बरसात के मौसम में अगर आप भी अपने सपनों का आशियाना तैयार करने का मन बना रहे हैं, तो निर्माण सामग्री का चुनाव करते समय बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी मकान की उम्र और मजबूती केवल अच्छे सीमेंट या मजबूत लोहे पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि उसमें लगाई जाने वाली ईंटों की गुणवत्ता भी उतनी ही अहम भूमिका निभाती है। यदि दीवारों में घटिया क्वालिटी की ईंटों का इस्तेमाल कर लिया जाए, तो समय बीतने के साथ दीवारों में दरारें उभरने लगती हैं, सीलन बढ़ने की समस्या पैदा हो जाती है और पूरे ढांचे की मजबूती खतरे में पड़ सकती है।
इसी वजह से बाजार से ईंटें खरीदते वक्त उनकी परख करना कभी नहीं भूलना चाहिए। जानकारों के अनुसार, बेहतरीन ईंट की पहचान करने के लिए कुछ बहुत ही आसान और घरेलू तरीके आजमाए जा सकते हैं। खास तौर पर मानसून के इस सीजन में जब नमी ज्यादा होती है, तो ईंटों की मजबूती और उनकी क्वालिटी की जांच करना और भी ज्यादा अनिवार्य हो जाता है ताकि बाद में किसी पछतावे का सामना न करना पड़े।
ईंट की मजबूती परखने का आसान तरीका
निर्माण विशेषज्ञ सुरेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक, ईंट कितनी मजबूत है यह जांचने का एक बेहद आसान तरीका यह है कि आप दो ईंटों को आपस में भिड़ाकर या टकराकर देखें। यदि दोनों ईंटों को आपस में टकराने पर किसी धातु जैसी साफ, स्पष्ट और खनकदार आवाज सुनाई दे, तो इसे इस बात का स्पष्ट संकेत माना जाता है कि वह ईंट भट्ठे पर अच्छी तरह से पकी हुई है। इसके अलावा ईंट को अपने हाथों में उठाकर उसकी बनावट पर भी बारीकी से गौर किया जाना चाहिए। ईंट बहुत अधिक भुरभुरी नहीं होनी चाहिए, उसके किनारे एकदम साफ-सुथरे होने चाहिए और उसका आकार भी बिल्कुल एक जैसा होना चाहिए। अगर किसी ईंट में बड़ी दरारें या किसी प्रकार की असामान्य टूट-फूट नजर आए, तो ऐसी ईंटों को खरीदने से बचना ही समझदारी होती है।
केवल आवाज के भरोसे न रहें
हालांकि दो ईंटों को आपस में टकराकर उसकी आवाज सुनना एक बहुत ही आसान और प्राथमिक जांच मानी जाती है, लेकिन केवल इसी एकमात्र आधार पर उसकी पूरी गुणवत्ता तय कर लेना सही नहीं है। किसी भी ईंट की मजबूती का सही अंदाजा लगाने के लिए उसका सटीक आकार, उसका रंग, उसके पकने की सही स्थिति और उसके पानी सोखने की क्षमता पर भी बराबर नजर रखनी चाहिए। कई बार लोग ईंट को पानी के अंदर डालकर या भिगोकर उसकी क्वालिटी चेक करने का प्रयास करते हैं, लेकिन किसी भी अकेले घरेलू तरीके से ईंट की संपूर्ण गुणवत्ता की पूरी पुष्टि नहीं की जा सकती। यदि आप कोई बड़ा निर्माण कार्य करवा रहे हैं, तो उसमें इस्तेमाल होने वाली ईंटों की गुणवत्ता की जांच किसी विशेषज्ञ की देखरेख में या फिर तय मानकों के आधार पर कराना ज्यादा बुद्धिमानी का काम माना जाता है।
ईंट खरीदते समय इन बातों का रखें खास ध्यान
जब भी आप ईंटें खरीदने जाएं तो इस बात का पूरा प्रयास करें कि खेप में आने वाली लगभग सभी ईंटें एक ही आकार और आकृति की हों। बहुत ज्यादा टेढ़ी-मेढ़ी ईंटें खरीदने से जब राजमिस्त्री दीवारों की चिनाई करता है तो उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और साथ ही मसाला यानी सीमेंट-मोर्टार की खपत भी जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा ईंट के रंग पर भी अपनी पैनी नजर रखें। आमतौर पर जो ईंटें पूरी तरह से और सही ढंग से पकी होती हैं, उनका रंग ऊपर से नीचे तक एक समान नजर आता है। बहुत ज्यादा काली, अधपकी या फिर अत्यधिक जली हुई ईंटों को तुरंत छांटकर अलग कर देना चाहिए। ईंट के अंदर मिट्टी के बड़े-बड़े टुकड़े होना, गहरी दरारें दिखना और उसका बहुत ज्यादा भुरभुरा होना भी उसकी घटिया क्वालिटी की ओर साफ इशारा करता है।
बरसात के मौसम में ईंट खरीदते समय क्यों बरतनी चाहिए सावधानी
मानसून के दिनों में निर्माण सामग्री के रखरखाव और स्टोरेज पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य होता है। ईंटों को हमेशा ऐसी सुरक्षित जगह पर ढेर लगाकर रखना चाहिए जहां पानी लगातार जमा न होता हो। यदि ईंटें लंबे समय तक पानी में डूबी रहती हैं या फिर उन्हें गलत तरीके से खुले में छोड़ दिया जाता है, तो उनकी गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ सकता है। यदि आप इस बरसात के मौसम में ही अपना मकान बनवाने की शुरुआत कर रहे हैं, तो केवल ईंटों ही नहीं बल्कि सीमेंट, रेत, सरिया और दूसरी तमाम निर्माण सामग्रियों की क्वालिटी की भी अच्छी तरह जांच कर लें। अपना मकान बनाने का काम शुरू करने से पहले किसी अनुभवी मिस्त्री या सिविल इंजीनियर से सारी सामग्री की जांच करवा लेना आपको भविष्य में आने वाली तमाम परेशानियों और फालतू के अतिरिक्त खर्चों से आसानी से बचा सकता है।


















