अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में जापानी येन और अमेरिकी डॉलर के बीच का मुकाबला एक सीमित दायरे में बना हुआ है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान शुरुआती सुस्ती से उबरते हुए डॉलर 158.00 के अहम आंकड़े के इर्द-गिर्द मजबूती दिखाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, टोक्यो द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंकाओं और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई हालिया गिरावट के चलते डॉलर की रफ्तार पर लगातार अंकुश लगा हुआ है। दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों की नीतियों के बीच जारी खींचतान ने निवेशकों को किसी भी दिशा में बड़ा दांव लगाने से फिलहाल रोक रखा है।
बाजार में इस समय सबसे बड़ा ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की होने वाली नीतिगत बैठकों पर टिका है। फेडरल रिजर्व की बैठक 28 अक्टूबर को निर्धारित है, जबकि इसके ठीक बाद 29 और 30 अक्टूबर को बैंक ऑफ जापान अपनी मौद्रिक समीक्षा पेश करेगा। जब तक इन दोनों शीर्ष संस्थानों का रुख पूरी तरह साफ नहीं होता, तब तक मुद्रा विनिमय दरों में किसी बड़े एकतरफा रुझान की उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है।
केंद्रीय बैंकों के रुख और ब्याज दर अंतर का प्रभाव
जापानी येन पर सबसे अधिक दबाव दोनों देशों के बीच ब्याज दरों के भारी अंतर के कारण बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान लंबे समय तक अपनी अत्यधिक नरम मौद्रिक नीति पर कायम रहा, जबकि अमेरिका में फेडरल रिजर्व ने महंगाई पर लगाम कसने के लिए दरों में तेजी से इजाफा किया था। इस नीतिगत फासले के चलते वैश्विक निवेशकों ने अमेरिकी संपत्तियों को प्राथमिकता दी, जिससे डॉलर को येन की तुलना में व्यापक मजबूती मिली।
हाल के दिनों में बैंक ऑफ जापान के अधिकारियों की तरफ से यह संकेत मिले हैं कि वे बिना किसी तात्कालिक महंगाई दबाव के लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की जल्दी में नहीं हैं। जब तक मुद्रास्फीति के आकस्मिक रूप से बढ़ने के ठोस संकेत नहीं मिलते, तब तक टोक्यो की नीति काफी सतर्क और क्रमिक बनी रहेगी। हालांकि, बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा की कुछ आक्रामक टिप्पणियों ने येन को पूरी तरह धराशायी होने से भी बचाया है। इस सतर्कता के चलते जहां येन में तेजी सीमित है, वहीं मंदी के ट्रेडर्स भी सतर्क रुख अपना रहे हैं।
हस्तक्षेप का जोखिम और डॉलर की गतिशीलता
मुद्रा बाजार के सहभागियों के लिए सबसे बड़ा अवरोध जापानी वित्त मंत्रालय और बैंक ऑफ जापान द्वारा प्रत्यक्ष बाजार हस्तक्षेप का खतरा है। जब भी विनिमय दर 158 या 160 के स्तर के पार जाने लगती है, टोक्यो की तरफ से येन को सहारा देने के लिए डॉलर की सीधी बिक्री की आशंका बढ़ जाती है। बैंक ऑफ जापान के मुख्य अधिदेशों में मुद्रा नियंत्रण शामिल है, हालांकि अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ राजनीतिक तनाव से बचने के लिए जापान अक्सर इस कदम का इस्तेमाल करने से बचता है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर शुक्रवार को दर्ज किए गए अपने दो सप्ताह के निचले स्तर से थोड़ा संभलने में कामयाब रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग को थोड़ा समर्थन दिया है। इसके बावजूद, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में हालिया नरमी ने डॉलर इंडेक्स की बढ़त को सीमित दायरे में बांध रखा है। बाजार का मिजाज ऐसा है कि एक ओर भू-राजनीति और फेडरल रिजर्व की संभावित दर नीतियों का असर डॉलर को संभाल रहा है, तो दूसरी ओर टोक्यो के हस्तक्षेप की तलवार येन की कमजोरी पर ब्रेक लगा रही है।
तकनीकी स्तर और चार्ट विश्लेषण
चार घंटे के समयावधि चार्ट पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन की जोड़ी 100 अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज के आसपास मंडरा रही है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि बाजार में इस समय किसी एक पक्ष का पूर्ण नियंत्रण नहीं है और कारोबार पूरी तरह रेंज बाउंड है।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, इस ट्रेडिंग रेंज का ऊपरी दायरा 158.75 के आसपास स्थित है। यदि डॉलर इस प्रतिरोध स्तर को पार करने में सफल होता है, तो इसमें नई खरीदारी की लहर आ सकती है और यह आगे की बढ़त का रास्ता साफ करेगा। इसके विपरीत, नीचे की तरफ निकटतम तात्कालिक सहारा 157.60 के स्तर पर मौजूद है। अगर यह जोड़ी 157.60 के समर्थन क्षेत्र को निर्णायक रूप से तोड़ती है, तो मौजूदा तेजी का रुख कमजोर पड़ सकता है और चार घंटे के फ्रेम पर गहरा सुधार देखने को मिल सकता है।
लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, इस विनिमय दर का 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 52 के स्तर पर दर्ज किया गया है, जो पूरी तरह तटस्थ स्थिति को दर्शाता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस संकेत दे रहा है कि बाजार में हल्का सकारात्मक रुझान बना हुआ है, जहां इसका मुख्य स्तर 0.21 पर है और सिग्नल लाइन 0.16 पर बनी हुई है। इसका 20 दिवसीय बोलिंजर बैंड 157.14 से 158.74 के बीच फैला हुआ है, जबकि इसका मध्य बिंदु 157.94 पर स्थित है। वर्तमान कीमत इस बैंड के भीतर कारोबार कर रही है, जो इस बात की पुष्टि करती है कि निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव सीमित दायरे में ही रहने वाला है।
वैश्विक परिसंपत्तियों और अन्य मुद्राओं का हाल
मुद्रा बाजार के इस ठहराव का असर अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों पर भी देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन मजबूती दर्ज की और सोमवार को 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश की। ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सहायक गवर्नर क्रिस केंट की सख्त टिप्पणियों और चीन के तीसरी तिमाही के मजबूत सकल घरेलू उत्पाद आंकड़ों ने इस बढ़त को बल दिया।
वहीं दूसरी ओर, कीमती धातुओं में सोने ने नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की है। सोने के निवेशक 4,200 डॉलर प्रति औंस के पार एक टिकाऊ उछाल का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने गैर-उपज वाली इस धातु को समर्थन दिया है, हालांकि डॉलर की मजबूती और मध्य पूर्व के तनाव ने सोने की अत्यधिक तेज दौड़ पर भी कुछ हद तक लगाम लगाई है।
सुरक्षित निवेश के रूप में येन का ऐतिहासिक महत्व
जापानी येन दुनिया की सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्राओं में शुमार है। इसका मूल्य मुख्य रूप से जापानी अर्थव्यवस्था के बुनियादी आंकड़ों, बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीतियों, अमेरिकी और जापानी बॉन्ड प्रतिफल के अंतर और वैश्विक जोखिम धारणा से तय होता है। ऐतिहासिक रूप से, वैश्विक वित्तीय बाजारों में जब भी अनिश्चितता या संकट गहराता है, तब निवेशक सुरक्षा की तलाश में जापानी येन की ओर रुख करते हैं।
वर्ष 2013 से 2024 के बीच बैंक ऑफ जापान द्वारा लागू की गई अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति ने येन को अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में लगातार कमजोर किया था। हालांकि, वर्ष 2024 में इस नीति को धीरे-धीरे समाप्त करने के निर्णय और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत ने इस खाई को पाटना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंकों की घोषणाएं ही यह तय करेंगी कि येन अपने इस संकीर्ण दायरे से बाहर निकल पाता है या नहीं।




















