भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइज लिमिटेड के शेयरों पर निवेशकों का भारी दबाव देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी का शेयर 14.32 प्रतिशत तक फिसलकर 87 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र है जब कंपनी के शेयरों में बिकवाली दर्ज की गई है। इन चार दिनों के दौरान स्टॉक में कुल मिलाकर 17 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आ चुकी है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर यह शेयर 101 रुपये के भाव पर खुला था, लेकिन जल्द ही 14 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 86.90 रुपये तक आ गया। पिछले 30 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस शेयर ने 18.55 प्रतिशत का नुकसान कराया है, जबकि कंपनी का वर्तमान बाजार पूंजीकरण घटकर 8,950 करोड़ रुपये रह गया है। यह स्टॉक अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर से भी 37.24 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है।
प्रमोटर वारंट आवंटन से गहराया अनिश्चितता का माहौल
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोमवार को हुई इस तेज बिकवाली के पीछे कंपनी की ओर से तरजीही वारंट आवंटन का निर्णय मुख्य कारण बना। पिछले सप्ताह ज़ी की प्रेफरेंशियल इश्यू और अलॉटमेंट कमेटी ने प्रमोटर समूह की संस्था सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड को 126 रुपये प्रति वारंट की दर से 2,40,59,266 पूरी तरह से परिवर्तनीय वारंट आवंटित करने की मंजूरी दी थी। इस मूल्य संरचना में 31.50 रुपये का वारंट सब्सक्रिप्शन प्राइस और 94.50 रुपये का वारंट एक्सरसाइज प्राइस शामिल है। इस आवंटन और मूल्य निर्धारण के तरीके को लेकर निवेशकों में निराशा देखी गई, जिससे शेयर पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
संस्थापक के दिवालियापन मामले और सेबी के आदेश का असर
शेयरधारकों की धारणा पर कंपनी के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़े पर्सनल इंसॉल्वेंसी मामले के नए घटनाक्रम का भी बुरा असर पड़ा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने 25 अगस्त को एक पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत सुभाष चंद्रा के लेनदारों को लगभग 22,006.57 करोड़ रुपये के कुल दावों के मुकाबले महज 6.25 करोड़ रुपये ही मिलेंगे, जबकि प्रक्रियात्मक लागत के लिए 25 लाख रुपये दिए जाएंगे। इस तरह लेनदारों को कुल 6.5 करोड़ रुपये की वापसी होगी, जो कि कुल दावे का केवल 0.03 प्रतिशत है। इसका सीधा मतलब है कि लेनदारों को लगभग 99.97 प्रतिशत का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे पहले बाजार नियामक सेबी ने फंड की हेराफेरी के आरोपों में संस्थापक सुभाष चंद्रा और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गोयनका को एक साल के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया था और दोनों पर 1.48 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसके बाद बीते महीने भी शेयर 13 प्रतिशत से ज्यादा टूटा था।
पहली तिमाही में लाभप्रदता में आई भारी कमी
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन ने भी बाजार को निराश किया है। 10 अगस्त को जारी 30 जून 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही के वित्तीय परिणामों के अनुसार, ज़ी का समेकित परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़कर 1,907.3 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,824.8 करोड़ रुपये था। हालांकि, कर पश्चात शुद्ध लाभ में भारी गिरावट दर्ज की गई। यह पिछले साल के 143.7 करोड़ रुपये से लगभग 48 प्रतिशत घटकर 74 से 76 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसी तरह परिचालन लाभ यानी एबिटडा 65 प्रतिशत गिरकर 78.9 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले 228 करोड़ रुपये था। इस वजह से कंपनी का एबिटडा मार्जिन भी 12.5 प्रतिशत से सिमटकर केवल 4.1 प्रतिशत रह गया।



















