गुजरात से चलेगी देश की पहली एलएनजी ट्रेन, अमित शाह दिखाएंगे हरी झंडीछपरा की बेबी देवी ने पति के निधन के बाद संभाली कमान, जीविका के सहारे खड़ी की सफल बिजनेसएशियन गेम्स 2026 में प्राची चौधरी ने जीता कांस्य पदक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी बधाईदादा से बिछड़ते ही छह दिन गिनने लगा पोता, मासूमियत देख नम हुईं आंखेंघर पर इस आसान देसी तरीके से बनाएं कच्चे पपीते की स्वादिष्ट सब्जीदिल्ली के आश्रम में गुवाहाटी हाईकोर्ट की महिला वकील के साथ मारपीट, बाल खींचकर सड़क पर घसीटने का आरोपमहाराष्ट्र के परिसरों में फिर गूंजेगी छात्र राजनीति, तीन दशक पुराना सन्नाटा तोड़ने की तैयारी में सरकारमहेश भट्ट से शादी के बाद सोनी राजदान का करियर क्यों पड़ा ठप, एक्ट्रेस ने खुद खोला बड़ा राजबिहार के बेगूसराय में हैरान करने वाला मामला, निधन के 13 दिन बाद मृत प्रधानाध्यापिका को मिला नोटिसबिहार की काजल पाठक ने नीट पीजी में गाड़े झंडे, पहले ही प्रयास में हासिल की एआईआर-3
छपरा की बेबी देवी ने पति के निधन के बाद संभाली कमान, जीविका के सहारे खड़ी की सफल बिजनेससक्सेस स्टोरी
26 सित॰ 2026, 10:13 pm (2 मिनट पहले)· 0

छपरा की बेबी देवी ने पति के निधन के बाद संभाली कमान, जीविका के सहारे खड़ी की सफल बिजनेस

पति की असामयिक मौत के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए छपरा की बेबी देवी ने हार नहीं मानी। जीविका समूह से मिले सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने जनरल स्टोर का कारोबार खड़ा किया और आज वह आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।

बिहार के छपरा जिले में एक महिला ने अपनी जीवटता और दृढ़ संकल्प से जीवन की तमाम कठिनाइयों को मात दे दी है। पति के जाने के बाद जब उनके सामने दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और दो मासूम बच्चों की परवरिश का संकट खड़ा हुआ, तब उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करते हुए उन्होंने रोजगार की दुनिया में कदम रखा और आज वह एक सफल कारोबारी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। छपरा की रहने वाली इस महिला की कहानी उन तमाम लोगों के लिए एक मिसाल है जो मुश्किल वक्त में घबरा जाते हैं।

साल 2003 में हुई थी शादी और 2007 में आया बड़ा संकट

छपरा जिले के गरखा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गरखा बाजार की रहने वाली बेबी देवी की जिंदगी आम दिनों की तरह चल रही थी। उनकी शादी वर्ष 2003 में हुई थी, लेकिन यह खुशियां ज्यादा लंबी नहीं टिक सकीं। शादी के महज कुछ ही वर्षों बाद वर्ष 2007 में एक गंभीर बीमारी की चपेट में आने से उनके पति का निधन हो गया। उस समय उनके दोनों बच्चे बहुत छोटे थे और घर में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं था। इस अचानक हुए हादसे ने पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ कर रख दिया था।

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जीविका समूह से जुड़ने के बाद मिली नई राह

पति की मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो गई थी। हालात इतने बुरे थे कि बच्चों का पेट भरने और उनका पालन-पोषण करने के लिए कभी-कभी दूसरों से उधार तक मांगना पड़ता था। इस कठिन समय में उन्हें एक उम्मीद की किरण नजर आई और वह जीविका समूह से जुड़ गईं। जीविका से जुड़ना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। संगठन की मदद से उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए पहली बार 10 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इस शुरुआती राशि से उन्होंने जनरल स्टोर का कुछ सामान खरीदा और अपने घर के बाहर तिरपाल तानकर दुकानदारी शुरू कर दी।

कारोबार में आई तेजी और मिला दूसरा लोन

शुरुआती दौर में संघर्ष काफी ज्यादा था, लेकिन बेबी देवी की मेहनत और लगन रंग लाने लगी। धीरे-धीरे उनकी दुकान पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने लगी और आमदनी में भी सुधार होने लगा। उनके काम की प्रगति को देखते हुए जीविका की ओर से उन्हें दोबारा 40 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई। इस बढ़ी हुई राशि से उन्होंने अपने छोटे से स्टोर का दायरा बढ़ाया और सामानों की रेंज में भी इजाफा किया। तिरपाल के नीचे शुरू हुआ वह कारोबार अब उनके पक्के मकान के हिस्से में और उसके सामने सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

पक्का घर बनवाया और बच्चों की पढ़ाई का उठाया खर्च

इस जनरल स्टोर से होने वाली कमाई ने उनके पूरे परिवार की तस्वीर बदल दी। उन्होंने अपनी मेहनत के पैसों से न केवल घर का रोजमर्रा का खर्च उठाया, बल्कि एक छोटा सा पक्का मकान भी तैयार करवा लिया। इसके अलावा, कारोबार से होने वाले मुनाफे से वह अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का पूरा खर्च भी खुद ही उठा रही हैं। पति के इस दुनिया से चले जाने के बाद उन्होंने अकेले दम पर परिवार की संपूर्ण जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और अपनी मेहनत के बल पर जीवन की सभी बाधाओं को पार कर लिया।

अब होलसेल बिजनेस शुरू करने की है योजना

अपनी सफलता की इस यात्रा के बारे में बात करते हुए बेबी देवी बताती हैं कि शुरुआती दिन उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन आज उन्हें अपनी इस मुकाम पर गर्व है। उनका यह सफर यहीं नहीं रुकता है, बल्कि वह भविष्य को लेकर काफी बड़े सपने देखती हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें आगे भी सरकारी स्तर पर या किसी अन्य माध्यम से आर्थिक सहायता मिलती है, तो वह अपने इस जनरल स्टोर के काम को और आगे ले जाना चाहती हैं। उनकी अगली योजना इस छोटे कारोबार को एक बड़े होलसेल बिजनेस में तब्दील करने की है, ताकि वह और अधिक तरक्की कर सकें।

सवाल-जवाब

बेबी देवी कहां की रहने वाली हैं?
बेबी देवी छपरा जिले के गरखा प्रखंड के गरखा बाजार की रहने वाली हैं।
उनके पति का निधन कब हुआ था?
उनके पति का निधन गंभीर बीमारी के कारण वर्ष 2007 में हुआ था।
उन्हें पहली बार व्यवसाय के लिए कितनी मदद मिली थी?
जीविका समूह से जुड़ने के बाद उन्हें रोजगार शुरू करने के लिए पहली बार 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिली थी।
व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए दूसरी बार कितनी राशि मिली?
कारोबार को बढ़ाने के लिए जीविका की ओर से उन्हें दूसरी बार 40 हजार रुपये की मदद दी गई थी।
बेबी देवी वर्तमान में क्या कारोबार करती हैं?
वह अपने घर से जनरल स्टोर का संचालन करती हैं और अब होलसेल कारोबार शुरू करने का सपना देख रही हैं।
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