घर की बगिया और बालकनी में गमलों की देखभाल करने वाले लोग अक्सर पौधों की बेहतर बढ़त के लिए प्राकृतिक विकल्पों की तलाश करते हैं। भोजन बनाते समय आमतौर पर प्याज की सूखी ऊपरी परत या छिलकों को कचरा मानकर कूड़ेदान में डाल दिया जाता है। इस घरेलू सामग्री को फेंकने के स्थान पर पौधों के लिए एक उपयोगी जैविक तरल घोल के रूप में बदला जा सकता है। प्याज की इन सूखी परतों में पाए जाने वाले कार्बनिक यौगिक और प्राकृतिक पोषक तत्व पौधों के सामान्य स्वास्थ्य और विकास में सहारा देते हैं। इस प्राकृतिक तरल को मुख्य खाद का पूर्ण विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह सामान्य पोषण के साथ एक सहायक उपाय के रूप में काम करता है।
तरल जैविक घोल तैयार करने का सही तरीका
इस प्राकृतिक मिश्रण को बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है और इसके लिए बहुत अधिक सामान की आवश्यकता नहीं पड़ती। सबसे पहले चार से पांच प्याज के साफ छिलके एकत्रित कर लें। इन छिलकों पर धूल, मिट्टी या किसी भी प्रकार की गंदगी लगी हो सकती है, इसलिए पानी से अच्छी तरह धोकर उन्हें साफ करना चाहिए। इसके पश्चात एक बर्तन में लगभग 1 लीटर साफ पानी लें और धुले हुए छिलकों को उसमें पूरी तरह डुबो दें। पोषक तत्वों को पानी में घुलने का अवसर देने के लिए इस घोल को 24 से लेकर 48 घंटे तक ऐसे ही भीगने के लिए छोड़ देना चाहिए।
इस्तेमाल की विधि और जरूरी सावधानियां
निर्धारित समय यानी 24 से 48 घंटे पूरे हो जाने के बाद, छन्नी की मदद से पानी को छानकर अलग कर लें और बचे हुए ठोस छिलकों को हटा दें। यह छना हुआ तरल सीधे पौधों पर प्रयोग करने योग्य बन जाता है। इस अर्क को गमलों में डालने से पहले थोड़े अतिरिक्त सादे पानी के साथ मिलाकर हल्का कर लेना अधिक सुरक्षित और लाभकारी रहता है। छोटे गमलों में इसकी अधिक मात्रा डालने से बचना चाहिए, ताकि जड़ों पर अतिरिक्त भार न पड़े।
इस तरल को उपयोग में लाने की सबसे सुगम तकनीक इसे सीधे गमले की मिट्टी में पहुंचाना है। जब मिट्टी पहले से हल्की नम हो या पौधे को पानी दिया जा चुका हो, तब इस तरल को पौधे की मुख्य जड़ के चारों तरफ धीरे-धीरे डालना चाहिए। यदि गमला छोटा है, तो पहले बहुत सीमित मात्रा देकर शुरुआत करें और कुछ दिनों तक यह देखें कि पौधे की पत्तियों और तने पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
फूलों की गुणवत्ता और भंडारण के नियम
बागवानी के शौकीन लोग जब मौसमी या बारहमासी फूल वाले पौधे लगाते हैं, तो वे अपनी सामान्य देखभाल दिनचर्या के साथ इस प्राकृतिक खाद को शामिल कर सकते हैं। केवल इस अर्क के प्रयोग मात्र से पौधों में भारी मात्रा में फूल खिलने का पूर्ण आश्वासन नहीं मिलता। पौधों पर अच्छी संख्या में कलियां और फूल खिलने के लिए संतुलित धूप, पर्याप्त नमी, गमले की मिट्टी की गुणवत्ता, उपयुक्त मौसम का तापमान और अन्य संतुलित पोषक तत्वों का होना भी उतना ही अनिवार्य होता है।
इस तरह तैयार किए गए अर्क को बहुत लंबे समय तक शीशियों या बर्तनों में भरकर सुरक्षित न रखें, इसे ताजा बनाकर प्रयोग में लाना ही सबसे उपयुक्त माना गया है। यदि रखे हुए पानी में से दुर्गंध आने लगे अथवा उसके रंग या बनावट में खराबी के लक्षण दिखाई देने लगें, तो ऐसे बासी पानी को पौधों में न डालें। यदि जरूरत से अधिक मात्रा में पानी तैयार हो गया है और वह समय बीतने के कारण खराब हो चुका है, तो उसे फेंक देना ही उचित है।


















