हल्की गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही अक्टूबर का महीना बागवानी के शौकीनों के लिए सबसे बेहतरीन अवसर लेकर आता है। मौसम का यह हल्का मिजाज नए पौधों की जड़ों को जमाने और उनके स्वस्थ विकास के लिए प्राकृतिक रूप से सबसे मुफीद माना जाता है। यदि इस समय बालकनी के गमलों में सही फूलों का चयन कर लिया जाए, तो आने वाले कुछ ही हफ्तों में पूरा घर चटख रंगों और खुशबू से भर उठेगा। अक्टूबर के दौरान गमलों अथवा हैंगिंग बास्केट में आसानी से तैयार किए जा सकने वाले 7 प्रमुख पौधों और उनकी देखभाल की पूरी विधि यहां समझी जा सकती है।
गेंदा: हर आंगन और बालकनी की पारंपरिक पसंद
सदाबहार और पारंपरिक रूप से शुभ माना जाने वाला गेंदा हर भारतीय घर की पहली पसंद रहता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत कम देखभाल में भी शानदार परिणाम देता है। अक्टूबर के दिनों में गेंदे की पौध लगाना या इसके बीजों को गमलों में बोना बेहद सरल होता है। जाड़े के दिनों में जब इन पौधों पर घने, बड़े आकार के चमकीले पीले और नारंगी फूल खिलते हैं, तो बालकनी का पूरा वातावरण खिल उठता है। इन पौधों को ऐसी जगह रखना सबसे उपयुक्त होता है जहां दिन भर की भरपूर प्राकृतिक धूप सीधी पहुंचती हो।
पिटुनिया: सर्दियों के मौसम की असली रानी
सर्दियों के बाग की बात हो और पिटुनिया का जिक्र न आए, ऐसा मुमकिन नहीं है। इसे सर्दियों की रानी का दर्जा दिया जाता है क्योंकि यह अनगिनत रंगों, दोहरे शेड्स और किस्मों में उपलब्ध होता है। अक्टूबर के महीने में इसकी छोटी पौध लगाने से दिसंबर की शुरुआत तक गमले फूलों से पूरी तरह लद जाते हैं। पिटुनिया की ट्रेलिंग यानी लटकने वाली किस्में हैंगिंग बास्केट में बेहद आकर्षक लगती हैं, जो साधारण सी बालकनी को भी एक खूबसूरत विदेशी बगीचे जैसा रूप दे देती हैं।
डैंथस: कम धूप वाली बालकनी के लिए बेहतरीन फूल
डैंथस उन लोगों के लिए सबसे मुफीद विकल्प है जिनकी बालकनी में सीमित समय के लिए ही धूप आती है। इसके पौधे आकार में कॉम्पैक्ट होते हैं और इन पर खिलने वाले छोटे-छोटे फूल गुच्छों के रूप में नजर आते हैं। डैंथस के फूल किनारों से बारीक कटे हुए और बेहद सुंदर दिखते हैं। अक्टूबर में जब आप इसे लगाएं, तो गमले की साधारण मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई खाद मिलाना फायदेमंद रहता है, जिससे ठंड के दौरान इसमें लगातार नई कलियां फूटती रहती हैं।
पैंसी: तितलियों के पंखों जैसी मनमोहक छटा
पैंसी के फूलों का स्वरूप पहली नजर में किसी रंग-बिरंगी तितली जैसा प्रतीत होता है। यही अनूठा आकार और चटख रंगों का मेल इसे सर्दियों का सबसे खास पौधा बनाता है। यह पौधा हल्की धूप और ठंडी बयार में सबसे तेजी से फलता-फूलता है। अक्टूबर के दौरान पैंसी की रोपाई कर देने से कड़ाके की ठंड के दिनों में बालकनी में रंगों की अद्भुत छटा बिखर जाती है। इसमें नियमित अंतराल पर हल्की नमी बनाए रखने से इसके फूल हफ्तों तक तरोताजा बने रहते हैं।
साल्विया: चटख लालिमा बिखेरने वाली लंबी कलियां
यदि बालकनी में गहरे और स्पष्ट रंगों का कंट्रास्ट तैयार करना हो, तो साल्विया सबसे उम्दा चुनाव है। इसमें मुख्य रूप से गहरा लाल रंग सबसे अधिक लोकप्रिय है, हालांकि यह बैंगनी और गुलाबी रंगों में भी पाया जाता है। साल्विया के फूल एक लंबी स्पाइक यानी डंडी पर कतारबद्ध तरीके से खिलते हैं, जो दूर से ही ध्यान खींच लेते हैं। अक्टूबर में इन्हें लगाते समय गमले की मिट्टी में वर्मीकंपोस्ट का संतुलित मिश्रण जरूर शामिल करें, ताकि पौधों को जरूरी पोषण मिल सके और सर्दियों में इनकी ऊंचाई और बढ़वार शानदार रहे।
कैलेंडुला: खूबसूरती के साथ औषधीय गुणों का संगम
कैलेंडुला, जिसे आम बोलचाल में गुलर भी कहा जाता है, अपने दोहरे गुणों के लिए जाना जाता है। पीले और चटख नारंगी रंगों में डेज़ी के फूल जैसे दिखने वाले ये पौधे न केवल बालकनी की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि इनमें कई उपयोगी औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं। सर्दियों की हल्की गुनगुनी धूप में खिलने वाले कैलेंडुला को अक्टूबर में लगाना बहुत आसान है और इसके रख-रखाव में किसी खास झंझट की आवश्यकता नहीं होती।
एस्टर: तारों की तरह चमकने वाले रंग-बिरंगे सितारे
एस्टर के छोटे और सघन फूल बिल्कुल आसमान के चमकते तारों की भांति दिखाई देते हैं। यह नीले, बैंगनी, गुलाबी और सफेद जैसे मनमोहक रंगों में उपलब्ध होता है, जो सर्दियों के पूरे वातावरण को ताजगी से भर देता है। अक्टूबर के अंत तक यदि एस्टर की पौध लगाने का काम पूरा कर लिया जाए, तो दिसंबर और जनवरी के भीषण ठंड वाले महीनों में भी बालकनी में फूलों की कोई कमी महसूस नहीं होती।
गमलों की तैयारी और सही देखभाल के जरूरी नियम
सर्दियों के इन पौधों से भरपूर फूल लेने के लिए गमले की मिट्टी का सही अनुपात में तैयार होना अनिवार्य है। गमलों में ऐसा पॉटिंग मिक्स बनाएं जिससे अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकल सके। इसके लिए 50% सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30% अच्छी तरह तैयार गोबर की खाद या कम्पोस्ट और 20% साफ रेत का मिश्रण सबसे आदर्श साबित होता है। इसके अलावा, समय-समय पर गमले की ऊपरी मिट्टी की हल्की निराई-गुड़ाई करते रहें और पौधों को केवल आवश्यकतानुसार ही पानी दें, जिससे जड़ें गलने से बची रहें और पौधे स्वस्थ रहकर लगातार खिलते रहें।

















