शहरी घरों में बालकनी अक्सर ताजी हवा और हरियाली महसूस करने का सबसे पसंदीदा कोना होती है। पौधों के शौकीन लोग अपनी बालकनी को सजाने के लिए तरह-तरह के गमले लाते हैं, लेकिन सीमित जगह के चलते हमेशा यह दुविधा बनी रहती है कि केवल सजावटी पत्तेदार पौधे लगाएं या फिर रसोई के काम आने वाली चीजें उगाएं। इसी समस्या का हल निकालते हुए बागवानी के शौकीनों ने एक नया और व्यावहारिक तरीका अपनाया है, जिसे ईटेबल कॉर्नर कहा जा रहा है। इसका मकसद बालकनी के किसी भी छोटे से हिस्से को ऐसे संवारना है, जहां देखने में हरियाली और खूबसूरती तो लगे ही, साथ ही रोजमर्रा के खाने में इस्तेमाल होने वाली ताजी हरी चीजें भी आसानी से मिल सकें।
इस पूरे विचार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए किसी विशाल आंगन या दर्जनों गमलों की आवश्यकता नहीं पड़ती। गमले, दीवार पर लटकने वाले हैंगिंग प्लांटर और सामान्य आकार के छोटे कंटेनरों का इस्तेमाल करके बहुत ही कम जगह में यह सेटअप तैयार किया जा सकता है। बस थोड़ी सी योजना और सही पौधों के चयन से एक साधारण बालकनी भी बेहद आकर्षक और उपयोगी रूप ले सकती है।
सजावट और किचन गार्डन का बेहतरीन मेल
ईटेबल कॉर्नर असल में सामान्य बालकनी डेकोर और पारंपरिक किचन गार्डन का एक संतुलित संगम है। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि बालकनी में पहले से रखे सजावटी पौधों को हटा दिया जाए। इसके उलट, यदि बालकनी में पहले से कुछ सजावटी पौधे मौजूद हैं, तो उन्हीं के बीच तालमेल बैठाते हुए एक या दो गमलों में हरी मिर्च, पुदीना या धनिया उगाया जा सकता है। इस व्यवस्था से बालकनी का हरा-भरा माहौल तो बना ही रहता है, साथ ही दाल में डालने के लिए धनिया, चटनी बनाने के लिए पुदीना या तड़के के लिए ताजा मिर्च सीधे घर से मिल जाती है। पौधे केवल आंखों को सुकून देने के बजाय रसोई की दैनिक जरूरतों में भी हाथ बंटाने लगते हैं।
सीमित जगह में वर्टिकल स्टाइल का उपयोग
बहुत से लोग यह सोचकर कदम पीछे खींच लेते हैं कि उनकी बालकनी काफी छोटी है। सच यह है कि ईटेबल कॉर्नर के लिए बड़ी जगह की कोई बंदिश नहीं है। फर्श पर ढेर सारे गमले रखने से बालकनी भर जाती है और वहां आने-जाने या खड़े होने की जगह नहीं बचती। ऐसे में वर्टिकल स्टैंड, रेलिंग पर लगने वाले खास प्लांटर और छत या दीवार से लटकने वाले हैंगिंग पॉट्स का सहारा लेना सबसे समझदारी भरा कदम है।
यदि फर्श खाली रहेगा तो बालकनी में खुलापन महसूस होगा और साफ-सफाई करना भी बेहद सरल रहेगा। एक छोटी बालकनी के लिए दो या तीन मध्यम आकार के डिब्बे और कुछ छोटे गमले पूरी तरह पर्याप्त होते हैं। पौधों का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि उस जगह पर दिनभर में कितनी धूप और रोशनी आती है, ताकि पौधे ठीक से पनप सकें।
रोजाना इस्तेमाल होने वाले पौधों का चुनाव
ईटेबल कॉर्नर की सफलता सही पौधों के चयन पर निर्भर करती है। शुरुआत में ऐसे पौधे लगाना सबसे सुविधाजनक होता है जिनका उपयोग रसोई में लगभग हर दिन होता है। इनमें धनिया, हरी मिर्च, पुदीना और करी पत्ता सबसे मुफीद विकल्प माने जाते हैं। यदि बालकनी में थोड़ी अतिरिक्त जगह और धूप की अच्छी व्यवस्था हो, तो टमाटर या इसी तरह की अन्य छोटी सब्जियों के पौधे भी लगाए जा सकते हैं।
विभिन्न हर्ब्स को अलग-अलग छोटे गमलों में सजाकर रखना बहुत आसान होता है। उदाहरण के तौर पर, पुदीने के गमले को बालकनी के किसी कोने में रखा जा सकता है, जबकि धनिए के कंटेनर को खिड़की के करीब व्यवस्थित किया जा सकता है। इस तरह का विभाजन देखने में सुव्यवस्थित लगता है, बिखराव से बचाता है और हर पौधे की जरूरत के मुताबिक उसकी देखभाल करना भी आसान बना देता है।
लेयरिंग और ड्रेनेज पर विशेष ध्यान
किसी भी बालकनी की खूबसूरती सिर्फ हरे पत्तों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि गमलों को किस तरह रखा गया है। एक ही साइज के कई गमले कतार में रखने के बजाय अलग-अलग ऊंचाई वाले स्टैंड और प्लांटर का प्रयोग करने से बालकनी में एक सुंदर लेयरिंग यानी परतदार दृश्य बनता है। पारंपरिक मिट्टी के गमले, लकड़ी के छोटे रैक या साधारण बास्केट का मेल बालकनी को एक प्राकृतिक और सुरुचिपूर्ण रूप देता है।
सौंदर्य बढ़ाने के प्रयास में पौधों की बुनियादी जरूरतों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। प्रत्येक पौधे को पर्याप्त धूप, सही मात्रा में पानी और जड़ों को फैलने के लिए समुचित जगह मिलनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गमलों या कंटेनरों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था हो, ताकि जड़ों में पानी न ठहरे और वे सड़ने से बची रहें।
संतुलन और खाली जगह का महत्व
अक्सर उत्साह में लोग बहुत सारे पौधे ले आते हैं, जिससे बालकनी का पूरा खुलापन खत्म हो जाता है और वह घिचपिच नजर आने लगती है। ईटेबल कॉर्नर का उद्देश्य बालकनी के हर एक खाली इंच को गमलों से पाट देना नहीं है। कम संख्या में लेकिन उपयोगी और स्वस्थ पौधों को व्यवस्थित रखना कहीं ज्यादा बेहतर परिणाम देता है।
यदि बालकनी में आराम करने के लिए कोई छोटी टेबल या कुर्सी रखी गई है, तो उसके आसपास चलने-फिरने की खुली जगह छोड़नी चाहिए। पौधों की उपयोगिता और बालकनी की खूबसूरती के बीच यह संतुलन ही ईटेबल कॉर्नर को एक संपूर्ण और व्यावहारिक अनुभव बनाता है, जहां आपको अपनी चाय की चुस्की के साथ अपनी उगाई ताजी सब्जियों की खुशबू भी मिलती है।



















