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लेस्वा लोंजी रेसिपी: राजस्थान की यह खट्टी-मीठी सौगात साल में केवल 3 महीने, स्वाद के आगे अचार-चटनी भी फीकेजीवनशैली
12 जून 2026, 5:35 am (93 दिन पहले)· 2

लेस्वा लोंजी रेसिपी: राजस्थान की यह खट्टी-मीठी सौगात साल में केवल 3 महीने, स्वाद के आगे अचार-चटनी भी फीके

राजस्थान की पारंपरिक लेस्वा लोंजी (गुंदे की चटनी) गर्मियों में केवल तीन महीने ही मिलती है। जानिए खट्टे-मीठे स्वाद वाली इस देसी डिश को घर पर बनाने की आसान रेसिपी।

राजस्थान का पारंपरिक खानपान अपने निराले स्वाद और देसी पकवानों की वजह से पूरे देश में नाम कमा चुका है। इसी विरासत का एक बेहद खास हिस्सा है लेस्वा लोंजी, जिसे गुंदे की चटनी के नाम से भी पहचाना जाता है। यह अपने खट्टे-मीठे जायके और औषधीय गुणों के लिए मशहूर है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह पूरे साल नहीं, बल्कि सिर्फ गर्मी के मौसम में महज तीन महीने के लिए ही उपलब्ध होती है। इन दिनों राजस्थान के गांवों से लेकर शहरों तक इसे बड़े उत्साह से बनाया और चाव से खाया जाता है। बाजरे की रोटी, गरमागरम पराठों या फिर पारंपरिक दाल-बाटी के साथ इसका मेल खाने का मजा कई गुना बढ़ा देता है।

गृहणी मदनी देवी का कहना है कि राजस्थान के कई हिस्सों में लेस्वा लोंजी को एक पारंपरिक मुख्य आहार की तरह खाया जाता है। गर्मियों में पड़ने वाले त्योहारों, परिवार के आयोजनों और खास मौकों पर मेहमानों की थाली में भी इसे बड़े प्रेम से परोसा जाता है। ऐसे में अगर आप अपने रोजाना के सादे भोजन में कुछ नया, चटपटा और पूरी तरह देसी जायका जोड़ना चाहते हैं, तो इस सीजन में राजस्थानी लेस्वा लोंजी को एक बार जरूर आजमाएं। इसकी सरल रेसिपी और बेमिसाल स्वाद इसे हर रसोई की सबसे खास डिश बना देते हैं।

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लेस्वा लोंजी की सामग्री और तड़का

घर पर लजीज लेस्वा लोंजी तैयार करने के लिए सबसे पहले ताजे, हरे और नरम लेस्वा को पानी से अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। इसके बाद इनकी डंठल अलग करके छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। अब एक कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें। तेल जब अच्छी तरह गरम हो जाए, तो उसमें राई, जीरा, सौंफ, मेथी दाना और एक चुटकी हींग डालकर बढ़िया तड़का लगाएं। जैसे ही इन साबुत मसालों की महक उठने लगे, गैस की आंच धीमी कर दें और हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर तथा धनिया पाउडर डालकर मसालों को हल्का-सा भून लें।

खट्टे-मीठे स्वाद के लिए चाशनी ऐसे करें तैयार

मसाले भुन जाने के बाद कटे हुए लेस्वा को कड़ाही में डाल दें और मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाते हुए कुछ मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें। फिर इसमें स्वादानुसार नमक मिलाएं। लोंजी को उसका असली खट्टा-मीठा जायका देने के लिए इसमें बारीक कुटा हुआ गुड़ या चीनी डालें। साथ ही खटास लाने के लिए थोड़ा अमचूर पाउडर भी मिलाएं, जिससे इसका स्वाद और भी निखर उठता है। अब जरूरत के मुताबिक थोड़ा पानी डालकर कड़ाही को ढक दें और धीमी आंच पर इसे करीब 10 से 15 मिनट तक अच्छे से उबलने दें।

स्वाद और बेहतरीन पोषण का अनूठा खजाना

जब लेस्वा पूरी तरह नरम हो जाए, गुड़ अच्छी तरह पिघल जाए और मसाले उसमें भलीभांति घुलमिल जाएं, तब गैस बंद कर दें। तैयार लोंजी को कड़ाही से निकालकर थोड़ी देर ठंडा होने दें। इसका गाढ़ा, रसीला और चटपटा स्वाद हर उम्र के लोगों को खूब भाता है। इसे कांच के बर्तन में रखकर कुछ दिनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है। खास बात यह है कि यह मारवाड़ी व्यंजन स्वाद के साथ-साथ गर्मियों में शरीर को ठंडक और बढ़िया पोषण भी देता है।

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