रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले प्याज के छिलकों को अक्सर कचरा समझकर कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है। लेकिन बागवानी के शौकीनों के लिए यही सूखे छिलके एक बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन साबित हो सकते हैं। बिना किसी अतिरिक्त लागत के इनसे बेहतरीन तरल उर्वरक तैयार किया जा सकता है, जो गमलों और बगीचे के पौधों के लिए बेहद उपयोगी होता है। थोड़ी सी समझदारी और सही विधि अपनाकर घर पर ही पोषक तत्वों से भरपूर यह खाद आसानी से बनाई जा सकती है।
तरल उर्वरक तैयार करने की सही विधि
घर पर यह तरल पोषण घोल तैयार करने के लिए सबसे पहले करीब दो मुट्ठी सूखे प्याज के छिलके एकत्र करें। इसमें लाल या सफेद किसी भी प्रकार के प्याज के सूखे छिलकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन सूखे छिलकों को एक साफ कांच या प्लास्टिक के जार अथवा कंटेनर में डालें। इसके बाद बर्तन में लगभग एक लीटर सामान्य पानी भर दें। छिलकों और पानी को अच्छी तरह आपस में मिला दें, ताकि छिलके पूरी तरह भीग जाएं। अब इस कंटेनर को ढककर किसी ऐसी सुरक्षित छांव वाली जगह पर रख दें, जहां सीधी और तेज धूप न आती हो।
मौसम के अनुसार भिगोने का समय और छनाई
मौसम के तापमान के आधार पर इस मिश्रण को तैयार होने में अलग समय लगता है। भीषण गर्मी के दिनों में इसे लगभग 48 घंटे तक रखा जा सकता है, जिससे इसके तत्व पानी में घुल जाते हैं। वहीं सर्दियों के ठंडे मौसम में प्रक्रिया धीमी होती है, इसलिए इसे करीब 4 दिन तक रखना उपयुक्त रहता है। भीगने की इस अवधि के दौरान पानी का रंग बदलकर हल्का लाल या गुलाबी हो जाता है और इसमें से हल्की प्याज जैसी महक भी आने लगती है। तय समय पूरा होने पर इस मिश्रण को छलनी से अच्छी तरह छान लें और तरल भाग को अलग रख लें।
जड़ों के लिए घोल को पतला करने का नियम
छानकर निकाले गए इस सांद्र घोल को कभी भी सीधे या अधिक मात्रा में पौधों पर नहीं डालना चाहिए। इस्तेमाल से पहले इसे सादे पानी के साथ पतला करना बहुत जरूरी है। जड़ों में डालने के लिए एक कप तैयार प्याज के लिक्विड में एक कप साफ पानी मिलाकर एक बराबर अनुपात का मिश्रण तैयार करें। इस पतले घोल को पौधे के मुख्य तने पर डालने की बजाय तने से थोड़ी दूरी बनाकर जड़ों के आसपास की नम मिट्टी में डालें। एक साथ बहुत सारा पानी डालने से बचें। गमले के आकार, पौधे की उम्र और मिट्टी की नमी को देखते हुए ही इसे सीमित मात्रा में देना चाहिए।
पत्तियों पर छिड़काव और पैच टेस्ट का तरीका
यदि इस घोल का उपयोग पर्णीय छिड़काव यानी पत्तियों और टहनियों पर स्प्रे के रूप में करना हो, तो इसे और ज्यादा हल्का रखना अनिवार्य है। इसके लिए एक हिस्सा तैयार प्याज का लिक्विड लें और उसमें तीन हिस्सा साफ पानी मिलाएं। इस हल्के मिश्रण को स्प्रे बोतल में भरकर पौधों की पत्तियों पर धीरे-धीरे छिड़कें। किसी भी नए पौधे पर पहली बार इसका उपयोग करते समय हमेशा सावधानी बरतें। पहले पौधे की एक या दो पत्तियों पर हल्का छिड़काव करके देख लें। यदि पत्तियों पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव या जलन दिखाई दे, तो इसका उपयोग तुरंत बंद कर दें।
मल्चिंग में इस्तेमाल और आवश्यक सावधानियां
प्याज के छिलकों का लाभ सिर्फ पानी में घोल बनाने तक ही सीमित नहीं है। सूखे छिलकों को सीधे पौधों की मल्चिंग के तौर पर भी काम में लिया जा सकता है। विशेष रूप से गर्मियों के दिनों में इन सूखे छिलकों को नारियल के रेशों या अन्य सूखे पत्तों और जैविक कचरे के साथ मिलाकर गमले की मिट्टी की ऊपरी सतह पर बिछाया जा सकता है। यह परत नमी बचाए रखती है और धीरे-धीरे अपघटित होकर मिट्टी को जैविक सामग्री प्रदान करती है। ध्यान रखें कि यह घरेलू घोल किसी पौधे की बीमारी की दवा नहीं है और न ही यह हर पौधे की अनिवार्य जरूरत है। इसलिए मौसम और पौधे की जरूरत के मुताबिक ही इसका संतुलित प्रयोग करें।



















