रसोई में बनने वाले रोज़मर्रा के व्यंजनों में पुदीना, हरा धनिया और हरा प्याज जैसे ताज़े मसालों का बहुत महत्व होता है. अक्सर लोग इन्हें बार-बार बाज़ार से खरीदते हैं, जबकि इन्हें घर पर ही बहुत कम मेहनत में तैयार किया जा सकता है. इसके लिए किसी बड़े बगीचे या विशाल क्यारियों की जरूरत नहीं होती. अगर आपके पास बालकनी, खिड़की की चौखट या छत पर थोड़ी सी जगह है, तो साधारण गमलों में भी इनकी भरपूर पैदावार ली जा सकती है. सही प्रकार की मिट्टी, पर्याप्त रोशनी और पानी के उचित संतुलन के साथ बहुत कम समय में घरेलू किचन गार्डन तैयार हो जाता है.
पुदीने की डंठल से नया पौधा तैयार करने की विधि
पुदीना उगाने के लिए बाज़ार से लाई गई ताज़ी डंठलें सबसे बेहतर माध्यम साबित होती हैं. इसके लिए अच्छी और स्वस्थ डंठलों का चुनाव करें और उनके निचले हिस्से को पानी से भरे कांच के गिलास या कटोरी में रख दें. कुछ ही दिनों के भीतर इन डंठलों से सफेद जड़ें फूटने लगती हैं. जब जड़ें ठीक से दिखने लगें, तब इन्हें मिट्टी वाले गमले में रोप देना चाहिए. गमले के लिए भुरभुरी और बढ़िया जल निकासी वाली मिट्टी तैयार करें, ताकि अतिरिक्त पानी नीचे से निकल सके. पुदीने के गमले को ऐसी जगह रखना चाहिए जहाँ हल्की से मध्यम धूप आती हो. मिट्टी में नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन ध्यान रहे कि उसमें पानी जमा न होने पाए. पुदीना गमले में तेज़ी से फैलता है, इसलिए जब भी जरूरत हो, ऊपर की कोमल पत्तियां तोड़ते रहें, जिससे पौधा और घना होता जाएगा.
धनिया बोने और पत्तियों की कटाई का सही तरीका
घर में हरा धनिया उगाने की शुरुआत उच्च गुणवत्ता वाले बीजों से करनी चाहिए. धनिया के साबुत बीजों को मिट्टी में डालने से पहले हाथों या किसी समतल सतह पर हल्का सा मसलकर दो भागों में तोड़ लें. इन टुकड़ों को गमले की तैयार मिट्टी में लगभग आधा इंच की गहराई पर बोएं और ऊपर से मिट्टी की हल्की परत बिछा दें. मिट्टी में हल्का छिड़काव करके नमी बनाए रखें, जिससे बीज सूखने न पाएं. कुछ ही दिनों में बीजों से अंकुर फूटते दिखाई देने लगेंगे. धनिए के पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए उसे प्रतिदिन कुछ घंटों की सीधी धूप मिलना जरूरी है. पौधे जब कुछ इंच बड़े हो जाएं और उनमें स्वस्थ पत्तियां आ जाएं, तो आप अपनी आवश्यकतानुसार उनकी कटाई कर सकते हैं.
बची हुई जड़ों से हरा प्याज उगाने की तरकीब
सब्जियों में हरा प्याज उगाना सबसे सरल और त्वरित प्रक्रिया मानी जाती है. जब भी बाज़ार से हरा प्याज लाएं, तो इस्तेमाल करते समय उसका निचला सफेद जड़ वाला हिस्सा अलग काट कर रख लें. इन जड़ वाले हिस्सों को किसी छोटे बर्तन में पानी भरकर इस तरह रखें कि सिर्फ जड़ें पानी में डूबी रहें. दो से तीन दिनों के भीतर ही ऊपर से नई हरी पत्तियां और कोंपलें तेज़ी से निकलने लगेंगी. इसके बाद इन पौधों को मिट्टी के गमले में लगा दें. गमले की मिट्टी को हमेशा नम रखें और पौधे को ऐसी जगह रखें जहाँ पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और धूप मिल सके.
पौधों की देखभाल और बेहतर उपज के नियम
घर में हरी जड़ी-बूटियां उगाते समय गमले का ड्रेनेज सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अगर गमले के निचले छेद ठीक से खुले नहीं होंगे और पानी ठहरेगा, तो जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए ज़रूरत से ज़्यादा पानी देने से हमेशा बचें. पौधों को स्वस्थ रखने के लिए उन पर नज़र रखें और किसी भी सूखे या मुरझाए हुए पत्ते और डंठल को समय रहते हटाते रहें. पौधों की तेज़ और हरी-भरी बढ़वार के लिए मिट्टी तैयार करते समय उसमें थोड़ी जैविक खाद या अच्छी तरह सड़ी हुई कम्पोस्ट मिलाना बेहद फायदेमंद होता है.

















