महानगरों में वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बन चुका है, जिससे घरों के भीतर की आबोहवा भी अछूती नहीं है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में जहरीली हवा के कारण एयर प्यूरीफायर की मांग में भारी इजाफा देखा जा रहा है। हालांकि, हर परिवार के बजट में अलग से महंगा एयर प्यूरीफायर खरीदना मुमकिन नहीं हो पाता। ऐसे हालात में घर में पहले से मौजूद एयर कंडीशनर का सूझबूझ भरा इस्तेमाल कमरे के वातावरण को काफी हद तक स्वच्छ और सांस लेने लायक बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है। यदि कुछ बुनियादी तकनीकी बातों का ख्याल रखा जाए, तो ठंडक देने वाली यही मशीन घर की इनडोर एयर क्वालिटी को बेहतर करने का जरिया बन सकती है।
फिल्टर की नियमित सफाई से रुकेगी धूल
एयर कंडीशनर चलने के दौरान कमरे की हवा को लगातार खींचता है और ठंडा करके वापस फेंकता है। इस प्रक्रिया में हवा में तैरने वाले धूल के कण, रोएं और गंदगी एसी के एयर फिल्टर में फंसते चले जाते हैं। यदि लंबे समय तक इन फिल्टरों की सफाई न की जाए, तो वे पूरी तरह जाम हो जाते हैं, जिससे न केवल कूलिंग घटती है बल्कि जमा हुई धूल वापस कमरे में फैलने लगती है। सामान्य दिनों में विशेषज्ञों का परामर्श है कि एसी के फिल्टर को प्रत्येक 2 से 4 सप्ताह के अंतराल पर पानी से धोकर सुखा लेना चाहिए। वहीं जब मौसम ज्यादा धूलभरा हो या आंधी-तूफान का दौर चल रहा हो, तब सप्ताह में कम से कम एक बार फिल्टर निकालना और साफ करना ज्यादा सुरक्षित माना गया है।
कॉइल और डक्ट की पेशेवर सर्विसिंग भी जरूरी
सिर्फ ऊपरी जालीदार फिल्टर धो लेना ही घर की हवा को स्वच्छ रखने के लिए काफी नहीं होता। एयर कंडीशनर के आंतरिक कलपुर्जों, विशेषकर कूलिंग कॉइल और डक्ट के भीतर नमी के कारण समय बीतने पर धूल की परतें, हानिकारक बैक्टीरिया और फफूंदी पनपने की प्रबल आशंका रहती है। अगर यह गंदगी अंदर ही अंदर सड़ती रहे, तो एसी चालू होते ही कमरे के भीतर बदबूदार और दूषित हवा घूमने लगती है, जो सांस से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकती है। इस छिपे हुए जोखिम से बचने के लिए वर्ष में कम से कम एक बार किसी अनुभवी प्रोफेशनल टेक्नीशियन को बुलाकर कॉइल तथा डक्ट की डीप क्लीनिंग सर्विसिंग अवश्य करवानी चाहिए।
मल्टी लेयर और एडवांस्ड फिल्ट्रेशन का चुनाव
बाजार में आने वाले अधिकांश साधारण एसी फिल्टर प्राथमिक तौर पर मशीन के अंदरूनी हिस्सों को बड़ी धूल से सुरक्षित रखने के मकसद से डिजाइन किए जाते हैं। हवा में मौजूद बेहद महीन और अति सूक्ष्म प्रदूषक कणों को पूरी तरह थामने में साधारण फिल्टर पूरी तरह सक्षम नहीं होते। इसलिए यदि कोई नया एसी खरीदने की योजना बना रहा हो और घर के भीतर की हवा को बेहतर रखना प्राथमिकता हो, तो ऐसे मॉडल्स को वरीयता देना मुफीद रहता है जिनमें एडवांस्ड डस्ट फिल्टर या फिर कई परतों वाला मल्टी-लेयर फिल्ट्रेशन सिस्टम पहले से मौजूद हो।
आधुनिक तकनीकों से लैस नए एयर कंडीशनर
तकनीकी नवाचार के चलते आजकल कई आधुनिक एयर कंडीशनर मॉडल्स में इन-बिल्ट एयर प्यूरीफिकेशन तकनीक दी जाने लगी है। इन मॉडल्स में दुर्गंध और गैसीय तत्वों को सोखने वाले एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर, बारीक कणों को थामने वाले मल्टी-लेयर फिल्ट्रेशन और कीटाणुओं को नष्ट करने वाले यूवी स्टेरिलाइजेशन जैसे फीचर्स शामिल रहते हैं। ये अत्याधुनिक खूबियां कमरे की हवा में तैर रहे कई प्रकार के प्रदूषक तत्वों और सूक्ष्मजीवों को काफी हद तक निष्क्रिय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।



















