गॉल टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल का बड़ा कारनामा, विदेश में नंबर-3 पर ये उपलब्धि हासिल करने वाले बने तीसरे भारतीयइमरान हाशमी की बड़ी कामयाबी पर पत्नी परवीन ने लुटाया प्यार, साझा किया भावुक पोस्टघर पर इस आसान विधि से बनाएं हलवाई जैसा दानेदार मोहनथाल, नोट करें सही मापघर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसे क्रिस्पी और सॉफ्ट मेदू वड़ा, जानें दाल भिगोने से लेकर तलने तक के सीक्रेट टिप्ससूरत में जहरीला खाना खाने से पांच साल की आर्या की मौत, चार अन्य सदस्य अस्पताल में भर्तीअसम में शासन व्यवस्था को जनता के द्वार तक पहुंचाने के लिए आठ नए सह-जिलों का गठननीदरलैंड्स में होने वाले महामुकाबले से पहले पीआर श्रीजेश का बड़ा दावा, पाकिस्तान के खिलाफ आसान हुई भारत की राहगॉल टेस्ट में केएल राहुल को जीवनदान मिलने पर मची सनसनी, देवदत्त पडिक्कल की सलाह ने पलटा मैच का रुखभारत में काम के मुकाबले सैलरी का गणित गड़बड़, सर्वे में हुआ बड़ा खुलासासाउथ 24 परगना के बरुईपुर में सड़क किनारे मिला बम, इलाके में फैली दहशत और पुलिस जांच शुरू
मिथिलांचल के अनोखे देसी नुस्खे जिससे बिना फल वाले कटहल और पपीते के पेड़ भी देने लगते हैं बंपर पैदावारजीवनशैली
25 जुल॰ 2026, 12:32 pm (24 दिन पहले)· 0

मिथिलांचल के अनोखे देसी नुस्खे जिससे बिना फल वाले कटहल और पपीते के पेड़ भी देने लगते हैं बंपर पैदावार

मिथिलांचल के ग्रामीण इलाकों में कटहल के पेड़ों पर चूना-काजल लगा मिट्टी का घड़ा बांधने और पपीते के तने में लकड़ी ठोकने जैसे अनोखे पारंपरिक उपायों से पेड़ों में भारी फलन लाने का दावा किया जाता है।

मिथिलांचल के गांवों से गुजरते समय अक्सर लोगों को कटहल के विशाल पेड़ों पर मिट्टी के घड़े बंधे हुए दिखाई दे जाते हैं। पहली बार देखने वाले लोग अक्सर इस असमंजस में पड़ जाते हैं कि आखिर पेड़ पर मटका लटकाने का क्या वैज्ञानिक आधार हो सकता है। दरअसल, यह ग्रामीण इलाकों में आजमाया जाने वाला एक बेहद लोकप्रिय और पुराना पारंपरिक नुस्खा है। इसके बारे में स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि इससे बिना फल देने वाले पेड़ों में भी चमत्कारी रूप से बंपर पैदावार होने लगती है और पेड़ फलों से लद जाते हैं।

कटहल के पेड़ पर मिट्टी का घड़ा बांधने की अनूठी विधि

ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर अपने घरों के आंगन या खाली जमीनों पर कटहल के पेड़ लगाते हैं। कई बार ये पेड़ पूरी तरह विकसित और बड़े तो हो जाते हैं, लेकिन जब इनमें फल आने का समय आता है, तब इनमें लंबे समय तक कोई फलन नहीं दिखाई देता। ऐसी स्थिति में इस पारंपरिक उपाय को आजमाया जाता है। स्थानीय निवासी वीणा देवी के अनुसार, यह पारंपरिक नुस्खा पूरी तरह काम करता है। इसके तहत किसी भी महीने के रविवार या मंगलवार के दिन मिट्टी के एक छोटे घड़े पर, जिसे स्थानीय भाषा में घईला भी कहा जाता है, चूना और काजल का लेप या बिंदु लगाए जाते हैं। इसके बाद इस तैयार घड़े को पेड़ की मुख्य शाखा या तने पर मजबूती से बांध दिया जाता है।

ये भी पढ़ें

नजर दोष से बचाव और फलन की मान्यता

इस अनूठी ग्रामीण परंपरा के पीछे गहरी स्थानीय मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। ग्रामीणों का मानना है कि चूने और काजल से सजे इस मिट्टी के घड़े को पेड़ पर टांगने से पेड़ को किसी की बुरी नजर नहीं लगती। लोक मान्यताओं के अनुसार, नजर दोष के कारण ही अक्सर अच्छे-भले और फलने-फूलने वाले पेड़ों में अचानक फल आना बंद हो जाता है। इस उपाय को करने वाले लोगों का दावा है कि घड़ा बांधने के ठीक एक साल के भीतर पेड़ में घड़े के आकार जैसे बड़े-बड़े कटहल भारी मात्रा में फलने लगते हैं। यह नुस्खा आज भी मिथिलांचल के कई इलाकों में बड़े चाव से आजमाया जाता है।

पपीते के पेड़ के लिए लकड़ी ठोकने का नुस्खा

मिथिलांचल में सिर्फ कटहल ही नहीं, बल्कि पपीते के पेड़ों के लिए भी एक ऐसा ही दिलचस्प देसी उपाय अपनाया जाता है। कई बार पपीते के पेड़ काफी बड़े और सेहतमंद दिखाई देते हैं, लेकिन उनमें केवल फूल ही आते हैं और वे फल में तब्दील नहीं हो पाते। जब फलन की बारी आती है तो पेड़ सिर्फ फूल देकर रह जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए ग्रामीण एक पतली और नुकीली लकड़ी लेकर उसे पपीते के पेड़ के तने के बीचों-बीच ठोक देते हैं। माना जाता है कि इस भौतिक प्रक्रिया से पेड़ में आंतरिक बदलाव आते हैं और वह फूल देने के बजाय तेजी से फल देना शुरू कर देता है।

वैज्ञानिक प्रामाणिकता और लोक विश्वास

हालांकि, आधुनिक वनस्पति विज्ञान या कृषि विज्ञान के पास इन स्थानीय नुस्खों और टोटकों को साबित करने के लिए कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पेड़ों में फल न आने के पीछे मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी, परागण की अनुपस्थिति या पपीते जैसी फसलों में नर और मादा पौधों का अंतर मुख्य कारण हो सकता है। इसके बावजूद, मिथिलांचल की समृद्ध लोक संस्कृति में ये नुस्खे आज भी बहुत गहरे रचे-बसे हैं। अगर आपके बगीचे में भी कोई ऐसा पेड़ है जो फल नहीं दे रहा है, तो इन हानिरहित घरेलू उपायों को आजमाने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग इसके सकारात्मक परिणाम मिलने का दावा करते हैं।

सवाल-जवाब

What is the clay pot trick for jackfruit trees?
In this hack, a small clay pot smeared with lime and kohl is tied to a non-fruiting jackfruit tree. It is believed that within a year, the tree starts bearing large amounts of heavy fruit.
When should this clay pot ritual be performed?
According to local beliefs, this remedy must be performed specifically on a Sunday or a Tuesday of any month to achieve positive results.
Why are lime and kohl applied to the clay pot?
Villagers believe that the pot painted with lime and kohl protects the tree from the evil eye, which helps restore its ability to bear fruit.
What is the traditional hack for papaya trees that do not fruit?
If a papaya tree only produces flowers and no fruit, villagers drive a thin, sharp wooden stick into the middle of its trunk to stimulate fruiting.
Is there any scientific evidence supporting these gardening hacks?
No, there is no scientific evidence to back these traditional remedies. Modern science attributes the lack of fruiting to nutrient deficiencies or poor pollination.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR