देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने हालिया आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक द्वारा जारी एमएसएमई आउटलुक सर्वे के चौथे संस्करण के ताजा आंकड़े बताते हैं कि पिछली तिमाही की तुलना में कारोबारी धारणा में हल्की नरमी जरूर दर्ज की गई है, लेकिन आने वाले महीनों और वित्तीय वर्ष को लेकर उद्यमियों का भरोसा काफी मजबूत बना हुआ है। यह विस्तृत अध्ययन विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्र से जुड़ी 1,200 इकाइयों से मिले जमीनी जवाबों पर आधारित है, जो भारत के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों और विभिन्न उद्योगों का सटीक प्रतिनिधित्व करती हैं। इस रिपोर्ट का प्राथमिक उद्देश्य दो मुख्य संकेतकों एमएसएमई बिजनेस कंडीशंस इंडेक्स और एमएसएमई बिजनेस एक्सपेक्टेशंस इंडेक्स के माध्यम से इस सेक्टर में मौजूद महत्वपूर्ण डेटा की कमी को पूरा करना है।
सर्वेक्षण के तहत दोनों सूचकांकों को शून्य से 100 के पैमाने पर मापा जाता है, जिसमें 50 से ऊपर का स्तर सकारात्मक कारोबारी माहौल और विश्वास को दर्शाता है। यह मूल्यांकन कुल छह प्रमुख पैमानों पर आधारित है, जिनमें कुल बिक्री, शुद्ध मुनाफा मार्जिन, कुशल कामगारों की उपलब्धता, कार्यशील पूंजी तथा समग्र वित्तीय संसाधनों तक पहुंच, और सामान्य कारोबारी स्थिति शामिल हैं। इसके अलावा अध्ययन में क्षमता उपयोग, पूंजीगत व्यय, उधारी की लागत और कारोबार में सुगमता के रुझानों पर भी पैनी नजर रखी गई है।
कारोबारी धारणा सूचकांक और आने वाली तिमाहियों का परिदृश्य
जुलाई से सितंबर 2025 तिमाही के दौरान समग्र बिजनेस कंडीशंस इंडेक्स घटकर 61.64 पर आ गया, जो इससे ठीक पिछली तिमाही में 63.75 पर दर्ज किया गया था। इस सूचकांक में आई गिरावट छोटे कारोबारियों की धारणा में हल्की मंदी को दर्शाती है। जहां विनिर्माण और सेवा क्षेत्र ने इस दौरान निरंतर आशावाद बनाए रखा, वहीं व्यापार यानी ट्रेडिंग सेगमेंट में तुलनात्मक रूप से अधिक उतार-चढ़ाव देखा गया।
इसके विपरीत भविष्य की संभावनाओं को मापने वाले बिजनेस एक्सपेक्टेशंस इंडेक्स के आंकड़े खासे उत्साहजनक हैं। यह सूचकांक अक्टूबर से दिसंबर 2025 तिमाही में बढ़कर 62.26 तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि जुलाई से सितंबर 2026 तक इसके 66.57 के स्तर पर पहुंच जाने की उम्मीद जताई गई है। आने वाले समय को लेकर यह तेजी मुख्य रूप से घरेलू बाजार में बढ़ती उपभोक्ता मांग और कई उत्पादों तथा सेवाओं पर हाल में घटाई गई जीएसटी दरों जैसे नीतिगत सरकारी समर्थन के दम पर देखी जा रही है।
बिक्री के आंकड़े, निर्यात में सुधार की उम्मीद और मुनाफे का रुझान
जुलाई से सितंबर 2025 की अवधि में बिक्री को लेकर कारोबारी धारणा में मध्यम स्तर की गिरावट दर्ज की गई। ट्रेडिंग से जुड़े 50 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र के 47 प्रतिशत उद्यमों ने इस दौरान बिक्री में वृद्धि की बात कही, जो पिछली तिमाही के मुकाबले थोड़ी कम रही। हालांकि सेवा क्षेत्र ने इस अवधि में भी अपना प्रदर्शन स्थिर बनाए रखा। आने वाले समय में अधिकांश उद्यम त्योहारी सीजन के चलते अपने राजस्व में जोरदार उछाल आने की उम्मीद संजोए हुए हैं।
वैश्विक स्तर पर मांग के धीमे रहने के कारण निर्यात के मोर्चे पर अस्थाई कमजोरी देखने को मिली, जहां इस तिमाही में केवल 43 प्रतिशत कंपनियों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इसके बावजूद 56 प्रतिशत फर्मों का मानना है कि वैश्विक मांग में स्थिरता आने पर अगले साल तक निर्यात में ठोस सुधार होगा। बिक्री में सुस्ती के बावजूद उद्यमों की वित्तीय मजबूती बरकरार रही, जहां लगभग पांच में से एक एमएसएमई ने अपने लाभ मार्जिन में सुधार दर्ज किया, जबकि केवल 15 से 20 प्रतिशत इकाइयों ने ही अपनी कमाई पर किसी तरह का दबाव महसूस किया।
लागत का दबाव, उधारी दरें और ऋण तक पहुंच की स्थिति
थोक महंगाई दर के नियंत्रित रहने से विनिर्माण और ट्रेडिंग से जुड़े उद्यमों के लिए लागत का दबाव काफी हद तक कम हुआ है, जबकि सेवा क्षेत्र में इनपुट लागत स्थिर बनी रही। वित्तपोषण की लागत के मामले में भी राहत भरे संकेत मिले हैं। विनिर्माण क्षेत्र में ऊंची ब्याज दरों की बात कहने वाले कारोबारियों का अनुपात 41 प्रतिशत से घटकर 33 प्रतिशत पर आ गया है। हालांकि भविष्य में उधारी लागत को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, क्योंकि कई कारोबारियों का अनुमान है कि अल्पावधि में ब्याज दरें ऊंची बनी रह सकती हैं।
ऋण की उपलब्धता के मोर्चे पर मिश्रित परिणाम सामने आए हैं। विनिर्माण क्षेत्र में ऋण तक पहुंच रखने वाले उद्यमों की संख्या 88 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत हो गई, यद्यपि कुछ इकाइयों ने इसे अपनी जरूरतों के हिसाब से अपर्याप्त बताया। इसके विपरीत सेवा क्षेत्र में 19 प्रतिशत उद्यमों ने वित्त जुटाने में कठिनाई की सूचना दी, जो पिछली तिमाही में 13 प्रतिशत थी। इसके बावजूद एमएसएमई ऋण को बढ़ावा देने के लिए की गई सरकारी पहलों के कारण वित्त की उपलब्धता को लेकर समग्र धारणा सकारात्मक बनी हुई है।
कुशल श्रम, क्षमता विस्तार और कारोबार में सुगमता के बदलते मानक
सर्वेक्षण के पहले संस्करण से लेकर अब तक सभी क्षेत्रों में कुशल श्रम की उपलब्धता में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि आगे चलकर इस सुधार की गति धीमी पड़ने या स्थिर होने की संभावना है, क्योंकि कई कंपनियां अब भी प्रशिक्षित श्रमिकों को खोजने में कठिनाई का सामना कर रही हैं।
क्षमता उपयोग के मामले में उद्योगों से मजबूत संकेत मिल रहे हैं। विनिर्माण क्षेत्र में सामान्य से अधिक क्षमता उपयोग की रिपोर्ट करने वाली कंपनियां 21 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत हो गईं, और अगले वर्ष तक इसके 36 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। सेवा क्षेत्र में भी क्षमता उपयोग 20 प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत होने की उम्मीद है। इसी दीर्घकालिक भरोसे के चलते 42 प्रतिशत विनिर्माताओं और 35 प्रतिशत सेवा प्रदाताओं ने इस तिमाही नई क्षमता जोड़ी है, जबकि अगले साल और भी अधिक इकाइयां विस्तार की योजना बना रही हैं।
बकाए के भुगतान यानी देनदार वसूली की समयसीमा अब भी एक चुनौती बनी हुई है, लेकिन अधिकांश इकाइयां इसमें क्रमिक सुधार की उम्मीद कर रही हैं। सेवा और व्यापार क्षेत्र आने वाले समय में बेहतर वसूली अवधि की उम्मीद कर रहे हैं, हालांकि विनिर्माण फर्मों को पहले की तुलना में अभी भी भुगतान में देरी का सामना करना पड़ रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत अनुमतियों, बिजली आपूर्ति, विनियामक अनुपालन और कारोबारी माहौल में व्यापक सुधार देखा गया है, जिसे लेकर 60 प्रतिशत से अधिक उद्यम अगले साल और प्रगति की उम्मीद रखते हैं। इसके साथ ही अध्ययन ने गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के प्रभाव का भी उल्लेख किया है, जिनकी अनुपालन आवश्यकताओं ने व्यापार और विनिर्माण की कुछ फर्मों के परिचालन खर्च और समय में बढ़ोतरी की है।
















