सोमवार 31 अगस्त को बेंगलुरु के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। महीने की शुरुआत में दर्ज की गई बढ़त के बाद 24 कैरट, 22 कैरट और 18 कैरट सोने के भाव नीचे आ गए। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में बने दबाव और वैश्विक संकेतों के चलते घरेलू स्तर पर भी कीमती धातुओं के दाम प्रभावित हुए हैं। खुदरा निवेशकों और गहनों की खरीदारी करने वालों के लिए यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बेंगलुरु में सोने की नई दरें
सोमवार दोपहर तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, बेंगलुरु में 24 कैरट सोने की कीमत में लगभग 147 रुपये प्रति ग्राम की कमी आई। इसके साथ ही 24 कैरट सोने का भाव घटकर 15,677 रुपये प्रति ग्राम हो गया, जिससे 10 ग्राम सोने की कीमत 1,57,000 रुपये के स्तर से नीचे आकर 1,56,770 रुपये पर पहुंच गई।
इसी तरह 22 कैरट सोने के दाम में 135 रुपये प्रति ग्राम की गिरावट दर्ज की गई, जिससे इसका नया भाव 14,370 रुपये प्रति ग्राम हो गया। इसके अलावा 18 कैरट सोना 83 रुपये प्रति ग्राम सस्ता होकर 11,785 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर आ गया। गहनों की मांग में उतार-चढ़ाव के बीच यह गिरावट खरीदारों के लिए राहत लेकर आई है।
चांदी की कीमतों की स्थिति
सोने के विपरीत, बेंगलुरु में सोमवार को चांदी की कीमतों में स्थिरता बनी रही। चांदी का भाव 255 रुपये प्रति ग्राम और 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर दर्ज किया गया। यद्यपि इस साल जनवरी और फरवरी के महीनों में चांदी के दामों में काफी तेज उतार-चढ़ाव देखा गया था, लेकिन इस बार सोने में आई भारी गिरावट के बावजूद चांदी के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और फेडरल रिजर्व का प्रभाव
वैश्विक बाजार में अंतरराष्ट्रीय सोना गिरकर 4,450 डॉलर प्रति ऑउंस पर आ गया। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के वे बयान रहे, जिन्होंने ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं। जैक्सन होल में दिए गए उनके बयानों के बाद सितंबर महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत हो गई हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत होते डॉलर की वजह से बिना ब्याज देने वाली कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ गया है। गॉरव गर्ग, जो लेमन में रिसर्च प्रमुख हैं, उन्होंने कहा कि केविन वॉर्श की सख्त टिप्पणियों ने सितंबर में दर वृद्धि की संभावना बढ़ा दी है, जिससे सोने और चांदी की कीमतों पर नकारात्मक असर पड़ा है।
कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव का असर
कीमती धातुओं के साथ-साथ ऊर्जा बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। WTI क्रूड ऑयल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के जोखिमों के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कच्चे तेल में आई इस तेजी से मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा दरों पर अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका जताई जा रही है।



















