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मुरझाते तुलसी के पौधे में नई जान फूंकने के घरेलू नुस्खे, इन आसान तरीकों से फिर से घना होगा पौधाजीवनशैली
1 अक्तू॰ 2026, 12:40 pm (28 दिन पहले)· 3

मुरझाते तुलसी के पौधे में नई जान फूंकने के घरेलू नुस्खे, इन आसान तरीकों से फिर से घना होगा पौधा

अगर घर में लगा तुलसी का पौधा सूखने लगा है तो सही गुड़ाई, नीम, आलू के छिलकों के पानी और पीली सरसों के इस्तेमाल से उसे फिर से हरा-भरा और घना बनाया जा सकता है।

घर के आंगन या बालकनी में लगा तुलसी का पौधा हरा-भरा रहे और लंबे समय तक फलता-फूलता रहे, इसके लिए नियमित और सही देखभाल की जरूरत पड़ती है। अक्सर थोड़ी सी भी लापरवाही या मौसम के असर से तुलसी का पौधा मुरझाने और सूखने लगता है। कई बार लोग यह समझ नहीं पाते कि पौधे में पानी की कमी हो गई है, धूप कम मिल रही है या जरूरत से ज्यादा पानी पड़ रहा है। गमले की मिट्टी में बहुत ज्यादा नमी जमा रहने से भी जड़ें प्रभावित होती हैं और पत्तियां सूखने लगती हैं। ऐसी स्थिति में सबसे पहले पौधे के चारों तरफ की मिट्टी की गहरी गुड़ाई करनी चाहिए। इसके बाद मिट्टी में थोड़ी सी बालू मिलाकर वापस गमले में भर दें। बालू मिलाने से मिट्टी का जमाव हल्का होता है, जलनिकासी सुधरती है और पौधा फिर से नई पत्तियां निकालने लगता है। इसके साथ ही रसोई में मौजूद कुछ साधारण चीजों से तैयार प्राकृतिक उपचार सूखते पौधे को फिर से जीवंत कर सकते हैं।

फंगल संक्रमण हटाने और सुरक्षा के लिए नीम के उपाय

अगर तुलसी का पौधा सूख रहा है या कीड़ों और फंगस की चपेट में आ गया है, तो नीम एक असरदार उपाय साबित होता है। नीम के सूखे पत्तों को पीसकर पाउडर बना लें और उसे गमले की मिट्टी में जड़ों के पास डाल दें। अगर पाउडर उपलब्ध न हो, तो नीम की ताजी हरी पत्तियों को हल्का सा क्रश करके भी मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इससे कुछ ही दिनों के भीतर पौधे में सुधार दिखने लगता है। फंगल इंफेक्शन की गंभीर स्थिति में नीम की खली का उपयोग करना या नीम के पत्तों को पानी में उबालकर तैयार अर्क पौधे की जड़ों में डालना बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा नीम के तेल को पानी में मिलाकर पौधे की पत्तियों और तने पर छिड़काव करने से भी कीट और फंगस पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।

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कच्चे आलू के छिलकों से तैयार तरल पोषण

तुलसी के पौधे की हरी पत्तियों को बनाए रखने और नई शाखाओं के विकास के लिए घर पर तैयार जैविक खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। कच्चे आलू के छिलकों से यह पोषण आसानी से तैयार होता है। इसके लिए लगभग 250 ग्राम कच्चे आलू के छिलके लें और उन्हें 1 लीटर पानी में रातभर के लिए भिगोकर रख दें। रातभर भीगने के बाद छिलकों के पोषक तत्व पानी में घुल जाते हैं। सुबह इस पानी से छिलकों को छानकर अलग निकाल लें। अब इस पोषक तरल पानी को तुलसी के गमले की मिट्टी में डाल दें। यह तरल खाद तुलसी के साथ-साथ घर के अन्य पौधों के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है।

नाइट्रोजन के लिए पीली सरसों का इस्तेमाल

किसी भी पौधे की तेज और घनी वृद्धि के लिए पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन बेहद जरूरी तत्व होता है। नाइट्रोजन की सही खुराक मिलने से पौधे में तेजी से नई शाखाएं फूटती हैं और पत्तियां हरी-भरी रहती हैं। तुलसी के लिए प्राकृतिक नाइट्रोजन खाद तैयार करने का सबसे सरल साधन पीली सरसों है। पीली सरसों के दानों को मिक्सी या ओखली में दरदरा पीस लें। इस दरदरे चूर्ण को तुलसी के पौधे की जड़ों के आसपास की मिट्टी में डालकर अच्छी तरह मिला दें। यह प्राकृतिक खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर पौधे को तेजी से बढ़ने में मदद करती है, जिससे पौधा खूब फैलकर घना हो जाता है।

सवाल-जवाब

तुलसी के पौधे में ज्यादा नमी होने पर क्या करना चाहिए?
गमले की मिट्टी की गहरी गुड़ाई करें और उसमें थोड़ी बालू मिलाकर वापस मिट्टी भर दें, जिससे जलनिकासी बेहतर हो जाए।
फंगल इंफेक्शन होने पर तुलसी के पौधे में क्या डालें?
नीम की खली, नीम के पत्तों का पानी या नीम की पत्तियों का पाउडर जड़ों में डालें और पत्तियों पर नीम के तेल का स्प्रे करें।
तुलसी के लिए आलू की खाद कैसे तैयार की जाती है?
करीब 250 ग्राम कच्चे आलू के छिलकों को 1 लीटर पानी में रातभर भिगोकर रखें और सुबह छानकर वह पानी पौधे में डालें।
तुलसी के पौधे को घना बनाने के लिए पीली सरसों का उपयोग कैसे करें?
पीली सरसों को दरदरा पीस लें और इस पाउडर को पौधे की जड़ों के पास मिट्टी में मिलाकर छोड़ दें।
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