुरंत बाद आधुनिक मशीन या कटर की मदद से उसके छोटे-छोटे टुकड़े किए जाते हैं। विशेषज्ञ इसके लिए लगभग आधा इंच से एक इंच की कुट्टी काटने की सलाह देते हैं। इस आकार की कुट्टी काटने से उसे गड्ढों या बैग में दबाकर भरना बेहद आसान हो जाता है और अंदर फंसी हवा को बाहर निकालने में भी आसानी होती है।

कुट्टी तैयार होने के बाद इसे साइलो पिट, पक्के बंकर या विशेष रूप से बनाए गए मजबूत प्लास्टिक बैग में भरा जाता है। भरते समय प्रत्येक परत को अच्छी तरह से दबाना अनिवार्य होता है। अगर दबाव कम रहेगा, तो अंदर हवा की थैलियां रह जाएंगी, जिससे चारा खराब होने का जोखिम बढ़ जाता है।

ऑक्सीजन बंद होते ही शुरू होती है किण्वन प्रक्रिया

साइलेज निर्माण का सबसे नाजुक और अहम पड़ाव उसे हवा से पूरी तरह मुक्त करना है। कुट्टी को अच्छी तरह दबाने के बाद उसे मजबूत प्लास्टिक शीट की मदद से पूरी तरह एयरटाइट यानी वायुरोधी सील कर दिया जाता है। जैसे ही अंदर ऑक्सीजन समाप्त होती है, वहां मौजूद लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया चारे की शर्करा का किण्वन शुरू कर देते हैं।

इस किण्वन के दौरान लैक्टिक अम्ल का निर्माण होता है, जो चारे के पीएच स्तर को सुरक्षित सीमा में ले आता है और सड़ाने वाले बैक्टीरिया को पनपने से रोकता है। इसी रासायनिक बदलाव के कारण चारा महीनों तक बिना सड़े सुरक्षित बना रहता है। यदि रखरखाव सही रहे, तो अच्छी तरह सील किया गया साइलेज लंबे समय तक ताजा और पौष्टिक बना रहता है।

पशु चिकित्सक की राय और फायदे

पशु चिकित्सक डीके श्रीवाल के अनुसार, यदि फसल को उचित समय पर काटकर वैज्ञानिक तरीके से साइलेज बनाया जाए, तो यह दुधारू पशुओं के लिए एक अत्यंत पौष्टिक आहार सिद्ध होता है। इसके विशेष स्वाद के कारण पशु इसे बिना किसी नखरे के तेजी से खाते हैं। दैनिक संतुलित आहार में इसे जोड़ने से पशुओं की पोषण मांग पूरी होती है और गर्मियों में दूध उत्पादन में आने वाली भारी गिरावट को रोकने में काफी हद तक मदद मिलती है।

चिकित्सक ने यह भी रेखांकित किया कि बाजार से महंगे पैक्ड पशु आहार खरीदने की जगह किसान अपने ही खेतों में उगाई गई मक्का, ज्वार अथवा बाजरे से साइलेज बना सकते हैं। इससे पशुपालकों की बाहरी चारे पर निर्भरता घटती है और मौसम की मार के समय चारे की किल्लत से होने वाली आर्थिक परेशानी से भी काफी राहत मिलती है।

खिलाते समय जरूरी सावधानियां

पशुपालकों को यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि साइलेज केवल तभी लाभकारी है, जब उसे पूरी सावधानी के साथ तैयार और भंडारित किया गया हो। यदि साइलो खोलते समय उसमें किसी भी प्रकार की फफूंद, सड़न, कालापन या तीखी बदबू नजर आए, तो ऐसा चारा पशुओं को बिल्कुल नहीं देना चाहिए, क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।

इसके अलावा, साइलेज को पशु का एकमात्र आहार मानने की भूल नहीं करनी चाहिए। इसे हमेशा संतुलित आहार के एक घटक के रूप में ही परोसना चाहिए। इसके साथ पशुओं को पर्याप्त मात्रा में साफ पीने का पानी, आवश्यकतानुसार सूखा भूसा, खली, दाना मिश्रण और मिनरल मिक्सचर नियमित रूप से देना आवश्यक है। मवेशी की उम्र, उसकी नस्ल, दूध देने की दैनिक क्षमता और सामान्य स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर साइलेज की सही दैनिक मात्रा तय करने के लिए पशु चिकित्सक अथवा पशु पोषण विशेषज्ञ से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

सवाल-जवाब

साइलेज क्या है और इसे क्या कहा जाता है?
साइलेज हवा की अनुपस्थिति में किण्वित करके तैयार किया गया हरा चारा है, जिसे आम बोलचाल में पशुओं के चारे का आचार भी कहा जाता है।
साइलेज बनाने के लिए कौन सी फसलें सबसे बेहतर मानी जाती हैं?
मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी फसलें साइलेज बनाने के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं, जिनमें मक्के का साइलेज सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
साइलेज के लिए फसल की कटाई कब करनी चाहिए?
जब फसल में लगभग 65 से 70 प्रतिशत नमी हो और मक्के के दाने दूधिया से सख्त होने की अवस्था में हों, तब कटाई करनी चाहिए।
साइलेज के लिए कुट्टी का आकार कितना होना चाहिए?
फसल की कटाई के बाद मशीन की मदद से लगभग आधा इंच से एक इंच की कुट्टी काटी जानी चाहिए।
साइलेज को सुरक्षित रखने में कौन सी प्रक्रिया काम करती है?
हवा बंद होते ही लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया शर्करा का किण्वन करके लैक्टिक अम्ल बनाते हैं, जिससे चारा कई महीनों तक सुरक्षित रहता है।
पशुओं को साइलेज खिलाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
यदि साइलेज में फफूंद, सड़न या बदबू हो तो उसे न खिलाएं, और इसे केवल पूरक मानकर सूखे चारे, पानी, खली और मिनरल मिक्सचर के साथ दें।
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