समुद्री भोजन पकाने के शौकीन लोग अक्सर झींगा यानी प्रॉन्स बनाते समय जल्दबाजी कर बैठते हैं और उसकी पीठ पर दिखने वाले काले धागे जैसी लकीर को नजरअंदाज कर देते हैं। कई लोग इसे मामूली समझकर सीधे कड़ाही में डाल देते हैं, लेकिन यह छोटी सी लापरवाही सेहत के लिए भारी पड़ सकती है। अगर इस हिस्से को हटाए बिना भोजन तैयार किया जाए, तो न केवल पेट में संक्रमण या पाचन संबंधी गड़बड़ी हो सकती है, बल्कि पूरी डिश का स्वाद भी किरकिरा हो जाता है। इसलिए रसोई में झींगा लाते ही उसकी सफाई और डीवेनिंग की सही प्रक्रिया समझना हर किसी के लिए बेहद जरूरी है।
पीठ की काली नस का असली सच
बहुत से लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि झींगे की पीठ पर मौजूद यह काली पतली लकीर खून का संचरण करने वाली नस है। हकीकत इससे बिल्कुल अलग है, क्योंकि यह रेखा वास्तव में झींगे की पाचन नली यानी डाइजेस्टिव ट्रैक्ट होती है। झींगे अपना भोजन समुद्र या पानी की तलहटी में मौजूद कीचड़ और रेत के बीच तलाशते हैं। इस वजह से उनके इस पाचन मार्ग में अपशिष्ट पदार्थ, बारीक बालू और मिट्टी के कण लगातार जमा होते रहते हैं। जब इस नली को निकाले बिना पकाया जाता है, तो चबाते समय मुंह में रेत जैसा किरकिरापन महसूस होता है और खाने का सारा आनंद खत्म हो जाता है।
स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभाव
अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि तेज आंच पर पकाने से समुद्री भोजन के सारे कीटाणु और बैक्टीरिया मर जाते हैं। भले ही तेज तापमान से रोगाणु खत्म हो जाएं, लेकिन पाचन नली में फंसा अपशिष्ट पदार्थ और गंदगी भोजन में ही घुली रह जाती है। इस दूषित पदार्थ का सेवन करने से पेट में मरोड़, दर्द, अपच और जी मिचलाने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जिन लोगों की पाचन शक्ति कमजोर होती है या जिनका पेट अत्यधिक संवेदनशील होता है, उनके लिए यह खतरा और भी बड़ा साबित हो सकता है। इसके अतिरिक्त, जिन्हें सी-फूड से एलर्जी की समस्या रहती है, उनके स्वास्थ्य को भी इससे गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
स्वाद और बनावट का बिगड़ना
शारीरिक परेशानियों के साथ-साथ यह काली नस आपके बनाए गए भोजन के स्वाद को पूरी तरह नष्ट कर सकती है। इस नली में मौजूद गंदगी की वजह से पकाए गए प्रॉन्स का स्वाद कड़वा और बेमजा हो जाता है। किसी भी बेहतरीन समुद्री डिश की असली पहचान उसकी कोमल बनावट और ताजगी भरी खुशबू से होती है। यदि झींगे को साफ करते समय इस नस को नहीं निकाला गया, तो व्यंजन की बनावट पूरी तरह खराब हो जाएगी। इसी वजह से पाक कला विशेषज्ञ डीवेनिंग यानी नस निकालने की प्रक्रिया को एक अनिवार्य कदम मानते हैं, ताकि भोजन का कुलीनरी अनुभव एकदम बेहतरीन बना रहे।
डीवेनिंग और सफाई का सबसे आसान तरीका
घर की रसोई में झींगा साफ करना कोई बहुत जटिल काम नहीं है, बस थोड़ी सी सावधानी और सही तकनीक की जरूरत होती है। सबसे पहले प्रॉन्स के सिर को काटकर अलग कर लें और उसके ऊपर मौजूद कड़े सुरक्षात्मक छिलके को धीरे से उतार दें, जबकि सुंदरता और पकड़ के लिए पूंछ वाले हिस्से को वैसा ही छोड़ सकते हैं। इसके बाद एक छोटी और धारदार चाकू लेकर झींगे की पीठ के ऊपरी हिस्से पर लंबाई में एक उथला चीरा लगाएं।
चीरा लगाने के बाद चाकू की नुकीली नोक अथवा किसी साफ टूथपिक की मदद से उस काले धागे जैसी नस को हल्के हाथ से ऊपर की ओर उठाएं। जैसे ही आप इसे धीरे से खींचेंगे, वह पूरी की पूरी नली एक ही बार में बाहर निकल आएगी। इसके तुरंत बाद सभी प्रॉन्स को बहते ठंडे पानी के नीचे अच्छी तरह धो लें, ताकि जो भी बारीक गंदगी या अवशेष चिपका रह गया हो, वह पूरी तरह बह जाए। यदि आप बड़े आकार के झींगे बना रहे हैं, तो उनके पेट के निचले हिस्से की तरफ भी एक बारीक नस दिखाई दे सकती है, सुरक्षित रहने के लिए उसे भी इसी तरह बाहर निकाल देना बेहतर माना जाता है।
सुरक्षित खानपान के लिए बरतें जरूरी सतर्कता
झींगा साफ करने में कुछ मिनटों का अतिरिक्त समय जरूर लग सकता है, लेकिन यह मेहनत आपकी सेहत और परिवार की सुरक्षा के लिहाज से बेहद फलदायी है। अच्छी तरह धोकर और नसें निकालकर तैयार किया गया झींगा पकाने में भी सुरक्षित होता है और मसालों के असली स्वाद को पूरी तरह सोखता है। इसलिए भविष्य में जब भी आप झींगे की कोई विशेष करी, रोस्ट या स्नैक्स तैयार करें, तो इस बुनियादी सफाई को कभी न भूलें। स्वच्छता के साथ पकाया गया भोजन न केवल बीमारियों से दूर रखता है, बल्कि आपकी पाक कला की तारीफ भी करवाता है।



















