ओडिशा की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर एक नया और अभूतपूर्व सम्मान मिलने जा रहा है। विश्व प्रसिद्ध पुरी रथ यात्रा में प्रयुक्त होने वाले तीनों पवित्र रथों के पहिए जल्द ही देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन की शोभा बढ़ाएंगे। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के प्रस्ताव को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हरी झंडी मिलने के बाद अब इन तीनों पहियों को राष्ट्रपति भवन परिसर में स्थायी रूप से स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
लोक भवन में हुई मुलाकात के बाद मिली आधिकारिक मंजूरी
इस ऐतिहासिक पहल की नींव भुवनेश्वर स्थित लोक भवन में रखी गई, जहां श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान अरविंद पाढ़ी ने राष्ट्रपति के समक्ष एक विशेष प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों के पहियों को राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित करने का सुझाव दिया गया था। राष्ट्रपति ने इस विचार का स्वागत करते हुए तुरंत अपनी मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद अब इन पावन पहियों को जल्द ही नई दिल्ली लाया जाएगा, जहां वे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के अमर प्रतीक के रूप में दिखाई देंगे।
पुरी रथ यात्रा और रथ निर्माण की अनोखी परंपरा
पुरी की वार्षिक रथ यात्रा अपनी अलौकिक परंपराओं और अनूठी निर्माण शैली के लिए जानी जाती है। हर साल इस उत्सव के लिए पूरी तरह से नई लकड़ी का उपयोग करके तीन विशाल रथों का निर्माण किया जाता है
- नंदीघोष: भगवान जगन्नाथ के लिए विशेष रूप से निर्मित किया जाने वाला रथ।
- तालध्वज: भगवान बलभद्र के लिए तैयार किया जाने वाला विशाल रथ।
- दर्पदलन: देवी सुभद्रा के लिए समर्पित भव्य रथ।
धार्मिक नियमों के अनुसार, रथ यात्रा संपन्न होने के बाद इन तीनों रथों को खोल दिया जाता है। अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इन रथों की पवित्र लकड़ी का एक बड़ा हिस्सा श्री जगन्नाथ मंदिर की विशाल रसोई में महाप्रसाद पकाने के ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, रथों के कुछ विशेष और महत्वपूर्ण हिस्सों की श्रद्धालुओं के बीच नीलामी की जाती है, जिन्हें भक्त अपने घरों में पवित्र प्रतीक के रूप में रखते हैं। इसके बाद अगले वर्ष की यात्रा के लिए पुनः पूरी तरह से नए रथों का निर्माण किया जाता है।
राष्ट्रपति भवन में ओडिशा की कला का दूसरा बड़ा पड़ाव
राष्ट्रपति भवन में ओडिशा की सांस्कृतिक और स्थापत्य कला को स्थान मिलने का यह पहला अवसर नहीं है। इससे पहले 29 अक्टूबर 2024 को विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर के ऐतिहासिक पत्थर के पहियों की चार प्रतिकृतियां राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र और प्रसिद्ध अमृत उद्यान में स्थापित की गई थीं। उस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत और विदेश से आने वाले अतिथियों को देश के महान वास्तुशिल्प से परिचित कराना था। अब पुरी रथ यात्रा के पवित्र पहियों का राष्ट्रपति भवन पहुंचना ओडिशा के सांस्कृतिक गौरव को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।



















