भारतीय खानपान और घरेलू नुस्खों में दालचीनी का उपयोग सदियों से होता आ रहा है। यह सुगंधित मसाला न केवल व्यंजनों का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी इसे औषधीय महत्व प्राप्त है। आमतौर पर किराना दुकानों और सुपरमार्केट्स में मिलने वाली दालचीनी को लोग एक जैसा ही मान लेते हैं, जबकि वास्तविकता इससे काफी अलग है। बाजार में मुख्य रूप से दो प्रकार की दालचीनी बिकती है, जिनमें एक असली सीलोन दालचीनी होती है और दूसरी कैसिया दालचीनी। ऊपर से देखने पर दोनों में काफी समानता दिखाई देती है, मगर गहराई से परखने पर इनके रंग, बनावट, स्वाद और शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव में भारी अंतर सामने आता है।
सीलोन और कैसिया दालचीनी की बनावट और दिखावट में अंतर
असली दालचीनी को सीलोन दालचीनी के नाम से जाना जाता है। इसका रंग हल्का भूरा या सुनहरा होता है। यदि इसकी छाल पर ध्यान दिया जाए, तो यह सिगार के रोल की तरह कागज जैसी अत्यंत पतली कई तहों में एक के ऊपर एक लिपटी हुई दिखाई देती है। यह इतनी नाजुक और कोमल होती है कि उंगलियों से हल्का सा दबाव डालने पर भी आसानी से भुरभुरी होकर टूट जाती है। इसके विपरीत, सामान्य या नकली मानी जाने वाली कैसिया दालचीनी का रंग गहरा लाल-भूरा होता है। कैसिया की डंडी बेहद मोटी और सख्त होती है। इसमें कागज जैसी बारीक कई परतें नहीं होतीं, बल्कि केवल एक या दो मोटी परतें ही मुड़ी हुई नजर आती हैं, जिन्हें हाथ से तोड़ना बेहद कठिन काम होता है।
स्वाद और सुगंध के आधार पर पहचान
दालचीनी की खुशबू और उसका स्वाद भी उसकी असलियत उजागर करने का एक बड़ा जरिया है। असली सीलोन दालचीनी की सुगंध बहुत ही सौम्य, मीठी और मनमोहक होती है। इसका स्वाद भी मुंह में हल्का मीठा और कोमल अहसास छोड़ता है। यही वजह है कि बेहतरीन व्यंजनों, बेकिंग और हर्बल ड्रिंक्स में सीलोन दालचीनी को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। दूसरी तरफ, कैसिया दालचीनी की महक काफी तीखी, तेज और भारी होती है। इसका स्वाद भी जीभ पर एकदम कड़वापन और तीखापन पैदा करता है। बाजार में सामान्य तौर पर बेहद सस्ते दामों पर मिलने वाली अधिकांश दालचीनी दरअसल यही कैसिया दालचीनी होती है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से कौन सी दालचीनी बेहतर
स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से दोनों किस्मों में एक बेहद महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अंतर मौजूद है। सीलोन दालचीनी में कूमारिन नामक प्राकृतिक रासायनिक तत्व की मात्रा न के बराबर यानी बेहद कम पाई जाती है। वहीं दूसरी ओर, कैसिया दालचीनी में कूमारिन काफी अधिक मात्रा में मौजूद होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि भोजन में लंबे समय तक अत्यधिक मात्रा में कूमारिन का सेवन किया जाए, तो यह सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। यही कारण है कि रोजाना के खानपान और नियमित घरेलू उपयोग के लिए असली सीलोन दालचीनी को ही स्वास्थ्यवर्धक और पूरी तरह सुरक्षित विकल्प माना गया है।
खरीदारी करते समय ध्यान रखने योग्य जरूरी सावधानियां
दालचीनी खरीदते समय कुछ व्यावहारिक बातों का ध्यान रखकर मिलावट या सस्ती कैसिया से बचा जा सकता है। हमेशा किसी प्रतिष्ठित और भरोसेमंद ब्रांड के उत्पाद का ही चयन करें। यदि डिब्बाबंद दालचीनी खरीद रहे हैं, तो पैकेट पर सीलोन दालचीनी स्पष्ट रूप से दर्ज होने पर ही उसे प्राथमिकता दें। बहुत कम कीमत में मिल रही बेहद सस्ती दालचीनी खरीदने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि कम दाम अमूमन कैसिया होने का संकेत देते हैं। इसके अलावा, पिसे हुए पाउडर के बजाय साबुत दालचीनी की स्टिक खरीदना ज्यादा बेहतर विकल्प है, ताकि घर पर उसकी परतों की बारीक बनावट, रंग और टूटने की क्षमता को देखकर उसकी शुद्धता की तुरंत पुष्टि की जा सके।



















