एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान न्यूज़ीलैंड डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत की है, जहां यह जोड़ी 0.5650 के अहम स्तर से ऊपर निकलकर 0.5659 के आसपास कारोबार कर रही है। पिछले बंद स्तर 0.5621 की तुलना में इसमें 0.66 प्रतिशत की दैनिक बढ़त दर्ज की गई है। इस उछाल की मुख्य वजह चीन से आए तीसरी तिमाही के आर्थिक आंकड़े रहे, जिन्होंने वैश्विक विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से यह साफ हुआ है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर गति से आगे बढ़ रही है। इस सकारात्मक बदलाव ने उन सभी परिसंपत्तियों और मुद्राओं को नया सहारा दिया है जो चीनी मांग चक्र से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं।
चीन के मजबूत आंकड़ों से मिला वैश्विक समर्थन
चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा सोमवार को सार्वजनिक किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा। इससे पिछली अवधि में यह विकास दर 4.3 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जबकि बाजार की आम सहमति 4.4 प्रतिशत वृद्धि रहने की थी। तिमाही आधार पर भी अर्थव्यवस्था ने गति पकड़ी है, जहां दूसरी तिमाही में दर्ज 0.9 प्रतिशत की तुलना में तीसरी तिमाही में 1.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जो कि 1.1 प्रतिशत के बाजार अनुमान से बेहतर है।
अर्थव्यवस्था के अन्य सहायक आंकड़ों ने भी वित्तीय बाजारों को सुखद आश्चर्यचकित किया है। सितंबर महीने में चीन की खुदरा बिक्री में सालाना आधार पर 1.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो अगस्त के 0.4 प्रतिशत और बाजार के 0.5 प्रतिशत के अनुमान से काफी अधिक है। इसके साथ ही औद्योगिक उत्पादन में 5.5 प्रतिशत की मजबूत वार्षिक वृद्धि देखी गई, जिसने 5.4 प्रतिशत के पूर्वानुमान और अगस्त के 5.2 प्रतिशत के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया। ये उत्साहजनक आंकड़े दर्शाते हैं कि चीनी घरेलू बाजार में बुनियादी मांग धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है, जिसका सीधा असर व्यापारिक साझेदार देशों पर पड़ना स्वाभाविक है।
न्यूज़ीलैंड और चीन के व्यापारिक रिश्तों की भूमिका
न्यूज़ीलैंड डॉलर, जिसे विदेशी मुद्रा बाजारों में आमतौर पर कीवी के नाम से भी जाना जाता है, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसका सीधा संबंध चीन के आर्थिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है क्योंकि चीन न्यूज़ीलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। जब भी बीजिंग से सकारात्मक आर्थिक आंकड़े आते हैं, तो कीवी मुद्रा को अतिरिक्त मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, चीनी मांग में किसी भी प्रकार की सुस्ती सीधे न्यूज़ीलैंड के निर्यात को प्रभावित करती है, जिसका खमियाजा वहां की घरेलू मुद्रा को भुगतना पड़ता है।
न्यूज़ीलैंड की अर्थव्यवस्था में डेयरी क्षेत्र का योगदान सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि डेयरी उत्पाद देश का प्रमुख निर्यात उत्पाद हैं। जब वैश्विक बाजारों में डेयरी की कीमतें बढ़ती हैं या चीनी उपभोक्ता बाजारों से दूध, मक्खन और पनीर की मांग मजबूत रहती है, तो न्यूज़ीलैंड की निर्यात आय में भारी उछाल आता है। यह अतिरिक्त पूंजी प्रवाह देश की घरेलू अर्थव्यवस्था को गति देता है और कीवी डॉलर को नई ऊंचाई प्रदान करता है। यही कारण है कि मुद्रा व्यापारी चीनी विनिर्माण और खुदरा आंकड़ों को न्यूज़ीलैंड की आर्थिक सेहत के अग्रिम संकेतक के तौर पर देखते हैं।
फेडरल रिजर्व का सतर्क रुख और ब्याज दरों का समीकरण
दूसरी तरफ, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श के हालिया बयानों ने भी मुद्रा बाजार में डॉलर की एकतरफा तेजी पर लगाम लगाने का काम किया है। वॉर्श ने अपने संबोधन में संतुलित लेकिन काफी सतर्क रुख अपनाया। उनके भाषण का विश्लेषण करने वाले सूचकांक में उन्हें 5.6 अंक मिले, जो सामान्य 6.1 अंक के आधार स्तर से थोड़ा नरम माना जा रहा है। उन्होंने साफ तौर पर स्वीकार किया कि वैश्विक वित्तीय संकट के गहरे अनुभवों ने उन्हें जोखिम के प्रति अतिरिक्त सतर्क बना दिया है। हालांकि उन्होंने संरचनात्मक विकास और निवेश में तेजी को महत्वपूर्ण प्रेरक माना, लेकिन मौद्रिक नीति में किसी भी जल्दबाजी से परहेज किया।
वॉर्श ने आने वाली अक्टूबर और दिसंबर की नीतिगत बैठकों के संबंध में पहले से कोई तय फैसला सुनाने से इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फेडरल रिजर्व का निर्णय केवल आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। मूल्य स्थिरता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय प्रभावों पर नजर रखने की उनकी प्रतिबद्धता ने डॉलर के निकट भविष्य के ब्याज दर परिदृश्य को खुला छोड़ दिया है। इस अनिश्चितता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हालिया गिरावट के चलते अमेरिकी मुद्रा पर दबाव बना, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में कीवी जैसी प्रतिस्पर्धी मुद्राओं को उबरने का मौका मिल गया।
तकनीकी चार्ट और प्रमुख मूल्य स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो हालिया सुधार के बावजूद एनजेडडी/यूएसडी में दीर्घकालिक रुझान अभी भी मंदी के दबाव में दिखाई देता है। हाजिर भाव 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज और 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 0.5800 से काफी नीचे बना हुआ है। इसके अलावा 50-दिवसीय ईएमए 0.5725 और 200-दिवसीय ईएमए के बीच बना डेथ क्रॉस व्यापक बिकवाली के दबाव की ओर इशारा करता है। हालांकि, मौजूदा कीमत 20-दिवसीय बॉलिंगर मिडिल बैंड 0.5636 और 20-दिवसीय ईएमए 0.5652 से थोड़ा ऊपर टिकी हुई है, जो निचले स्तरों पर स्थिरता का संकेत देती है।
चौदह दिनों का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई वर्तमान में 47 के स्तर पर है, जो न्यूट्रल 50 रेखा के ठीक नीचे मँडरा रहा है। यह दर्शाता है कि बाजार में बिकवाली का दबाव तो कम हुआ है लेकिन खरीदार अभी पूरी तरह हावी नहीं हुए हैं। तेजी की स्थिति में पहला तात्कालिक प्रतिरोध 0.5664 और 0.5669 पर है, जिसके बाद ऊपरी बॉलिंगर बैंड 0.5708 और 0.5749 के स्तर पर अवरोध पैदा कर सकते हैं। इसके पार जाने पर 100-दिवसीय एसएमए 0.5780 पर मजबूत प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। गिरावट की स्थिति में तात्कालिक सहारा 0.5652 और 0.5646 पर स्थित है, जबकि निचला बॉलिंगर बैंड 0.5563 और 52-सप्ताह का निचला स्तर 0.5567 प्रमुख सुरक्षा कवच बने हुए हैं।
रिज़र्व बैंक ऑफ न्यूज़ीलैंड की मौद्रिक नीति का प्रभाव
न्यूज़ीलैंड का केंद्रीय बैंक, रिज़र्व बैंक ऑफ न्यूज़ीलैंड मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति को 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने के लक्ष्य पर काम करता है, जिसमें विशेष ध्यान 2 प्रतिशत के मध्य-बिंदु पर केंद्रित रहता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक समय-समय पर आधिकारिक नकद दरों में बदलाव करता है। जब देश में महंगाई जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करता है ताकि अर्थव्यवस्था को नियंत्रित किया जा सके। उच्च ब्याज दरें बॉन्ड प्रतिफल को बढ़ाती हैं, जिससे विदेशी निवेशक आकर्षित होते हैं और न्यूज़ीलैंड डॉलर को मजबूती मिलती है।
इसके विपरीत, जब आर्थिक गति सुस्त होती है और ब्याज दरों में कटौती की जाती है, तो कीवी डॉलर में कमजोरी दर्ज की जाती है। वैश्विक बाजारों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व और न्यूज़ीलैंड के केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों के बीच का अंतर भी इस मुद्रा जोड़ी की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। यदि न्यूज़ीलैंड में आर्थिक विकास दर ऊंची रहती है, बेरोजगारी कम होती है और उपभोक्ता विश्वास मजबूत रहता है, तो यह कीवी डॉलर के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है।
अन्य एशियाई मुद्राओं और कमोडिटी बाजार पर असर
चीनी आर्थिक आंकड़ों के इस सकारात्मक असर ने केवल न्यूज़ीलैंड डॉलर को ही नहीं, बल्कि पूरे एशियाई मुद्रा बाजार को प्रभावित किया है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में भी लगातार दूसरे दिन खरीदारी का सिलसिला देखा गया, जहां एयूडी/यूएसडी सुधरकर 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ बढ़ गया। ऑस्ट्रेलिया के रिज़र्व बैंक के सहायक गवर्नर क्रिस केंट के सख्त मौद्रिक रुख और चीन के मजबूत आंकड़ों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को जोरदार बढ़ावा दिया।
इसके विपरीत, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के करीब दबाव में नजर आया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा के सख्त बयानों ने येन को समर्थन दिया है, हालांकि मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिम अभी भी मंडरा रहे हैं। वहीं कमोडिटी बाजार में सोने ने सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की है, जहां भाव 4,200 डॉलर प्रति औंस से ऊपर टिकने का प्रयास कर रहे हैं। समग्र रूप से देखा जाए तो चीन की तेज गति ने वैश्विक जोखिम धारणा में जान फूंक दी है, जिससे जोखिम वाली मुद्राओं को तात्कालिक राहत मिली है।


















