बरसात और गर्मी के दिनों में घर की छत पर स्थापित पानी की टंकी में धूल, मिट्टी, काई, सूखे पत्ते और छोटे-छोटे कीड़े बहुत जल्दी जमा हो जाते हैं। कई बार ऐसा होता है कि टंकी का पानी देखने में बिल्कुल साफ प्रतीत होता है, लेकिन उसके भीतर खतरनाक बैक्टीरिया और गंदगी छिपी हो सकती है। इस तरह के दूषित पानी का इस्तेमाल करने से शरीर में संक्रमण और पानी से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि आप अपनी पानी की टंकी की समय-समय पर उचित सफाई करते रहें।
फिटकरी के इस्तेमाल की सीमाएं
हमारे घरों में पानी को साफ करने के लिए पारंपरिक रूप से फिटकरी का उपयोग किया जाता रहा है। फिटकरी पानी के अंदर तैर रहे महीन गंदगी के कणों को भारी करके नीचे बैठाने में मददगार साबित होती है। हालांकि, यह पानी में मौजूद सभी तरह के बैक्टीरिया और वायरस को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पाती है। यदि टंकी के अंदरूनी हिस्से में काई, कीचड़ या गहरी गंदगी की परत जम चुकी है, तो केवल फिटकरी का टुकड़ा डाल देने मात्र से पानी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता। यही कारण है कि समय-समय पर टंकी को खाली करके उसकी शारीरिक सफाई करना अनिवार्य हो जाता है।
टंकी की सफाई का सही समय और तरीका
विशेषज्ञों के अनुसार घर की पानी की टंकी की सफाई हर तीन से छह महीने के अंतराल पर अवश्य की जानी चाहिए। सफाई के इस पूरे काम को शुरू करने से पहले टंकी में बचा हुआ सारा पानी पूरी तरह बाहर निकाल देना चाहिए। इसके पश्चात टंकी के पेंदे में जमा हुए कीचड़ और मिट्टी को बाहर निकाल फेंकें। अब टंकी की दीवारों, अंदरूनी कोनों और निचले तल को किसी कड़े ब्रश की सहायता से अच्छी तरह रगड़कर साफ करें। किनारों पर जमी काई और चिपकी हुई गंदगी को भी पूरी तरह से खुरच कर हटाएं। इसके बाद टंकी को स्वच्छ पानी से कम से कम दो से तीन बार अच्छी तरह धो लें ताकि बचा हुआ मलबा निकल जाए।
क्लोरीन का उपयोग और सावधानियां
टंकी की पूरी तरह धुलाई करने के बाद पानी को कीटाणुमुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यकतानुसार क्लोरीन या ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि, इसका उपयोग हमेशा एक निश्चित और निर्धारित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। टंकी में जरूरत से ज्यादा मात्रा में क्लोरीन डालना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। क्लोरीन या ब्लीचिंग पाउडर मिलाने के बाद एक तय समय तक उस पानी का इस्तेमाल करने से बचें, ताकि रसायन अपना पूरा असर दिखाकर पानी को शुद्ध कर सके।
पीने के पानी के लिए विशेष सतर्कता
यदि आपकी उसी टंकी के पानी का उपयोग पीने के उद्देश्य से भी किया जाता है, तो केवल फिटकरी पर निर्भर रहकर उसे सुरक्षित मान लेना बड़ी भूल हो सकती है। पीने के लिए हमेशा वाटर फिल्टर, उबले हुए पानी या वैज्ञानिक तरीकों से पूरी तरह शुद्ध किए गए पानी का ही सेवन करना बेहतर माना जाता है। यदि कभी पानी का रंग बदला हुआ नजर आए, उसमें से किसी प्रकार की बदबू आए या उसका स्वाद बदला हुआ लगे, तो उसका उपयोग करने से तुरंत परहेज करें और पानी की जांच करवाएं। टंकी की नियमित और समयबद्ध सफाई करने से जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने और मौसमी बीमारियों की आशंका को काफी हद तक कम करने में मदद मिलती है।



















