नया मकान तैयार करवाते समय दरवाजों और खिड़कियों का सटीक चुनाव घर की बनावट, सुरक्षा तथा सुंदरता तीनों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। खिड़कियां केवल दीवारों में बना ढांचा मात्र नहीं होतीं, बल्कि वे घर के भीतर प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा के सुचारू प्रवाह की मुख्य धुरी मानी जाती हैं। बदलते वक्त के साथ आज बाजार में खिड़कियों के निर्माण के लिए तरह-तरह की आधुनिक तकनीकें मौजूद हैं, जिनमें एल्युमिनियम और पारंपरिक काष्ठ यानी लकड़ी सबसे प्रमुख विकल्पों के रूप में देखे जाते हैं। मुरादाबाद में इस काम से जुड़े मोहम्मद जीशान के अनुसार, आज भी कई लोग अपने घरों में पारंपरिक नक्काशी और प्राकृतिक फिनिश के चलते लकड़ी की खिड़कियों को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं।
लकड़ी के फ्रेम की ओर क्यों बढ़ रहा है लोगों का रुझान
मोहम्मद जीशान बताते हैं कि मौजूदा दौर में लकड़ी की चौखटों और खिड़कियों की मांग में उल्लेखनीय तेजी देखी जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि प्राकृतिक लकड़ी में कारीगरों को बारीकी से तराशने और मनपसंद फिनिशिंग देने की भरपूर आजादी मिलती है। मकान मालिक अपनी पसंद और घर के इंटीरियर के अनुसार इन पर सजावटी नक्काशी, विशेष प्रकार के खांचे और पॉलिश करवा सकते हैं, जिससे पूरे कमरे का स्वरूप निखर जाता है। इसके अतिरिक्त, बाजार में काष्ठ शिल्प के कई नए डिजाइन और मॉडल भी उपलब्ध हैं, जिससे पारंपरिक सामग्री होने के बावजूद यह आधुनिक घरों की सजावट में पूरी तरह फिट बैठती है।
एल्युमिनियम खिड़कियों के व्यावहारिक पहलू और संभावित दिक्कतें
दूसरी तरफ, आधुनिक अपार्टमेंट्स और मकानों में तेजी से अपनाई जा रही एल्युमिनियम खिड़कियों के अपने गुण और कुछ कमजोरियां भी हैं। मोहम्मद जीशान के मुताबिक, साधारण लोहे की तुलना में एल्युमिनियम में जंग लगने का खतरा न के बराबर होता है, जो इसकी एक बड़ी खूबी है। इसके बावजूद, लंबे समय के इस्तेमाल में कुछ तकनीकी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं। यदि बरसात के मौसम में खिड़की की फिटिंग सही न हो, तो जोड़ों से पानी के रिसने या भीतरी हिस्सों में खराबी आने की गुंजाइश बनी रहती है। समय बीतने के साथ स्क्रू ढीले पड़ने और कब्जे खराब होने जैसी दिक्कतें भी सामने आती हैं, जिससे बार-बार मरम्मत कराने की नौबत आ सकती है। एल्युमिनियम का टिकाऊपन काफी हद तक धातु की मोटाई और कारीगर की फिटिंग पर निर्भर करता है।
देसी साल और शीशम की गुणवत्ता और लागत का आकलन
काष्ठ खिड़कियां बनवाने के इच्छुक लोगों के लिए मोहम्मद जीशान देसी साल और शीशम की लकड़ी के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। बेहतरीन किस्म की लकड़ी से तैयार खिड़कियां न केवल वर्षों तक मजबूत बनी रहती हैं, बल्कि उन पर की गई पॉलिश और फिनिशिंग भी बेहद आकर्षक नजर आती है। उचित देखभाल और समय-समय पर पॉलिश करने से लकड़ी का जीवन काफी लंबा हो जाता है।
लागत के संदर्भ में मोहम्मद जीशान ने स्पष्ट किया कि देसी साल की लकड़ी से बनी खिड़की की बुनियादी कीमत लगभग 2,000 रुपये से लेकर 2,500 रुपये तक हो सकती है। हालांकि यह कोई तयशुदा आंकड़ा नहीं है। खिड़की का कुल खर्च उसके वास्तविक आकार, इस्तेमाल की जा रही लकड़ी के ग्रेड, उसमें कराई जाने वाली नक्काशी या डिजाइन और कारीगर की मजदूरी पर आधारित होता है। इसलिए निर्माण कार्य शुरू करने से पूर्व कारीगर से विस्तृत अनुमान लेना हमेशा फायदेमंद साबित होता है।



















