बागवानी के शौकीन लोग अक्सर अपने बगीचे को हरा-भरा बनाने के लिए नर्सरी पर निर्भर रहते हैं। बाजार से बार-बार पौधे खरीदकर लाना कई बार काफी महंगा साबित होता है। दूसरी ओर, कई लोग बीजों के सहारे नए पौधे उगाने का प्रयास करते हैं, लेकिन बीजों से अंकुरित हुए पौधे अक्सर शुरुआती दौर में ही सूख जाते हैं। इस परेशानी से बचने के लिए कलम और ग्राफ्टिंग जैसी पारंपरिक बागवानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उचित देखभाल और सही प्रक्रिया का पालन करके किसी भी स्वस्थ पौधे से कई नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं, जिससे घर के बगीचे को बिना अतिरिक्त खर्च के सुंदर बनाया जा सकता है।
सही टहनी का चुनाव और तैयारी की बारीकियां
पूर्णिया के कृषि विशेषज्ञ आशुतोष कुमार ने बताया कि इस प्रक्रिया की सफलता सबसे पहले टहनी के सही चुनाव पर निर्भर करती है। किसी भी स्वस्थ पौधे से ऐसी डाली को अलग करना चाहिए जो कोमल हो और जिस पर कोई फूल न खिला हो। बहुत अधिक पुरानी, सख्त या ज्यादा मजबूत लकड़ी वाली डालियों के बजाय लचीली और ताजी कोमल टहनी इस काम के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। सावधानीपूर्वक टहनी को मुख्य पौधे से अलग करने के बाद उसके निचले हिस्से की पत्तियों को पूरी तरह हटा देना चाहिए। इसके बाद कटर की सहायता से उस टहनी के सबसे निचले सिरे को अंग्रेजी के V आकार में तराश कर काटा जाता है, जिससे वह आसानी से जड़ पकड़ने के अनुकूल बन सके।
रोपाई और नमी का उचित प्रबंधन
कलम तैयार हो जाने के बाद उसे नम मिट्टी में रोपना होता है। आशुतोष कुमार के अनुसार, टहनी को मिट्टी में दबाने से पहले उसके कटे हुए V आकार वाले निचले हिस्से पर एलोवेरा पौधे की ताजी जेल लगाई जा सकती है। यह जेल प्राकृतिक उपचार की तरह काम करती है और पौधे को सुरक्षित रखने में मदद करती है। इसके तुरंत बाद टहनी को गीली मिट्टी में व्यवस्थित ढंग से रोप दिया जाता है। रोपाई के बाद सबसे महत्वपूर्ण काम मिट्टी की नमी को संतुलित रखना है। गमले या क्यारी की मिट्टी में लगातार नमी बनी रहनी चाहिए, जिसके लिए निश्चित अंतराल पर हल्का पानी देते रहना जरूरी है। कुछ समय बाद इसी रोपी गई टहनी के निचले हिस्से से बारीक जड़ें फूटने लगती हैं।
गेंदे समेत कई फूलों के पौधों में कारगर उपाय
जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, टहनी धीरे-धीरे मिट्टी में अपनी पकड़ मजबूत कर लेती है और एक पूर्ण पौधे के रूप में विकसित होने लगती है। कृषि विशेषज्ञ आशुतोष कुमार का कहना है कि यह तकनीक विशेष रूप से गेंदा और कई अन्य मौसमी फूलों वाले पौधों को तैयार करने में बेहद कारगर साबित होती है। इस घरेलू तरीके को अपनाकर बागवानी करने वाले लोग अपने बगीचे में पौधों की संख्या कई गुना बढ़ा सकते हैं और बार-बार नर्सरी जाकर नए पौधे खरीदने पर होने वाले अनावश्यक खर्च से भी आसानी से बच सकते हैं।



















