आज के आधुनिक समय में अधिकांश घरों में भोजन पकाने के लिए गैस सिलेंडर और इंडक्शन का उपयोग किया जाता है। इनसे न केवल खाना जल्दी बनता है बल्कि मेहनत भी कम लगती है। इसके बावजूद, एक दौर ऐसा भी था जब ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी घरों तक पारंपरिक मिट्टी के चूल्हे पर ही खाना तैयार किया जाता था। इस विधि से बने व्यंजनों का स्वाद आज भी लोगों को बहुत भाता है। हालांकि, वक्त के साथ इनका चलन काफी कम हो चुका है और अब बाजारों में बने-बनाए मिट्टी के चूल्हे आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं।
यदि आप भी चूल्हे पर पके खाने का पारंपरिक अनुभव फिर से जीना चाहते हैं, तो इसे बहुत कम मेहनत और सामान के साथ अपने घर पर ही बना सकते हैं। इसके लिए आपको किसी विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं होती है। आसपास आसानी से मिलने वाली मिट्टी की मदद से ही कुछ ही घंटों में अपना खुद का चूल्हा तैयार किया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी राजकुमारी ने साझा की है, जिन्होंने लोकल 18 को इसे बनाने की विधि बताई।
राजकुमारी के मुताबिक, इस पारंपरिक उपकरण को बनाने के लिए सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता वाली काली चिकनी मिट्टी, थोड़ा सा भूसा और पर्याप्त मात्रा में पानी इकट्ठा करना जरूरी है। इसके बाद, एकत्रित की गई मिट्टी में आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर उसे आटे की तरह अच्छी तरह गूंथ लिया जाता है। इस गूंथी हुई मिट्टी में थोड़ी मात्रा में भूसा भी मिलाया जाता है। भूसा मिलाने का मुख्य फायदा यह होता है कि इससे मिट्टी को अतिरिक्त मजबूती मिलती है और चूल्हे का ढांचा बनाने में काफी सहायता मिलती है।
मिश्रण तैयार होने के बाद, इस गूंथी हुई मिट्टी की मदद से लगभग 6 से 7 इंच ऊंची गोल या चौकोर आकृति का ढांचा तैयार किया जाता है। इसके साथ ही, खाना पकाते समय ईंधन या लकड़ी अंदर डालने के लिए चूल्हे के सामने की तरफ एक छोटा मुंह या खिड़की जैसी जगह भी बनानी पड़ती है। जब यह पूरी संरचना बनकर तैयार हो जाती है, तो इसे धूप में अच्छी तरह सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। वातावरण में मौजूद नमी और मौसम के मिजाज को देखते हुए इस ढांचे को पूरी तरह सूखने में 2 से 3 दिन का समय लग सकता है।
जब चूल्हा पूरी तरह सूख जाए, तो मिट्टी का पतला घोल बनाकर इसकी बाहरी और अंदरूनी सतह पर फेरा जाता है जिससे यह पूरी तरह चिकना हो जाए। इस प्रकार, काली चिकनी मिट्टी, भूसे और पानी के आसान मिश्रण से आप घर पर ही अपना चूल्हा तैयार कर सकते हैं। हालांकि, पहली बार इसका उपयोग करने से पहले यह जांच लें कि यह पूरी तरह सूखा और मजबूत है या नहीं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे हमेशा किसी खुली जगह या अच्छी हवादार रसोई में ही इस्तेमाल करें, क्योंकि लकड़ी जलाने से निकलने वाला धुआं बंद कमरे में परेशानी पैदा कर सकता है।

















