नीदरलैंड्स के एमस्टर्डम में खेले जाने वाले आगामी विश्व कप ग्रुप मुकाबले से ठीक पहले भारतीय हॉकी के दिग्गज और अनुभवी गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि भारतीय टीम ने खेल के उन पहलुओं में जबरदस्त सुधार कर लिया है जिनकी वजह से अतीत में पाकिस्तान के खिलाफ कई बार भारी नुकसान उठाना पड़ता था। उन्होंने साफ किया कि अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और भारतीय खिलाड़ी अपने इस चिर-प्रतिद्वंद्वी से निपटने के लिए बेहद मजबूत स्थिति में हैं।
फिटनेस और रणनीतिक बदलाव का असर
दो बार के ओलंपिक कांस्य पदक विजेता पीआर श्रीजेश का मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबलों की पुरानी तीव्रता और तनाव का स्वरूप अब काफी बदल चुका है। उनके अनुसार, भारतीय टीम ने अपनी शारीरिक फिटनेस, ताकत, खेल की समझ और मैदान पर सही समय पर निर्णय लेने की क्षमता में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने जियोस्टार को दिए गए अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले अब पहले की तरह बेहद पेचीदा और मुश्किल नहीं रह गए हैं। अतीत में मैच के आखिरी क्षणों या अंतिम क्वार्टर में गोल गंवा बैठना भारतीय टीम की एक बड़ी कमजोरी हुआ करती थी, लेकिन मौजूदा समय में परिदृश्य बिल्कुल उलट है और अब भारतीय टीम ही मुकाबले के अंतिम पलों में गोल दागकर जीत अपने नाम करती है।
चार-क्वार्टर फॉर्मेट और पुरानी कमियों से पार
पूर्व भारतीय गोलकीपर ने इस बात पर भी रोशनी डाली कि खेल के नियमों में हुए बदलावों ने किस तरह से टीम की किस्मत बदलने में मदद की है। पारंपरिक 35 मिनट के हाफ वाले प्रारूप के दौर में अक्सर थकान या अंतिम पलों में गलत निर्णय लेने के कारण गलतियां हो जाती थीं और विपक्षी टीम को गोल करने का मौका मिल जाता था। लेकिन जब से चार-क्वार्टर प्रणाली को अपनाया गया है, और उससे भी पहले से, टीम प्रबंधन ने फिटनेस और सामरिक कौशल पर विशेष जोर दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान की टीम में आज भी कुछ हद तक मुकाबला करने की क्षमता मौजूद है, लेकिन उनकी वर्तमान टीम का समग्र स्तर पहले जैसा नहीं रहा है, जबकि अतीत में दोनों टीमों के बीच के मुकाबले हमेशा बेहद करीबी होते थे और अक्सर स्कोर 1-0 या 2-1 पर ही सिमट जाता था।
यूरोपीय टीमों से मुकाबले के लिए अनुशासन जरूरी
पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबलों के अलावा श्रीजेश ने विश्व कप में यूरोप की मजबूत टीमों का सामना करने को लेकर भी अहम सलाह दी है। उनका कहना है कि वैश्विक मंच पर बेहतर प्रदर्शन के लिए भारतीय टीम को रक्षात्मक मोर्चे पर बेहद अनुशासित रहना होगा। पिछले करीब डेढ़ साल से भारतीय पुरुष हॉकी टीम एक नई रणनीति के तहत मैदान पर उतर रही है, जिसकी वजह से कई बार खिलाड़ियों को जरूरत से ज्यादा डिफेंसिव रुख अपनाना पड़ता है। हालांकि हाल ही में समाप्त हुई प्रो लीग के दौरान टीम ने कई मैचों में आक्रामक रुख अपनाकर कड़ी चुनौती भी पेश की है।
आक्रामकता और डिफेंस के बीच संतुलन
पूर्व कप्तान ने इस बात पर जोर दिया कि यूरोपीय प्रतिद्वंद्वियों से पार पाने के लिए डिफेंस की मजबूती और अपनी स्वाभाविक आक्रामक शैली के बीच सही तालमेल बिठाना बेहद जरूरी है। जोनल मार्किंग के मामले में उन्होंने माना कि टीम को अपनी समझ और आपसी तालमेल को और अधिक बेहतर बनाने की आवश्यकता है। उनके मुताबिक, मैदान पर अत्यधिक पीछे हटने के बजाय खिलाड़ियों को आक्रामक रुख अपनाते हुए सेंटर लाइन से भी आगे बढ़कर उच्च दबाव बनाने की रणनीति पर काम करना चाहिए ताकि विरोधी टीम पर शुरुआत से ही शिकंजा कसा जा सके।


















