रामपुर में सब्जी खरीदने का काम भले ही रोजाना का हो, लेकिन कई बार घर लौटने पर पता चलता है कि आलू खाने में स्वाद के लिहाज से बिल्कुल सही नहीं बैठ रहा है। कभी सब्जी का जायका कुछ अलग हो जाता है तो कभी चिप्स या फ्राई बनाते समय मनचाहा परिणाम नहीं मिलता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि बाजार की भीड़भाड़ में सही, मीठे और बढ़िया आलू की परख कैसे की जाए। इस बारे में स्थानीय आलू विक्रेता सतेंद्र ने कुछ बेहद सरल और व्यावहारिक तरीके साझा किए हैं, जिनकी मदद से ग्राहक दुकान पर खड़े-हड़े ही आलू की क्वालिटी को भांप सकते हैं।
कुकराज और चिप्सोना किस्म की पहचान
विक्रेता सतेंद्र का कहना है कि आलू की अलग-अलग वैरायटी और उनका बाहरी रूप-रंग काफी कुछ बयां कर देता है। उनके अनुसार कुकराज किस्म का आलू अक्सर खाने में मीठा होता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि यह बाहर से काफी चिकना नजर आता है। हालांकि, सिर्फ किसी आलू की चमक या चिकनाहट देखकर ही उसे बेहतरीन मान लेना समझदारी नहीं है। आलू खरीदते वक्त उसकी किस्म और डिश के हिसाब से जरूरत का ध्यान रखना बेहद आवश्यक हो जाता है।
खुरदरी सतह वाले चिप्सोना आलू की खासियत
सतेंद्र के मुताबिक चिप्सोना किस्म का आलू स्वाद में फीका होता है और इसकी बाहरी त्वचा काफी खुरदरी होती है। यही खुरदुरापन इसे अन्य किस्मों से अलग करने में सबसे बड़ी मदद करता है। यदि ग्राहक खरीदारी के समय आलू की ऊपरी परत पर गौर करें, तो वे आसानी से समझ सकते हैं कि उनके हाथ कौन सी किस्म लग रही है।
चमक के धोखे में न आएं
दुकानदार का यह भी सुझाव है कि सिर्फ रंगत देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। सामान्य तौर पर खुरदरी त्वचा वाला आलू फीका निकलता है, जबकि अत्यधिक चिकनाहट वाले कुछ आलू मीठा स्वाद दे सकते हैं। इसलिए केवल चमक या रंग देखकर टोकरी भरने के बजाय आलू को हाथ में उठाकर उसकी कड़ाई और सॉलिडिटी को जरूर जांचना चाहिए।
हरे छिलके और अंकुरित आलू से सावधान
खरीददारी करते वक्त अगर आलू के छिलके पर हल्का सा हरापन दिखाई दे, तो उस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा यदि आलू पर स्प्राउट्स यानी अंकुर निकल आए हैं या वह उंगली से दबाने पर बहुत ज्यादा स्पंजी या नरम महसूस हो रहा है, तो समझ लीजिए कि वह पुराना हो चुका है। ऐसे उत्पादों को घर लाने से पहले पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।
चिप्स और फ्राई के लिए खास सावधानी
आलू की सही परख करने में सबसे जरूरी बात यह है कि ग्राहक जल्दबाजी में केवल साइज या रेट देखकर खरीदारी न करें। थोड़ा सा वक्त निकालकर उसकी सतह, कसावट और आंखों की स्थिति देख लेने से काफी अंतर आ जाता है। खासकर जब आलू का उपयोग चिप्स, फ्रेंच फ्राई या ऐसी ही अन्य रेसिपीज के लिए होना हो, जहां टेक्सचर और टेस्ट का खास महत्व होता है।
किस्म पहचानने की आदत से बनेगी बात
सतेंद्र का मानना है कि यदि खरीदारों को किस्म पहचानने की थोड़ी सी भी समझ आ जाए, तो वे बाजार में कभी धोखा नहीं खाएंगे और सही चुनाव कर सकेंगे। अगली बार जब भी आप सब्जी मंडी जाएं, तो केवल बाहरी चमक पर भरोसा करने के बजाय उसकी पूरी बनावट का बारीकी से निरीक्षण जरूर करें।



















