बरसात की विदाई और हल्की ठंड की शुरुआत के साथ ही वातावरण में बदलाव दर्ज किया जा रहा है। सुबह और शाम के वक्त महसूस होने वाली यह ठंड न केवल मनुष्यों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि दुधारू पशुओं के पाचन तंत्र पर भी गहरा असर डालती है। ऐसे संधिकाल में डेयरी किसानों और पशुपालकों को अपनी गायों व भैंसों की शारीरिक स्थिति पर विशेष निगरानी रखनी पड़ती है। इस संक्रमण काल में मवेशियों में अचानक गैस बनने अथवा पेट फूलने यानी ब्लोटिंग की समस्या बार-बार सामने आती है। पेट में अत्यधिक अफारा बनने पर पशु अत्यंत बेचैन, असहज और सुस्त दिखाई देने लगता है। यदि इस विकार पर फौरन ध्यान न दिया जाए अथवा चिकित्सीय सहायता में विलंब हो, तो यह स्थिति मवेशी के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए पशुपालकों को आरंभिक लक्षणों की पहचान और प्राथमिक प्रबंधन के तौर-तरीके अच्छी तरह पता होने चाहिए।
लापरवाही बन सकती है मवेशी के लिए घातक
देवघर के पशु विशेषज्ञ जयकांत राय के अनुसार, जब भी मौसम में बड़ा फेरबदल होता है, दुधारू मवेशियों के भीतर गैस और पेट फूलने के मामले काफी बढ़ जाते हैं। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सक के समय पर न पहुंच पाने या आवश्यक दवाओं की व्यवस्था में देरी के चलते पशु की हालत तेजी से बिगड़ जाती है। राय जोर देकर कहते हैं कि मवेशी का पेट असामान्य रूप से फूलने लगे, तो इसे मामूली मानकर अनदेखा करने की गलती कतई न करें। किसान को पशु की सांस लेने की गति, उसकी बेचैनी और खड़े होने या बैठने के तौर-तरीकों पर लगातार नजर रखनी चाहिए तथा स्थिति बिगड़ते ही प्राथमिक उपचार शुरू कर देना चाहिए।
सरसों तेल और तारपीन का पहला घरेलू नुस्खा
आपात स्थिति में जब तत्काल पशु चिकित्सक उपलब्ध न हो, तब स्थानीय स्तर पर वर्षों से अपनाए जा रहे पारंपरिक देसी उपाय काफी राहत दिला सकते हैं। विशेषज्ञ ने एक ऐसे ही नुस्खे का उल्लेख करते हुए बताया कि सरसों का तेल, थोड़ी हींग, तारपीन का तेल और नौसादर टिकरी को एक साथ मिलाकर मवेशी को मौखिक रूप से दिया जा सकता है। यह मिश्रण आंतों और पेट में रुकी हुई भारी गैस को बाहर निकालने में मदद करता है।
दवा पिलाते समय बरतें यह जरूरी सावधानी
इस तरल नुस्खे को पशु को देते समय अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। किसान कभी भी मवेशी के मुंह में जबरन या तेज धार के साथ यह घोल न डालें। यदि तरल पदार्थ गलत दिशा में चला गया, तो वह सीधे श्वसन नली अथवा फेफड़ों में प्रवेश कर सकता है, जिससे ड्रेंचिंग निमोनिया या दम घुटने का गंभीर जोखिम पैदा हो जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ पिलाते समय पशुपालक को बेहद धैर्यपूर्वक, धीरे-धीरे और पूरी सावधानी के साथ दवा मुंह के अंदर पहुंचानी चाहिए।
अजवाइन, मीठा सोडा और नींबू का दूसरा विकल्प
पेट में जमा अतिरिक्त गैस को निष्कासित करने के लिए विशेषज्ञ ने एक अन्य कारगर देसी फार्मूले का भी विवरण दिया है। इस दूसरे नुस्खे में सरसों के तेल में हींग, पिसी अजवाइन, मीठा सोडा (खाने वाला सोडा) और लगभग 250 ग्राम ताजे नींबू का रस मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। नींबू का रस और मीठा सोडा पेट में रासायनिक संतुलन बनाकर झागदार गैस को दबाने का काम करते हैं, जिससे ब्लोटिंग की गंभीर स्थिति से जूझ रहे मवेशी को शीघ्र राहत मिल सकती है।
आहार नियंत्रण और नियमित निगरानी ही सबसे बड़ा बचाव
मवेशियों को इस कष्टप्रद समस्या से बचाने के लिए सबसे प्रभावी रणनीति उनकी आहार प्रणाली और दैनिक दिनचर्या में संतुलित बदलाव रखना है। किसानों को चाहिए कि वे बदलते मौसम के दौरान अचानक अधिक मात्रा में गीला या अत्यधिक हरा चारा डालने से बचें। ऐसे खाद्य पदार्थ पेट में पहुंचकर त्वरित किण्वन (फर्मेंटेशन) शुरू कर देते हैं, जिससे अत्यधिक गैस बनती है। पशुपालक अपने मवेशियों के खान-पान का समय नियमित रखें और जैसे ही कोई असामान्य संकेत दिखे, तत्काल सतर्क हो जाएं। समय पर पहचान और तुरंत उठाया गया कदम ही पशु के जीवन की रक्षा कर सकता है।



















