जीवन के चालीसवें पड़ाव पर पहुंचते ही शरीर की तरह त्वचा की जरूरतें भी बदलने लगती हैं। अक्सर चेहरे पर खिंचाव, रूखापन या बेजान अहसास होने लगता है और महंगे प्रसाधनों से भी वैसा संतोष नहीं मिलता जिसकी उम्मीद की जाती है। एशियाई और खासकर कोरियाई सौंदर्य परंपराओं में हमेशा से त्वचा को साफ रखने, उसे भरपूर नमी देने और संयमित देखभाल पर सर्वाधिक महत्व दिया गया है। भारत में भी इस तरह की देखभाल पद्धतियों को लेकर काफी रुचि देखी जा रही है। राहत की बात यह है कि इस दर्शन के कई सरल उपाय सीधे रसोई में मौजूद घरेलू चीजों की मदद से दिनचर्या का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।
हालांकि इन घरेलू उपायों को किसी जादुई या रातों-रात बदलाव लाने वाले चमत्कार के तौर पर देखना सही नहीं है। इन्हें केवल अपनी रोजमर्रा की साधारण देखभाल का एक सहायक अंग मानना चाहिए, जहां सही तकनीक और निरंतरता ही मुख्य भूमिका निभाती है।
चावल के पानी का पारंपरिक उपयोग
चावल को पकाने से पहले धोने अथवा भिगोने के बाद बचा हुआ पानी पारंपरिक एशियाई सौंदर्य प्रसाधनों का एक बहुत पुराना हिस्सा रहा है। कई लोग इस पानी को चेहरे की सफाई और ताजगी के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसके उपयोग से त्वचा पर जमी गंदगी दूर होने और चेहरे के अधिक कोमल महसूस होने का अनुभव मिल सकता है। फिर भी, यह समझना आवश्यक है कि इससे चेहरे के दाग-धब्बे पूरी तरह मिट जाएंगे अथवा रंगत में कोई भारी बदलाव आ जाएगा, ऐसा कोई भी दावा करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।
अगर कोई इस उपाय को आजमाना चाहता है, तो चावल को पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर उस पानी को कुछ समय के लिए एक साफ बर्तन में अलग रख लें। चेहरे पर लगाने से पहले यह परखना जरूरी है कि त्वचा इसके प्रति संवेदनशील तो नहीं है। एक साफ रुई के फाहे यानी कॉटन पैड की मदद से इसे चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं और थोड़ी देर बाद सामान्य साफ पानी से चेहरा धो लें। यदि त्वचा पर किसी भी तरह की खुजली, खिंचाव या जलन महसूस हो, तो इसका प्रयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए।
दही और शहद का नमी प्रदायक लेप
रूखी और सुस्त दिखने वाली त्वचा को कुछ समय के लिए कोमल और नम बनाए रखने में सादे दही और प्राकृतिक शहद का मिश्रण काफी प्रभावी सिद्ध हो सकता है। दही के अंदर प्राकृतिक रूप से लैक्टिक एसिड मौजूद होता है, जो मृत कोशिकाओं को धीरे-धीरे हटाने में सहायक हो सकता है। वहीं शहद अपनी प्राकृतिक नमी बनाए रखने की क्षमता के कारण त्वचा के रूखेपन को कम करने का काम करता है। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति की त्वचा की बनावट अलग होती है, इसलिए इसका प्रभाव भी हर चेहरे पर भिन्न हो सकता है।
इसे तैयार करने के लिए एक चम्मच सादा दही लेकर उसमें एक चम्मच शहद को अच्छी तरह मिला लें। इस तैयार लेप की एक पतली परत चेहरे पर लगाएं, लेकिन आंखों के आसपास की बेहद नाजुक जगह को पूरी तरह छोड़ दें। इसे लगभग 10 से 15 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दें और फिर साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। जिन लोगों की त्वचा अधिक तैलीय है या जिन्हें मुंहासे जल्दी निकलते हैं, उन्हें इसे बार-बार लगाने से बचना चाहिए। इसके अलावा, जिन लोगों को किसी भी तरह के डेयरी उत्पादों या शहद से एलर्जी की शिकायत हो, उन्हें इस लेप का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
ग्रीन टी की बर्फ से चेहरे को ताजगी देना
सुबह नींद से जागने के बाद कई बार चेहरा फूला हुआ या थकान से भरा दिखाई देता है। ऐसे समय में त्वचा को हल्की ठंडक देना कुछ समय के लिए ताजगी भरा अहसास दे सकता है। इस तरीके को अपनाने के लिए ग्रीन टी को सामान्य रूप से तैयार करके पहले पूरी तरह ठंडा होने दें, और फिर उसे बर्फ जमाने वाली ट्रे में रखकर फ्रीजर में जमा लें।
बर्फ के टुकड़े को सीधे और देर तक नंगी त्वचा पर घिसने की गलती कभी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अत्यधिक ठंडक त्वचा की महीन रक्तवाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। सही तरीका यह है कि ग्रीन टी आइस क्यूब को किसी पतले और साफ सूती कपड़े में लपेटें और फिर चेहरे पर हल्के हाथों से केवल कुछ सेकंड के लिए ही फेरें। जिन लोगों की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है, जिन पर लालिमा रहती है या जिन्हें जलन की समस्या है, उन्हें बर्फ के इस्तेमाल से पूरी तरह बचना चाहिए। यद्यपि ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट यौगिक मौजूद होते हैं, किंतु बर्फ के इस प्रयोग से तुरंत चेहरे के दाग मिटने या उम्र कम दिखने की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती।
घरेलू उपायों की सीमाएं और बुनियादी त्वचा देखभाल
केवल घरेलू नुस्खों या फेस पैक के सहारे किसी भी उम्र में स्वस्थ त्वचा नहीं पाई जा सकती। बुनियादी स्वच्छता और संतुलित दिनचर्या का स्थान कोई नुस्खा नहीं ले सकता। चेहरे की नियमित सफाई करना, अपनी त्वचा के अनुकूल मॉइस्चराइजर लगाना और दिन के समय धूप से बचाव के लिए सनस्क्रीन का नियमित प्रयोग करना घरेलू लेपों से कहीं अधिक अनिवार्य है। इसके साथ ही पर्याप्त घंटों की गहरी नींद, संतुलित खान-पान और दिनभर में समुचित मात्रा में पानी पीने की आदत त्वचा को अंदर से पोषण देती है।
चालीस वर्ष की आयु में त्वचा की बनावट में स्वाभाविक बदलाव आना एक पूरी तरह सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है। बीस वर्ष की उम्र जैसी त्वचा वापस पाने के अवास्तविक दावों के पीछे भागने के स्थान पर अपनी उम्र के अनुसार त्वचा को स्वस्थ, स्वच्छ और हाइड्रेटेड रखने पर ध्यान केंद्रित करना अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण है।
किसी भी नए नुस्खे को पूरे चेहरे पर आजमाने से पूर्व कान के पीछे या हाथ पर एक छोटा पैच टेस्ट अवश्य करना चाहिए। विशेष रूप से तब, जब त्वचा पहले से संवेदनशील हो, किसी एलर्जी की समस्या हो या त्वचा रोग का कोई इलाज चल रहा हो। यदि किसी भी रूप में जलन, खुजली अथवा लालिमा दिखाई दे तो उस नुस्खे का दोबारा इस्तेमाल न करें। यदि चेहरे पर लगातार मुंहासे, गहरे दाग या कोई अन्य समस्या बनी रहती है, तो किसी योग्य त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलकर उचित सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।



















