डीपफेक पर भड़कीं मृणाल ठाकुर, यशस्वी जायसवाल से डेटिंग की अफवाहों को किया खारिजमॉन्ट्रियल में जैक ड्रेपर की दर्दभरी वापसी, शारीरिक तकलीफ के बीच रो पड़े ब्रिटिश टेनिस स्टारद वैम्पायर लेस्टैट रिव्यू (2026): सैम रीड का शानदार रॉक स्टार अवतार और गॉथिक हॉरर का नया अंदाज़बैटमैन: कैप्ड क्रूसेडर सीजन 2 रिव्यू (2026): गोथम के अंधेरे को बयां करती एक ज्यादा मैच्योर एनिमेटेड सीरीजइश रिव्यू (2026): ब्रिटिश कमिंग-ऑफ-एज ड्रामा जो दिल छू लेता है5 अगस्त दैनिक राशिफल जानिए कन्या और मकर समेत सभी 12 राशियों की आर्थिक स्थिति, प्रेम और उपायउदयनिधि स्टालिन के बयान पर घमासान, तृषा कृष्णन प्रकरण के बीच गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने क्या कहाकन्या राशिफल 5 अगस्त 2026: मंगल और बुध का प्रभाव बढ़ाएगा काम की गति, जानें प्रेम, करियर और सेहत का हालधनु राशिफल 5 अगस्त 2026: बुध के गोचर के बीच अपनी वाणी पर रखें नियंत्रण, जानें लव, करियर और आर्थिक हालकुंभ राशिफल 5 अगस्त 2026: संवाद से संवरेंगे रिश्ते और बढ़ेगा भरोसा, जानें करियर, सेहत और आर्थिक स्थिति का पूरा हाल
जहानाबाद में सदियों पुरानी परंपरा, बैल कोल्हू का तेल क्यों है इतना महंगा और खास?जीवनशैली
20 जून 2026, 9:29 pm (45 दिन पहले)· 0

जहानाबाद में सदियों पुरानी परंपरा, बैल कोल्हू का तेल क्यों है इतना महंगा और खास?

जहानाबाद, बिहार में आज भी बैल कोल्हू से सरसों का तेल निकाला जाता है, जो सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है. यह तेल मशीनी तेल की तुलना में दोगुना या उससे भी अधिक महंगा बिकता है, क्योंकि यह अपने सभी पोषक तत्वों को बरकरार रखता है.

सरसों का तेल भारतीय रसोई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जिसका उपयोग केवल खाना पकाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की मालिश और अन्य कई घरेलू कार्यों में भी यह सहायक होता है. आयुर्वेद के विशेषज्ञ और डॉक्टर भी इसके उपयोग की सलाह देते हैं. हालांकि, समय के साथ उत्पादन के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है. बढ़ती आबादी की मांग को पूरा करने के लिए आधुनिक मशीनें कम समय और मानव शक्ति में अधिक तेल का उत्पादन करती हैं, जिससे प्राचीन, धीमी गति वाली परंपराएं लगभग खत्म हो गई हैं.

बिहार में जीवित एक अनूठी परंपरा

इस आधुनिक दौर में भी बिहार का एक हिस्सा अपनी प्राचीन विरासत को संजोए हुए है. जहानाबाद जिला मुख्यालय के पास मल्लहचक मोड़ पर आज भी बैल कोल्हू से सरसों का तेल निकाला जाता है. यह विधि गर्मियों में कम और सर्दियों में अधिक प्रचलित होती है, जहां दिनभर पारंपरिक तरीके से तेल पेराई का काम चलता है. राम रतन साव का परिवार कई सदियों से इस कार्य से जुड़ा हुआ है और उनके घर पर ही यह बैल कोल्हू लगा हुआ है.

ये भी पढ़ें

मशीनी तेल बनाम बैल कोल्हू का तेल: मूल्य और गुणवत्ता

राम रतन साव बताते हैं कि आज मशीनों का दौर है, जिसने कई पुरानी परंपराओं को विलुप्त कर दिया है. एक समय था जब उनके स्थान पर आधा दर्जन बैल मिलकर दिनभर में क्विंटल भर तेल निकालते थे, लेकिन अब केवल एक ही बैल बचा है, जिसका उपयोग सरसों के साथ-साथ अन्य प्रकार के तेल निकालने के लिए भी किया जाता है. बैल कोल्हू से निकले तेल की गुणवत्ता और शुद्धता के कारण इसका बाजार मूल्य काफी अधिक होता है. जहां साधारण मशीनी सरसों का तेल लगभग ₹200 प्रति किलो बिकता है, वहीं बैल कोल्हू से निकला तेल बाजार में ₹400 प्रति किलो और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तो ₹500 प्रति किलो तक पहुंच जाता है.

स्वास्थ्य लाभ और आयुर्वेदिक सिफारिशें

इस उच्च कीमत का मुख्य कारण तेल की उत्पादन प्रक्रिया और उसके स्वास्थ्य लाभ हैं. राम रतन साव के अनुसार, मशीनों से तेल निकालते समय गर्मी उत्पन्न होती है, जिससे सरसों के अधिकांश प्राकृतिक गुण नष्ट हो जाते हैं. इसके विपरीत, बैल कोल्हू धीमी गति से चलता है और तेल को गर्म नहीं होने देता, जिससे सरसों के सभी पोषक तत्व और औषधीय गुण बरकरार रहते हैं. यही कारण है कि आयुर्वेद के कई डॉक्टर बैल कोल्हू से निकले सरसों के तेल का उपयोग करने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह शरीर के लिए अधिक फायदेमंद होता है.

सीमित उत्पादन और बढ़ती मांग

यह पारंपरिक विधि धीमी होती है, जिससे उत्पादन भी सीमित रहता है. गर्मियों के दौरान, दिनभर की मेहनत से लगभग 4 किलो तेल निकलता है, जो घंटों में ही बिक जाता है. सर्दियों में यह उत्पादन बढ़कर लगभग 8 किलो तक पहुंच जाता है. यह दर्शाता है कि शुद्ध और पारंपरिक रूप से तैयार किए गए उत्पादों की मांग आज भी बनी हुई है और लोग इनकी गुणवत्ता के लिए अधिक कीमत चुकाने को भी तैयार हैं.

सवाल-जवाब

बैल कोल्हू से तेल निकालने की परंपरा कहाँ जीवित है?
यह परंपरा बिहार के जहानाबाद जिला मुख्यालय स्थित मल्लहचक मोड़ के पास आज भी जीवित है, जहाँ राम रतन साव का परिवार सदियों से इस कार्य को कर रहा है।
बैल कोल्हू से निकला सरसों का तेल मशीनी तेल से महंगा क्यों होता है?
बैल कोल्हू से तेल धीमी गति से बिना गर्मी उत्पन्न किए निकलता है, जिससे सरसों के सभी प्राकृतिक गुण और पोषक तत्व बरकरार रहते हैं. मशीनी प्रक्रिया में गर्मी के कारण ये गुण नष्ट हो जाते हैं, इसलिए पारंपरिक तेल महंगा होता है।
बैल कोल्हू के सरसों तेल की कीमत क्या है?
यह तेल बाजार में लगभग ₹400 प्रति किलो और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ₹500 प्रति किलो तक बिकता है, जबकि साधारण मशीनी तेल ₹200 प्रति किलो होता है।
बैल कोल्हू से दिनभर में कितना तेल निकलता है?
गर्मियों में दिनभर में लगभग 4 किलो तेल निकलता है, जबकि सर्दियों में यह उत्पादन 8 किलो तक पहुंच जाता है।
किस प्रकार के डॉक्टर या विशेषज्ञ बैल कोल्हू के तेल की सलाह देते हैं?
आयुर्वेद के विशेषज्ञ और डॉक्टर बैल कोल्हू से निकले सरसों के तेल का उपयोग करने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह अपने प्राकृतिक गुणों के कारण अधिक फायदेमंद होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR