ड्राई फ्रूट्स में अखरोट को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में हेल्दी फैट, प्रोटीन और फाइबर जैसे कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। हालांकि, इसका पूरा फायदा तभी मिलता है जब बाजार से सही क्वालिटी का दाना चुनकर लाया जाए। लोग अक्सर दुकान पर पहुंचते ही अखरोट के आकार, रंग और उसकी बाहरी चमक को देखकर तुरंत सौदा पक्का कर लेते हैं। लेकिन सिर्फ ऊपरी खूबसूरती देखकर यह तय कर पाना नामुमकिन है कि दाना अंदर से भी उतना ही शानदार होगा। कई बार ऐसा देखा गया है कि बाहर से एकदम दुरुस्त दिखने वाला अखरोट तोड़ने पर अंदर से सूखा हुआ, बासी या पूरी तरह खराब निकलता है। गनीमत यह है कि कुछ आसान और व्यावहारिक तरीकों को अपनाकर ग्राहक बिना छिलका हटाए ही अंदर की गुणवत्ता का सटीक अंदाजा लगा सकते हैं, बशर्ते खरीदारी करते वक्त थोड़ी सी सतर्कता बरती जाए।
छिलके की बनावट और दरारों की जांच
खरीदारी की शुरुआत हमेशा अखरोट के बाहरी आवरण को गौर से देखने से करनी चाहिए। उसका छिलका किसी भी सूरत में बहुत ज्यादा गीला, चिपचिपा या जगह-जगह से टूटा-फूटा नहीं होना चाहिए। वैसे तो छिलके पर हल्की प्राकृतिक खुरदरापन होना आम बात है, लेकिन यदि उस पर बड़े कट या गहरी दरारें साफ नजर आएं, तो ऐसे पीस खरीदने से तौबा करना ही बेहतर है। आवरण में जरा सी भी दरार होने पर नमी आसानी से अंदर तक पहुंच जाती है, जिससे दाना बहुत कम समय में खराब होने लगता है। ऐसे में बाजार में एक-दो पीस हाथ में उठाकर उनके छिलके की तहकीकात करना बेहद जरूरी है। इस छोटी सी सावधानी से खराब माल को आसानी से अलग छांटा जा सकता है।
वजन और घनत्व का पैमाना
छिलके की जांच के बाद अगले चरण में अखरोट को अपनी हथेली पर रखकर उसके वजन का अनुमान लगाना चाहिए। यदि कोई पीस उसके साइज के मुकाबले काफी हल्का महसूस हो, तो इस बात की पूरी आशंका है कि अंदर की गिरी सूख चुकी होगी या फिर उसका विकास ठीक से नहीं हो पाया होगा। इसके विपरीत, एक बढ़िया और स्वस्थ अखरोट उठाने पर थोड़ा भारी और अंदर से ठोस महसूस होता है। हालांकि, केवल वजन को ही एकमात्र पैमाना नहीं बनाया जाना चाहिए बल्कि इसे अन्य संकेतों के साथ मिलाकर देखना चाहिए। दो अलग-अलग पीस को हाथ में लेकर आपस में वजन की तुलना करने से सही फर्क तुरंत समझ में आ जाता है।
हिलाकर देखें और आवाज सुनें
अखरोट की अंदरूनी स्थिति का पता लगाने का एक और बहुत आसान तरीका यह है कि उसे कान के पास ले जाकर हल्का सा हिलाया जाए। यदि उसके भीतर से बहुत तेज खड़खड़ाहट की आवाज आए या ऐसा लगे कि अंदर काफी खाली जगह बची हुई है, तो समझ लीजिए कि गिरी अंदर से सिकुड़ चुकी है। हालांकि इसका यह मतलब कतई नहीं है कि ऐसा हर पीस अंदर से सड़ा हुआ ही निकलेगा, फिर भी ज्यादा आवाज आने पर सतर्क हो जाना समझदारी है। अच्छी गुणवत्ता वाली गिरी छिलके के भीतर ज्यादा खाली जगह नहीं छोड़ती है, इसलिए खरीदारी के वक्त यह आजमाया जा सकता है।
फफूंदी, नमी और गंध से करें पहचान
यदि छिलके के ऊपर किसी भी तरह के काले धब्बे, हरी या सफेद रंग की फफूंदी और कोई असामान्य नमी दिखाई दे, तो उस माल को तुरंत छोड़ देना चाहिए। इसके अलावा, यदि छिलके से किसी प्रकार की अजीब या बासी गंध आ रही हो, तो यह उसके खराब होने का सबसे पक्का संकेत माना जाता है। ऐसे खराब माल को घर ले जाकर इस्तेमाल करना सेहत के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है क्योंकि नमी के कारण फफूंदी अक्सर अंदर तक अपनी जड़ें जमा चुकी होती है। यह सोचकर बिल्कुल खरीदारी न करें कि छिलका छीलने के बाद अंदर का हिस्सा अपने आप ठीक निकल आएगा।
रंग के भ्रम से बचें
अखरोट के रंग को लेकर अक्सर खरीदार गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं। आम धारणा के विपरीत, यह जरूरी नहीं कि हर गहरे रंग का पीस खराब ही हो, और न ही बहुत ज्यादा हल्का या चमकदार छिलका बेहतरीन क्वालिटी की पक्की गारंटी देता है। वैराइटी और प्रोसेसिंग के तरीकों में अंतर होने की वजह से अखरोट के रंग-रूप में स्वाभाविक भिन्नता आ सकती है। इसलिए रंग को इकलौता आधार बनाने के बजाय छिलके की कुल हालत, उसका वजन, नमी की अनुपस्थिति और गंध जैसी बातों पर गौर करना ज्यादा बुद्धिमानी भरा कदम है।
भंडारण का सही तरीका
उचित क्वालिटी का अखरोट घर ले आने के बाद उसे सही तरीके से संभालकर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि इन्हें गलती से भी किसी गर्म या सीलन भरी जगह पर रख दिया जाए, तो इनकी फ्रेशनेस बहुत जल्दी खत्म हो सकती है। इन्हें हमेशा किसी सूखी और ठंडी जगह पर ही स्टोर करने की कोशिश करनी चाहिए। अगर इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, तो एयरटाइट डिब्बों का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा विकल्प रहता है। पैकेट खोलने के बाद यदि कभी अजीब सी गंध या नमी महसूस हो, तो इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह परख जरूर लें।



















