उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में समोसे का शौक रखने वालों की कोई कमी नहीं है, लेकिन मऊ जिले में मिलने वाली घाटी का क्रेज ही कुछ अलग है। राज्य के अन्य हिस्सों में आसानी से न मिलने वाली यह पारंपरिक डिश मऊ के खानपान की शान है और यहां आने वाले हर शख्स की जुबान पर इसका नाम रहता है।
जयसवाल स्वीट हाउस की मशहूर घाटी
मऊ जिले के द्वारा बाजार में स्थित जयसवाल स्वीट हाउस पर मिलने वाली यह घाटी मात्र ₹7 प्रति पीस के हिसाब से बेची जाती है। इस छोटी सी दुकान पर मिलने वाली इस खासियत की वजह से यह स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले खाने के शौकीनों की भी पहली पसंद बन चुकी है। जो कोई भी एक बार इस स्वाद का चख लेता है, वह इस लजीज व्यंजन का दोबारा आनंद लेने के लिए मजबूर हो जाता है।
मैदे की बजाय शुद्ध आटे का इस्तेमाल
आम तौर पर बाजारों में मिलने वाली ऐसी चीजें मैदे से तैयार की जाती हैं, जो सेहत के लिहाज से नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। इसके विपरीत, इस खास घाटी को बनाने में मैदे का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है, बल्कि इसे पूरी तरह से घर के शुद्ध आटे से गूंथ कर तैयार किया जाता है। यही मुख्य वजह है कि यह खाने में भारी या नुकसानदेह नहीं होती और लोगों को इसमें बिल्कुल घर जैसा सौंधापन मिलता है।
तैयार करने की पारंपरिक और अनोखी विधि
दुकान संचालक सुनील जायसवाल बताते हैं कि इस बेहतरीन घाटी को बनाने की प्रक्रिया काफी दिलचस्प और पारंपरिक है। सबसे पहले बाजार से चना खरीदकर लाया जाता है और उसे अच्छी तरह से भुना जाता है। इसके बाद उस भुने हुए चने को आटा चक्की पर पिसवाया जाता है। चने के इस बेसन या सत्तू जैसे मिश्रण को घर लाकर उसमें प्याज, लहसुन और अन्य जरूरी मसालों का मिश्रण तैयार किया जाता है.
मसाला तैयार होने के बाद घर के साफ-सुथरे आटे को गूंथ कर कुछ देर के लिए अलग रख दिया जाता है। कुछ समय बीतने के बाद जब गूंथा हुआ आटा अच्छी तरह से फूल जाता है, तब असली प्रक्रिया शुरू होती है। इस आटे में मसाले को भरकर गोल आकार में घाटी बनाई जाती है, जो उत्तर प्रदेश के हर कोने में देखने को नहीं मिलती है और यही बात इसे मऊ की पहचान बनाती है।
घर जैसा स्वाद और जबरदस्त डिमांड
सुनील का कहना है कि उनकी दुकान पर बनने वाली इस घाटी में पूरी तरह से घरेलू स्वाद परोसा जाता है। यही कारण है कि लोग न केवल दुकान पर खड़े होकर गर्मागर्म घाटी का लुत्फ उठाते हैं, बल्कि बड़ी संख्या में इसे पैक करवाकर अपने घरों और रिश्तेदारों के लिए भी ले जाते हैं। बाजार की अन्य दुकानों की तड़क-भड़क से अलग, यहां मिलने वाली सादगी और शुद्धता ही ग्राहकों को बार-बार खींच लाती है।
किफायती दाम और कड़ाही से निकलते ही बिकने का रिकॉर्ड
इस लजीज घाटी की कीमत बेहद मामूली रखी गई है ताकि आम आदमी और हर वर्ग के लोग इसका आनंद उठा सकें। मात्र ₹7 प्रति पीस मिलने के कारण यह हर किसी के बजट में फिट बैठती है। ग्राहकों की दीवानगी का आलम यह है कि कड़ाही से गरमागरम बाहर निकलते ही यह घाटी महज 10 मिनट के भीतर पूरी तरह बिक जाती है। इसका बेजोड़ स्वाद ही इसकी सबसे बड़ी मार्केटिंग है जो लोगों को ढूंढते हुए यहां तक ले आती है।
40 वर्षों से अटूट है स्वाद का सफर
यह खास दुकान मऊ मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर इंदरा बाजार में स्थित है। दुकान के ठीक बगल में रेलवे स्टेशन होने की वजह से सफर करने वाले यात्री भी यहां रुककर घाटी पैक कराते हैं और इसे दूसरे शहरों में ले जाते हैं। यही वजह है कि इसकी मांग हमेशा उच्च स्तर पर बनी रहती है। पिछले लगभग 40 वर्षों से इस दुकान का जायका बिल्कुल नहीं बदला है और आज भी वे शुद्ध आटे से ही अपनी पारंपरिक घाटी तैयार कर रहे हैं।



















