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मां बनने की राह पर अनुष्का रंजन का भावुक खुलासा, आईवीएफ के दौरान झेले 150 से अधिक इंजेक्शनजीवनशैली
26 जून 2026, 9:55 am (46 दिन पहले)· 19

मां बनने की राह पर अनुष्का रंजन का भावुक खुलासा, आईवीएफ के दौरान झेले 150 से अधिक इंजेक्शन

बॉलीवुड और ओटीटी कलाकार अनुष्का रंजन ने मां बनने के अपने सफर में आईवीएफ प्रक्रिया की कठिनाइयों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे 150 से अधिक इंजेक्शन और मानसिक संघर्ष ने उन्हें इस कठिन राह से गुजरने के लिए मजबूर किया।

“मुझे 150 से ज्यादा इंजेक्शन लगवाने पड़े और एक समय ऐसा आया जब मैं मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह बिखर गई थी। मुझे लगने लगा था कि कमी शायद मुझमें ही है।” यह दर्दभरा अनुभव और सच्चाई किसी सामान्य महिला का नहीं, बल्कि मशहूर बॉलीवुड और ओटीटी अभिनेत्री अनुष्का रंजन का है। मई 2026 में अपनी पहली प्रेग्नेंसी की खुशियों को साझा करने वाली अनुष्का ने अब उस अनकही संघर्ष की कहानी बयां की है, जिसका सामना आज के दौर में अनगिनत महिलाएं अकेले कर रही हैं। वेब सीरीज ‘फितरत’ से चर्चा में आईं 35 वर्षीय अनुष्का ने आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन की उस थका देने वाली प्रक्रिया का जिक्र किया है, जो काफी कष्टकारी रही।

मानसिक और शारीरिक टूट का सफर

शादी के बाद परिवार शुरू करना हर महिला का सपना होता है, लेकिन जब इस रास्ते में बाधाएं आती हैं, तो यह सिर्फ एक शारीरिक चुनौती नहीं रह जाती। अनुष्का रंजन ने 2021 में आदित्य सील के साथ विवाह बंधन में बंधी थीं। शादी के पांच साल बाद जब उन्होंने प्रेग्नेंसी की खुशखबरी दी, तो हर तरफ खुशी का माहौल था, लेकिन इसके पीछे की भावनात्मक और मानसिक लड़ाई की परतें अब सामने आई हैं। अनुष्का ने बताया कि गर्भधारण के प्रयास के दौरान एक महिला को कितने मोर्चों पर लड़ना पड़ता है। लगातार क्लिनिक के चक्कर लगाना, हर दिन बदलते हॉर्मोन्स और हर महीने उम्मीदों का टूट जाना, व्यक्ति को अंदर से पूरी तरह खोखला कर देता है। सबसे मार्मिक बात जो अनुष्का ने साझा की, वह ‘सेल्फ-ब्लेम’ यानी खुद को दोषी मानने की प्रवृत्ति है। जब लगातार कोशिशों के बाद भी परिणाम नहीं मिलता, तो मन में हीन भावना घर कर जाती है और महिला को लगने लगता है कि कोई दोष उसी में है। यह एक ऐसी सच्चाई है जिसे देश भर की लाखों महिलाएं महसूस करती हैं, क्योंकि समाज में अक्सर इनफर्टिलिटी का सारा भार महिला पर ही डाल दिया जाता है।

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आईवीएफ का चरणबद्ध विवरण

आईवीएफ प्रक्रिया का मूल उद्देश्य महिला के शरीर से अंडे बाहर निकालना, उन्हें लैब में स्पर्म के साथ फर्टिलाइज करना और फिर भ्रूण को वापस गर्भाशय में प्रत्यारोपित करना होता है। यह पूरी प्रक्रिया पांच मुख्य चरणों में विभाजित है:

1. ओवेरियन स्टिमुलेशन: इसमें 10 से 12 दिनों तक रोजाना हॉर्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि अंडों की संख्या बढ़े। इस दौरान अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट से अंडों के विकास की निगरानी की जाती है।

2. ट्रिगर शॉट: अंडों का आकार सही होने पर 36 घंटे पहले एक महत्वपूर्ण इंजेक्शन लगाया जाता है, जिसे ट्रिगर शॉट कहते हैं। डॉक्टर इसके बाद ठीक 36 घंटे के भीतर अंडे निकालने की प्रक्रिया तय करते हैं।

3. एग रिट्रीवल: यह 20 से 30 मिनट की एक माइनर सर्जिकल प्रक्रिया है। महिला को हल्का एनेस्थीसिया देकर बेहोश किया जाता है ताकि दर्द का अनुभव न हो। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड गाइडेड सुई की मदद से ओवरी से अंडे बाहर निकालते हैं और उसी समय स्पर्म का सैंपल लिया जाता है।

4. फर्टिलाइजेशन: लैब में अंडे और स्पर्म को एक पेट्री डिश में रखा जाता है। यदि स्पर्म कमजोर हों, तो ICSI तकनीक द्वारा एक-एक स्पर्म को सीधे अंडे में इंजेक्ट किया जाता है। अगले 3 से 5 दिनों में ये अंडे विकसित होकर भ्रूण बन जाते हैं।

5. एम्ब्रियो ट्रांसफर: सबसे बेहतर भ्रूण को एक लचीली कैथेटर ट्यूब के माध्यम से गर्भाशय में रखा जाता है। यह प्रक्रिया दर्द रहित होती है। इसके 12 से 14 दिन बाद बीटा HCG ब्लड टेस्ट के जरिए प्रेग्नेंसी की पुष्टि की जाती है।

इंजेक्शन की अधिकता क्यों?

इस प्रक्रिया में कई प्रकार के इंजेक्शन लगते हैं। डाउन-रेगुलेशन के लिए रोजाना एक इंजेक्शन दिया जाता है ताकि अंडे समय से पहले न निकलें। स्टिमुलेशन के लिए 10 से 12 दिनों तक एक या दो इंजेक्शन रोज दिए जाते हैं। अंत में, लूटियल सपोर्ट के लिए एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद प्रोजेस्टेरोन इंजेक्शन दिए जाते हैं, जो तेल आधारित और गाढ़े होते हैं। ये प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीनों तक लग सकते हैं, जो शारीरिक रूप से काफी थकान पैदा करते हैं। हालांकि, हर महिला का शरीर अलग होता है और आज आधुनिक तकनीक के जरिए ओरल दवाओं का उपयोग करके भी उपचार किया जा रहा है, जिससे इंजेक्शन की संख्या कम की जा सकती है।

सवाल-जवाब

अनुष्का रंजन की आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान उन्हें कितने इंजेक्शन लगे?
अनुष्का रंजन ने बताया कि उन्हें इस प्रक्रिया के दौरान 150 से ज्यादा इंजेक्शन लगवाने पड़े थे।
आईवीएफ के दौरान मानसिक और शारीरिक रूप से क्या चुनौतियां आती हैं?
इसमें लगातार क्लिनिक जाना, हॉर्मोनल बदलाव, इंजेक्शन का दर्द और हर महीने उम्मीद टूटने का मानसिक दबाव झेलना पड़ता है।
आईवीएफ प्रक्रिया के मुख्य 5 चरण कौन से हैं?
इसके मुख्य चरणों में ओवेरियन स्टिमुलेशन, ट्रिगर शॉट, एग रिट्रीवल, फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो ट्रांसफर शामिल हैं।
अनुष्का रंजन ने कब अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा की?
अनुष्का रंजन ने मई 2026 में अपनी पहली प्रेग्नेंसी की घोषणा की थी।
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