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ग्लोइंग और नेचुरल त्वचा की चाहत ने बढ़ाया कोरियन ब्यूटी का क्रेज, जानें पार्लरों में क्यों घटी भारी मेकअप की मांगजीवनशैली
21 सित॰ 2026, 8:35 am (2 घंटे पहले)· 1

ग्लोइंग और नेचुरल त्वचा की चाहत ने बढ़ाया कोरियन ब्यूटी का क्रेज, जानें पार्लरों में क्यों घटी भारी मेकअप की मांग

दिल्ली एनसीआर में महिलाएं पारंपरिक भारी बेस और न्यूड लुक छोड़कर कोरियन ग्लास स्किन शैली अपना रही हैं। ब्यूटी विशेषज्ञों के अनुसार यह ट्रेंड प्राकृतिक निखार और डीप स्किन हाइड्रेशन पर टिका है।

सौंदर्य और फैशन की दुनिया में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। दिल्ली एनसीआर के ब्यूटी पार्लरों और पेशेवर सैलूनों में पारंपरिक भारी कॉस्मेटिक परतों की जगह अब ग्लास जैसी चमकती त्वचा की मांग तेजी से बढ़ी है। लंबे समय तक लोकप्रिय रहे न्यूड मेकअप का दौर भी अब धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है। सोशल मीडिया पर एशियाई कलाकारों की बेदाग, फ्रेश और चमकदार त्वचा देखने के बाद भारतीय युवतियां और महिलाएं अब बड़े पैमाने पर कोरियन ब्यूटी तकनीकों की ओर आकर्षित हो रही हैं। इंस्टाग्राम और यूट्यूब की रील्स से निकलकर यह चलन अब रोजमर्रा की शादियों, पार्टियों और सामान्य आउटिंग के लिए पहली पसंद बन चुका है।

सैलूनों में दो वर्षों के दौरान बदला ट्रेंड

राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित ओमेक्स मॉल के ड्यूटी लैंड आयोजन में सौंदर्य विशेषज्ञों ने इस उभरती शैली पर विस्तार से चर्चा की। नायका ब्यूटी स्टोर की प्रबंधक और सौंदर्य विशेषज्ञ दिव्या ने साझा किया कि बीते 2 वर्षों में जिस शैली की लोकप्रियता में सबसे तेज उछाल आया है, वह कोरियन स्टाइल ही है। उनके अनुसार पहले महिलाएं शादी या विशेष अवसरों पर भारी बेस और गहरे रंगों का इस्तेमाल करवाती थीं, लेकिन अब वे ऐसा निखार चाहती हैं जिसमें चेहरा स्वाभाविक, साफ और अंदरूनी चमक से भरा दिखे। यह ट्रेंड त्वचा को ढंकने के बजाय उसकी सेहत और ताजगी को उभारने पर केंद्रित रहता है।

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कोरियन लुक का मूल दर्शन और तैयारी

इस सौंदर्य शैली की बुनियादी विशेषता चेहरे को भारी या जरूरत से ज्यादा मैट दिखाने से बचाना है। पूरा ध्यान त्वचा की नमी, हल्के गुलाबी ब्लश और आंखों की सौम्यता पर केंद्रित रहता है। यह प्रक्रिया कुल 8 से 10 अलग-अलग चरणों में पूरी की जाती है और इसे किसी भी स्किन टाइप पर आसानी से अपनाया जा सकता है। सबसे पहला और आवश्यक कदम त्वचा को पूरी तरह साफ करके उस पर गहरा मॉइस्चराइजर लगाना है। यदि दिन का समय हो तो सनस्क्रीन का उपयोग अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि पर्याप्त नमी और हाइड्रेटेड त्वचा ही इस पूरे लुक की रीढ़ होती है।

फाउंडेशन की मोटी परत से परहेज

पारंपरिक शैली के विपरीत यहां चेहरे पर फाउंडेशन की मोटी परतें नहीं चढ़ाई जाती हैं। इसकी जगह बहुत हल्का फाउंडेशन या टिंटेड बेस इस्तेमाल किया जाता है, ताकि त्वचा की वास्तविक बनावट दिखती रहे। यदि चेहरे पर कहीं कोई दाग या धब्बा नजर आ रहा हो, तो केवल उसी विशेष हिस्से पर हल्का सा कंसीलर लगाकर उसे संतुलित किया जाता है। इससे चेहरा किसी मुखौटे जैसा नहीं लगता बल्कि बेहद फ्रेश और स्वाभाविक रूप से दमकता हुआ दिखाई देता है।

गालों पर ब्लश और प्राकृतिक भौंहें

गालों और नाक के ऊपर हल्का सा ब्लश लगाना इस शैली का प्रमुख आकर्षण है। इसके लिए आमतौर पर गुलाबी, पीच या कोरल शेड्स चुने जाते हैं। इस हल्के रंग को गालों के बीच वाले हिस्से से शुरू करके ऊपर की ओर धीरे-धीरे फैलाया जाता है, जिससे चेहरे पर एक मासूम ताजगी आ जाती है। इसके साथ ही भौंहों को नुकीला या अत्यधिक गहरा बनाने के बजाय उनके प्राकृतिक आकार को ही बनाए रखा जाता है। जहां भौंहों के बाल विरल हों, उन्हें हल्के भूरे रंग के पाउडर या पेंसिल से बहुत करीने से भर दिया जाता है।

सॉफ्ट आई मेकअप और टिंटेड होंठ

आंखों के लिए हल्के भूरे, गुलाबी या पीच शेड्स वाले आईशैडो का चयन किया जाता है। ऊपरी पलकों पर एक बहुत ही महीन लाइनर लगाया जाता है और किसी भी प्रकार के भारी या तीखे विंग बनाने से बचा जाता है। कोरियन स्टाइल में निचली पलकों के बीच हल्की चमक को सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए वहां थोड़ा सा शिमर लगाया जाता है। होंठों के लिए किसी सख्त लिपस्टिक के बजाय गुलाबी, पीच या लाल रंग का हल्का टिंट इस्तेमाल किया जाता है। इस टिंट को होंठों के मध्य हिस्से में थोड़ा गाढ़ा रखकर बाहर की ओर फैला दिया जाता है, जिससे होंठ बेहद कोमल और स्वाभाविक दिखते हैं।

अंतिम फिनिशिंग और प्राकृतिक चमक

मेकअप को लॉक करते समय पूरे चेहरे पर भारी कॉम्पैक्ट या पाउडर की परतें थोपने से बचा जाता है। इसका उद्देश्य त्वचा की प्राकृतिक नमी और शीशे जैसी चमक को बरकरार रखना है। चेहरे की हड्डियों को उभारने के लिए केवल गालों के ऊपरी हिस्से पर बेहद हल्का सा हाइलाइटर लगाया जाता है। संक्षेप में कहें तो भरपूर हाइड्रेशन, हल्का बेस, पीच ब्लश, प्राकृतिक भौंहें, सौम्य आंखें और टिंटेड होंठ ही इस पूरे कोरियन लुक का मूल मंत्र हैं।

सवाल-जवाब

कोरियन मेकअप पारंपरिक मेकअप से किस तरह अलग है?
पारंपरिक मेकअप में फाउंडेशन की मोटी परतें और मैट फिनिश होती है, जबकि कोरियन मेकअप चेहरे को प्राकृतिक, हल्का, हाइड्रेटेड और ग्लोइंग दिखाता है।
कोरियन मेकअप करने में कितने चरण शामिल होते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार इस लुक को पूरा करने के लिए त्वचा की तैयारी से लेकर फिनिशिंग तक करीब 8 से 10 स्टेप्स होते हैं।
इस शैली में फाउंडेशन का इस्तेमाल कैसे किया जाता है?
इसमें भारी फाउंडेशन के बजाय बहुत हल्का फाउंडेशन या टिंटेड बेस लगाया जाता है और दाग-धब्बों पर थोड़ा सा कंसीलर इस्तेमाल होता है।
कोरियन लुक में ब्लश और आई मेकअप के लिए कौन से रंग चुने जाते हैं?
ब्लश और आईशैडो के लिए आमतौर पर हल्के गुलाबी, पीच या कोरल रंगों का उपयोग किया जाता है।
क्या कोरियन मेकअप हर तरह की त्वचा के लिए उपयुक्त है?
हां, विशेषज्ञ दिव्या के अनुसार उचित मॉइस्चराइजर और सही स्किन प्रेप के साथ इसे किसी भी स्किन टाइप पर किया जा सकता है।
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टिप्पणियाँ 4

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·1 घंटे पहले

यह बदलाव सिर्फ सौंदर्य का नहीं बल्कि त्वचा की मूल सेहत से जुड़ा है। भारी कॉस्मेटिक्स के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान से बचने के लिए लोग अब हाइड्रेशन और सनस्क्रीन को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो दीर्घकालिक डर्मेटोलॉजिकल स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।

Nyra Kaif@nyra-kaif·1 घंटे पहले

यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि आज की डिजिटल पीढ़ी अब बनावटीपन से दूर होकर 'स्किन-फर्स्ट' अप्रोच को अपना रही है। सोशल मीडिया के इस दौर में जहां हर कोई रील्स और वीडियो के जरिए अपनी असली शख्सियत साझा कर रहा है, वहीं स्किन केयर और मिनिमल मेकअप का यह चलन यह सिखाता है कि बाहरी चमक से ज्यादा त्वचा की अंदरूनी सेहत और डीप हाइड्रेशन मायने रखते हैं। आने वाले समय में यह ट्रेंड सिर्फ एक फैशन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह ब्यूटी इंडस्ट्री में रूटीन स्किनकेयर को और अधिक मजबूत करेगा।

Meera Joshi@meera-joshi·1 घंटे पहले

यह बदलाव सिर्फ सौंदर्य का नहीं, बल्कि हमारी मानसिक स्थिति और आत्म-स्वीकृति का भी प्रतीक है। जब महिलाएं भारी मेकअप के मुखौटे हटाकर अपनी प्राकृतिक त्वचा और आंतरिक चमक को अपनाती हैं, तो यह समाज में बनावटीपन से मुक्ति और खुद के प्रति सहज होने की ओर एक सकारात्मक मनोवैज्ञानिक कदम है। यह आत्म-विकास और माइंडफुलनेस की जीवनशैली से सीधे जुड़ा है।

Neha Verma@neha-verma·1 घंटे पहले

मीरा जोशी की बात को आगे बढ़ाते हुए, यह प्रवृत्ति इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आधुनिक उपभोक्ता अब सिर्फ कॉस्मेटिक्स खरीदने के बजाय अपनी त्वचा के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहा है। सैलूनों में इस मांग के बढ़ने का सीधा अर्थ है कि आने वाले समय में बाजार का रुख स्किनकेयर-फर्स्ट उत्पादों की ओर पूरी तरह शिफ्ट हो जाएगा।

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