जैसलमेर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल रामदेवरा में इन दिनों लोक देवता बाबा रामदेव के भादवा मेले को लेकर देश भर से भक्तों का तांता लगा हुआ है। एक तरफ जहाँ आस्था का यह विशाल समागम अपनी पूरी भव्यता के साथ चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ यहाँ आने वाले यात्रियों को गंभीर व्यवस्थागत समस्याओं और मनमानी का सामना करना पड़ रहा है। मंदिर परिसर के आसपास पहुँचने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या सुगम व्यवस्था के अनावश्यक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है और हर कदम पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
भादवा मेले में श्रद्धालुओं की परेशानी
लाखों और करोड़ों की संख्या में आस्थावान लोग रामदेवरा पहुँचकर अपनी गहरी निष्ठा प्रकट करते हैं। इस वार्षिक आयोजन के दौरान पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहता है, लेकिन इस बार मेले की चमक के पीछे वित्तीय शोषण के गंभीर आरोप भी सुनाई दे रहे हैं। आने वाले लोगों का मुख्य दर्द यह है कि उन्हें अपनी यात्रा के दौरान विभिन्न स्तरों पर मनमाने शुल्कों का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनकी धार्मिक यात्रा का आनंद तनाव में बदलता जा रहा है।
बैरिकेड्स लगाकर रास्तों को रोकना और जबरन वसूली
मेले में आने वाले मुख्य मार्गों पर तैनात कर्मियों द्वारा बड़े-बड़े अवरोधक और डंडे लगाकर रास्तों को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया जाता है। स्थिति ऐसी बन जाती है कि मुख्य मार्गों पर किसी टोल प्लाजा की तरह वाहनों को जबरन रोक लिया जाता है। आने-जाने वाले वाहन चालकों का आरोप है कि भले ही उन्हें अपनी गाड़ी किसी तय स्थान पर पार्क करनी हो या नहीं, उनसे अनिवार्य रूप से ₹100 का पार्किंग शुल्क वसूला जाता है। यदि कोई चालक यह स्पष्ट करता है कि उसने किसी होटल में कमरा बुक किया है और वह अपना वाहन सीधे परिसर के भीतर ले जाएगा, तब भी उसके साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है और आगे बढ़ने से रोक दिया जाता है।
वायरल वीडियो और दोहरी मार का संकट
इस प्रकार की मनमानी और अव्यवस्था से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार सामने आ रहे हैं, जो इस पूरी व्यवस्था की पोल खोलते नजर आते हैं। पीड़ित लोगों ने बताया कि एक बार पार्किंग शुल्क का भुगतान करने के बाद यदि कोई वाहन किसी आवश्यक कार्य से बाहर जाता है और पुनः लौटता है, तो उससे दोबारा वही शुल्क वसूला जाता है। पुरानी पर्ची दिखाने के बावजूद वहाँ मौजूद कर्मचारी किसी की बात सुनने को तैयार नहीं होते। इसके अलावा, मुख्य द्वार पर ₹100 ऐंठने के बाद जब वाहन अंदर पहुँचता है, तो अन्य पार्किंग स्थलों पर फिर से अलग से पैसे मांगे जाते हैं, जिससे एक ही वाहन पर दोहरी मार पड़ रही है।
दूसरी ओर, इस पूरी प्रक्रिया पर सफाई देते हुए पार्किंग शुल्क वसूलने वाले कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर ₹72 लाख से अधिक की बोली लगाकर नियमानुसार यह ठेका प्राप्त किया है। उनका तर्क है कि मेले के दौरान हर साल यह प्रक्रिया अपनाई जाती है और वे केवल निर्धारित नियमों के तहत ही राशि एकत्रित कर रहे हैं। हालांकि, दूर-दराज से अपनी आस्था लेकर पहुँचने वाले लोगों का तर्क बिल्कुल अलग है और वे इस व्यवस्था को पूरी तरह से गलत मानते हैं।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का रोष
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और आने वाले भक्तों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। दिनेश सारस्वत नामक एक श्रद्धालु ने इस पूरी व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह से रास्तों को बंद करना और बिना किसी स्पष्ट रसीद के पैसे ऐंठना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह प्रवृत्ति पिछले कुछ वर्षों में ही शुरू हुई है जिस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए और स्थानीय विधायक को इस पर संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई करनी चाहिए ताकि आगंतुकों को राहत मिल सके।



















