किचन की बगिया में खुशबूदार और ताजा पत्तियों के लिए मीठा नीम यानी करी पत्ता सबसे लोकप्रिय पौधों में गिना जाता है। दाल में तड़का लगाना हो या चटनी तैयार करनी हो, इसकी हरी पत्तियों की महक किसी भी व्यंजन का स्वाद बढ़ा देती है। सेहत और बालों की देखभाल के लिए भी यह बेहद फायदेमंद माना जाता है। तुलसी, पुदीना या एलोवेरा की तरह इसे भी घर के गमले, बालकनी या छत पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। बीज के जरिए इस पौधे को तैयार करने में काफी लंबा समय लग जाता है, इसलिए हमेशा किसी स्थानीय पौधशाला से तंदुरुस्त और हरी-भरी शाखाओं वाला पौधा चुनकर लाना एक बेहतर विकल्प साबित होता है।
गमले का सही चुनाव और जल निकासी की व्यवस्था
करी पत्ता लगाने के लिए सबसे पहले एक सही आकार के बर्तन का चयन करना चाहिए। पौधे की जड़ों को अच्छी तरह फैलने और मजबूत बनने के लिए कम से कम 12 से 14 इंच या इससे भी बड़े साइज का गमला चुनना जरूरी होता है। यदि गमला बहुत छोटा होगा, तो जड़ें जल्द ही बंध जाएंगी और विकास रुक जाएगा। इसके साथ ही गमले के निचले हिस्से में दो से तीन छेद होना बेहद अनिवार्य है। जल निकासी के ये छेद अतिरिक्त पानी को तुरंत बाहर निकाल देते हैं, जिससे पौधे की जड़ें सड़न और नमी जनित बीमारियों से बची रहती हैं।
पौधे के लिए आदर्श मिट्टी और पोषक तत्वों का मिश्रण
कंटेनर बागवानी में पौधे की मजबूती पूरी तरह मिट्टी की संरचना पर निर्भर करती है। करी पत्ता के लिए मिट्टी तैयार करते समय 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत अच्छी तरह सड़ी हुई पुरानी गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट और 20 प्रतिशत बालू रेत का अनुपात रखना सबसे सटीक माना जाता है। यह मिश्रण मिट्टी को भुरभुरा और हल्का बनाए रखता है, जिससे जड़ों को पर्याप्त वायु मिलती है और पानी ठहरता नहीं है। इसके अलावा पौधे की पत्तियों को गहरा हरा रखने के लिए नाइट्रोजन की प्रचुर मात्रा चाहिए होती है। शुरुआती मिट्टी में 200 ग्राम नीम खली, 100 ग्राम सरसों खली और थोड़ा सा बोनमील या जैविक फंगीसाइड मिलाना चाहिए। यह मिश्रण पौधों को हानिकारक कीटों और फंगस से बचाता है। पौधे को गमले के ठीक बीच में स्थापित करके चारों तरफ मिट्टी भरें और पहली बार अच्छी तरह पानी दें ताकि जड़ें मजबूती से मिट्टी पकड़ लें।
तेज विकास और शाखाओं के फैलाव के लिए 2 जरूरी चीजें
करी पत्ता के पौधे की धीमी वृद्धि को दूर करने और उसे दोगुनी गति से झाड़ीनुमा रूप देने के लिए नियमित पोषण बेहद काम आता है। इसके लिए मिट्टी में मुख्य रूप से दो प्रमुख घटकों को शामिल करना एक बेहतरीन टॉनिक का काम करता है। पहली चीज वर्मीकम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की पुरानी खाद है, जो लगातार प्राकृतिक नाइट्रोजन और जीवाश्म प्रदान करती है। दूसरी महत्वपूर्ण चीज एप्सम सॉल्ट यानी मैग्नीशियम सल्फेट है। एप्सम सॉल्ट पत्तियों में क्लोरोफिल के निर्माण को तेज करता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण बढ़ता है और पत्तियां गहरी हरी और चमकदार बनती हैं। महीने में एक बार एक लीटर पानी में एक चम्मच एप्सम सॉल्ट घोलकर जड़ों में डालना या पत्तियों पर छिड़काव करना बेहद असरदार रहता है। इसके साथ ही मिट्टी में थोड़ा सा हड्डियों का चूरा यानी बोनमील या रॉक फॉस्फेट मिलाने से जड़ों की संरचना तेजी से मजबूत होती है और पौधा कुछ ही हफ्तों में घना हो जाता है।
छंटाई और गुड़ाई की तकनीक
अक्सर लोग इस डर से पौधे की कटाई नहीं करते कि वह सूख जाएगा, लेकिन करी पत्ता के साथ यह पूरी तरह अलग है। पौधे के शीर्ष हिस्से यानी टिप की कटाई और सूखी शाखाओं की प्रूनिंग करने से उस स्थान से कई नई कोपलें और शाखाएं फूटती हैं। पौधे की जितनी बार कटाई या पत्तियों की तोड़ाई की जाती है, वह नीचे से उतना ही चौड़ा और झाड़ीदार बनता जाता है। फरवरी और मार्च के महीने में पौधे की हल्की प्रूनिंग अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि यह इसका मुख्य विकास काल होता है। इसके अलावा समय-समय पर गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करते रहना चाहिए, ताकि जड़ों तक ताजी ऑक्सीजन पहुंच सके और अवांछित खरपतवार नष्ट हो जाएं।
कीटों से बचाव के प्राकृतिक उपाय
मीठे नीम पर अक्सर मिलीबग, सफेद कीट और फंगस का हमला देखने को मिलता है, जिससे पत्तियां मुड़ने और खराब होने लगती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए रासायनिक कीटनाशकों के बजाय आसान जैविक नुस्खे अपनाना चाहिए। थोड़े से पानी में नीम के तेल की कुछ बूंदें और हल्का लिक्विड सोप मिलाकर एक घोल तैयार करें और पूरे पौधे पर इसका छिड़काव करें। यह प्राकृतिक स्प्रे किसी भी तरह के परजीवियों को पौधे से दूर रखता है। इसके अलावा हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर मिट्टी में एक चम्मच नीम खली डालकर हल्की गुड़ाई कर देने से मिट्टी के अंदर मौजूद दीमक और कीड़े खत्म हो जाते हैं। इन बुनियादी बातों का ध्यान रखकर घर पर ही ताजा और रसायनों से मुक्त पत्तियां उगाई जा सकती हैं।



















