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भारत में काम के मुकाबले सैलरी का गणित गड़बड़, सर्वे में हुआ बड़ा खुलासाव्यापार
18 अग॰ 2026, 7:17 pm (2 घंटे पहले)· 3

भारत में काम के मुकाबले सैलरी का गणित गड़बड़, सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा

भारत में एक नए सर्वे में सामने आया है कि अधिकांश प्रोफेशनल्स को उनके पद के हिसाब से सैलरी नहीं मिलती है और बढ़ा-चढ़ाकर पद देना इंडस्ट्री में आम चलन बन चुका है।

भारत में नौकरीपेशा लोगों के बीच काम, ओहदे और मिलने वाले वेतन को लेकर एक बड़ी विसंगति सामने आई है। देश के वर्कप्लेस पर प्रोफेशनल्स को उनके पद यानी डेजिग्नेशन के मुताबिक सैलरी नहीं मिल रही है। यह स्थिति कर्मचारियों के भीतर गहरे असंतोष को जन्म दे रही है और उनकी मेहनत के मुकाबले मिलने वाली वित्तीय ग्रोथ के बीच एक चौड़ी खाई को साफ तौर पर दिखाती है। एक हालिया सर्वे रिपोर्ट में मंगलवार को इन चौंकाने वाले तथ्यों से पर्दा उठा है।

सैकड़ों कंपनियों और हजारों कर्मचारियों पर आधारित है रिपोर्ट

यह पूरी जानकारी इंडीड की तिमाही हायरिंग ट्रैकर रिपोर्ट से सामने आई है। इस व्यापक अध्ययन में देश भर की कुल 1,211 कंपनियों और 2,533 कर्मचारियों से मिले फीडबैक और सुझावों को शामिल किया गया है। सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, करीब 10 में से 6 कर्मचारियों ने इस बात को स्वीकार किया कि उनका वर्तमान पद उनकी सैलरी से मेल नहीं खाता है और दोनों के बीच भारी अंतर बना हुआ है।

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इंडस्ट्री में बढ़ा-चढ़ाकर पद देने का चलन

सर्वे रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि आज के समय में इंडस्ट्री के भीतर बढ़ा-चढ़ाकर पद देना एक आम बात बन गई है। इस अध्ययन में शामिल लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारियों ने माना कि उन्होंने अपने सहकर्मियों या खुद के साथ ऐसा होते देखा है, जहां बिना किसी समान सैलरी बढ़ोतरी के केवल भारी-भरकम और सीनियर दिखने वाले पद थमा दिए जाते हैं।

करियर ग्रोथ और पहचान में पद की भूमिका

इस पूरे मामले पर बात करते हुए इंडीड इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर शशि कुमार ने बताया कि पद हमेशा से एक प्रोफेशनल की पहचान का एक अहम हिस्सा रहा है। उनका कहना है कि पद इसलिए सार्थक बने रहते हैं क्योंकि वे व्यक्ति की क्षमता और भविष्य के अवसरों का संकेत देते हैं, लेकिन वे तभी सबसे ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं जब वे किसी वास्तविक करियर ग्रोथ को सीधे तौर पर दर्शाते हैं।

मई और जून 2026 में हुआ था सर्वे

यह विशेष रिपोर्ट इंडीड की ओर से वैल्यूवॉक्स के माध्यम से मई और जून 2026 के दौरान किए गए एक विस्तृत सर्वे पर आधारित है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 2 वर्षों के दौरान अपने पद में बदलाव या प्रमोशन पाने वाले लगभग 3 में से 1 कर्मचारी ने यह माना कि उन्हें यह बदलाव या तो बिल्कुल बिना किसी सैलरी हाइक के मिला या फिर उनकी सैलरी में 5 प्रतिशत से भी कम की मामूली बढ़ोतरी की गई। इसके विपरीत, जब बात नए अवसरों की आती है तो 52 प्रतिशत प्रोफेशनल्स का यह कहना है कि वे किसी बेहतर पद के बजाय अधिक सैलरी को चुनना ज्यादा पसंद करेंगे।

भविष्य के मौकों के लिए पद का महत्व

हालांकि वेतन और ओहदे में तालमेल की कमी है, लेकिन इसके बावजूद प्रोफेशनल्स जॉब टाइटल को पूरी तरह से नजरअंदाज भी नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 70 प्रतिशत लोगों का मानना है कि भविष्य में उनके करियर के नए अवसरों को तय करने में उनके पद की एक बहुत बड़ी और अहम भूमिका होती है। इसके अलावा, करीब 73 प्रतिशत कर्मचारियों को यह भी लगता है कि एक बेहतर और ऊंचा पद मिलने से कंपनी की नजर में उनकी छवि काफी अच्छी बन जाती है।

सवाल-जवाब

यह सर्वे किस कंपनी ने जारी किया है?
यह सर्वे इंडीड की तिमाही हायरिंग ट्रैकर रिपोर्ट के आधार पर सामने आया है।
इस सर्वे में कुल कितने लोगों और कंपनियों ने हिस्सा लिया?
इस सर्वे में देश की 1,211 कंपनियां और 2,533 कर्मचारी शामिल हुए थे।
कितने प्रतिशत लोगों ने माना कि उनका पद उनकी सैलरी को नहीं दर्शाता है?
लगभग 10 में से 6 लोगों ने माना कि उनका पद उनकी सैलरी के अनुकूल नहीं है।
सर्वे के अनुसार कितने प्रतिशत कर्मचारी बेहतर पद के बजाय ज्यादा सैलरी चुनेंगे?
52 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि वे नए मौके चुनते समय बेहतर पद के बजाय ज्यादा सैलरी को प्राथमिकता देंगे।
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