मध्य प्रदेश में नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा कार्यक्रमों में गैर-हिंदू युवकों की उपस्थिति को लेकर छिड़ी बहस अब तीखे राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गई है। राज्य भर में नवरात्रि के उपलक्ष्य में बड़े स्तर पर पारंपरिक गरबा और डांडिया का आयोजन किया जाता है। इसी दौरान कुछ संगठनों की तरफ से मुस्लिम युवकों के प्रवेश पर रोक लगाने का ऐलान किया गया था। इस रोक का समर्थन करते हुए भारतीय जनता पार्टी के विधायक रामेश्वर शर्मा ने भोपाल के एक कार्यक्रम में मंच से बोलते हुए ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसने पूरे प्रदेश का सियासी तापमान बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम युवकों को गरबा में शामिल होने का शौक है, तो उन्हें अपने परिवार की महिलाओं को भी साथ लाना चाहिए, जिसके बाद उनके शब्दों को लेकर कड़ा विरोध शुरू हो गया।
विपक्षी दल ने साधा निशाना और दी चेतावनी
विपक्षी दल कांग्रेस ने इस बयान पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए तुरंत मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने पलटवार करते हुए कहा कि रामेश्वर शर्मा केवल नफरत फैलाने का काम करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार भाषा की सभी सीमाएं लांघ दी गई हैं। आरिफ मसूद ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अभी भी समय है कि वे अपने आचरण में सुधार कर लें, वरना उन्हें सुधार दिया जाएगा। विपक्ष के इस आक्रामक तेवर के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और भाजपा नेता के इस्तीफे व माफी की मांग उठने लगी।
बयान पर सफाई और पूजा स्थलों को लेकर तर्क
बढ़ते हंगामे के बीच रामेश्वर शर्मा ने अपनी बात पर सफाई दी और आरोप लगाया कि उनके कथन को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। अपने बचाव में उन्होंने धार्मिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि गरबा पंडाल वास्तव में हिंदुओं की आस्था और मां दुर्गा की उपासना का पवित्र स्थल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो समुदाय मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखता, उसके लोग वहां जबरन क्यों आना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को गरबा और हिंदू रीति-रिवाजों से इतना ही लगाव है, तो वह अपना धर्म परिवर्तन कर ले और फिर गरबा खेले। इसके साथ ही उन्होंने विधायक आरिफ मसूद को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि वे अपने तेवर पर आ गए, तो आरिफ मसूद को भोपाल में छुपने की जगह भी नहीं मिलेगी। इससे पहले भी दो दिन पूर्व काजी चौक पर मिसाइल दागने संबंधी टिप्पणी को लेकर उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी थी।
इंदौर में महिला पार्षद पर टिप्पणी को लेकर कैलाश विजयवर्गीय की असहजता
प्रदेश में बयानों को लेकर असहज स्थिति का सामना करने वाले रामेश्वर शर्मा अकेले नेता नहीं हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव की मंत्रिपरिषद के सदस्य कैलाश विजयवर्गीय को भी अपने एक वक्तव्य के चलते माफी मांगनी पड़ी। यह वाकया उस समय हुआ जब वे इंदौर में नए विकास कार्यों का शुभारंभ करने पहुंचे थे। जनसभा के दौरान विभिन्न वार्डों की नागरिक समस्याओं का उल्लेख करते हुए मंच पर मौजूद वार्ड संख्या 6 की भाजपा पार्षद संध्या यादव पर उन्होंने एक व्यक्तिगत टिप्पणी कर दी। इस टिप्पणी से सभा में असहजता फैल गई और विपक्षी दल ने इसे महिलाओं के प्रति अनुचित दृष्टिकोण का परिचायक बताया।
पारिवारिक रिश्तों का हवाला और मामले का पटाक्षेप
कांग्रेस नेता शोभा ओझा ने इस मामले पर हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं का अनादर करना भाजपा नेताओं की नियमित कार्यशैली बन चुका है और यह घटना उसी का स्पष्ट प्रमाण है। विवाद गहराते ही कैलाश विजयवर्गीय ने सामने आकर स्थिति साफ की और खेद व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संध्या यादव उनके लिए बेटी के समान हैं और उन्होंने यह बात हल्के-फुल्के पारिवारिक माहौल में कही थी, जिसे बेवजह गलत संदर्भ में प्रसारित किया गया। इसके फौरन बाद पार्षद संध्या यादव ने भी सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा कि कैलाश विजयवर्गीय उनके पिता तुल्य हैं और उनके द्वारा कही गई बात पूरी तरह से हास्य-विनोद का हिस्सा थी, जिसे बिना किसी कारण के राजनीतिक तूल दिया जा रहा है।























