बिहार के छपरा जिले में एक महिला ने अपनी जीवटता और दृढ़ संकल्प से जीवन की तमाम कठिनाइयों को मात दे दी है। पति के जाने के बाद जब उनके सामने दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और दो मासूम बच्चों की परवरिश का संकट खड़ा हुआ, तब उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करते हुए उन्होंने रोजगार की दुनिया में कदम रखा और आज वह एक सफल कारोबारी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। छपरा की रहने वाली इस महिला की कहानी उन तमाम लोगों के लिए एक मिसाल है जो मुश्किल वक्त में घबरा जाते हैं।
साल 2003 में हुई थी शादी और 2007 में आया बड़ा संकट
छपरा जिले के गरखा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गरखा बाजार की रहने वाली बेबी देवी की जिंदगी आम दिनों की तरह चल रही थी। उनकी शादी वर्ष 2003 में हुई थी, लेकिन यह खुशियां ज्यादा लंबी नहीं टिक सकीं। शादी के महज कुछ ही वर्षों बाद वर्ष 2007 में एक गंभीर बीमारी की चपेट में आने से उनके पति का निधन हो गया। उस समय उनके दोनों बच्चे बहुत छोटे थे और घर में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं था। इस अचानक हुए हादसे ने पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ कर रख दिया था।
जीविका समूह से जुड़ने के बाद मिली नई राह
पति की मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो गई थी। हालात इतने बुरे थे कि बच्चों का पेट भरने और उनका पालन-पोषण करने के लिए कभी-कभी दूसरों से उधार तक मांगना पड़ता था। इस कठिन समय में उन्हें एक उम्मीद की किरण नजर आई और वह जीविका समूह से जुड़ गईं। जीविका से जुड़ना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। संगठन की मदद से उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए पहली बार 10 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इस शुरुआती राशि से उन्होंने जनरल स्टोर का कुछ सामान खरीदा और अपने घर के बाहर तिरपाल तानकर दुकानदारी शुरू कर दी।
कारोबार में आई तेजी और मिला दूसरा लोन
शुरुआती दौर में संघर्ष काफी ज्यादा था, लेकिन बेबी देवी की मेहनत और लगन रंग लाने लगी। धीरे-धीरे उनकी दुकान पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने लगी और आमदनी में भी सुधार होने लगा। उनके काम की प्रगति को देखते हुए जीविका की ओर से उन्हें दोबारा 40 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई। इस बढ़ी हुई राशि से उन्होंने अपने छोटे से स्टोर का दायरा बढ़ाया और सामानों की रेंज में भी इजाफा किया। तिरपाल के नीचे शुरू हुआ वह कारोबार अब उनके पक्के मकान के हिस्से में और उसके सामने सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।
पक्का घर बनवाया और बच्चों की पढ़ाई का उठाया खर्च
इस जनरल स्टोर से होने वाली कमाई ने उनके पूरे परिवार की तस्वीर बदल दी। उन्होंने अपनी मेहनत के पैसों से न केवल घर का रोजमर्रा का खर्च उठाया, बल्कि एक छोटा सा पक्का मकान भी तैयार करवा लिया। इसके अलावा, कारोबार से होने वाले मुनाफे से वह अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का पूरा खर्च भी खुद ही उठा रही हैं। पति के इस दुनिया से चले जाने के बाद उन्होंने अकेले दम पर परिवार की संपूर्ण जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और अपनी मेहनत के बल पर जीवन की सभी बाधाओं को पार कर लिया।
अब होलसेल बिजनेस शुरू करने की है योजना
अपनी सफलता की इस यात्रा के बारे में बात करते हुए बेबी देवी बताती हैं कि शुरुआती दिन उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन आज उन्हें अपनी इस मुकाम पर गर्व है। उनका यह सफर यहीं नहीं रुकता है, बल्कि वह भविष्य को लेकर काफी बड़े सपने देखती हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें आगे भी सरकारी स्तर पर या किसी अन्य माध्यम से आर्थिक सहायता मिलती है, तो वह अपने इस जनरल स्टोर के काम को और आगे ले जाना चाहती हैं। उनकी अगली योजना इस छोटे कारोबार को एक बड़े होलसेल बिजनेस में तब्दील करने की है, ताकि वह और अधिक तरक्की कर सकें।


















