त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में मेवों की मांग काफी बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाकर कई कारोबारी घटिया और मिलावटी सूखे मेवे बेचने लगते हैं। सेहत को तंदुरुस्त रखने के लिए लोग भारी कीमत चुकाकर बादाम खरीदते हैं, ताकि हृदय, पेट और त्वचा को पोषण मिल सके। लेकिन अगर वही बादाम मिलावटी या नकली निकलें, तो शरीर को पोषण मिलने के बजाय भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बाजारों में पुराने बासी बादाम को ताजा दिखाने के लिए रसायनों का सहारा लिया जा रहा है, और यहां तक कि प्लास्टिक निर्मित नकली बादाम बेचे जाने के मामले भी सामने आते हैं। ऐसी स्थिति में खरीदारों को सचेत रहने की जरूरत है, ताकि वे अपनी रसोई में आने वाले बादाम की शुद्धता आसानी से परख सकें।
रंग की बनावट और हथेली पर रगड़कर करें पहली जांच
असली और नकली बादाम का फर्क समझने का सबसे सीधा उपाय उसका बाहरी रंग और चमक है। प्राकृतिक रूप से तैयार असली बादाम का छिलका हल्का भूरा होता है और उसमें कोई कृत्रिम चमक नहीं होती। इसके विपरीत, पुराने पड़े बादाम को नया रूप देने और चमकाने के लिए अक्सर हाइड्रोजन परॉक्साइड जैसे हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा उन पर गहरे लाल या भूरे रंग की पॉलिश चढ़ाई जाती है। जब आप बादाम को अपनी हथेली पर रखकर थोड़ी देर जोर से रगड़ते हैं, तो मिलावटी बादाम से कृत्रिम पाउडर या रंग छूटकर त्वचा पर लगने लगता है। असली बादाम को कितना भी रगड़ा जाए, उससे कभी कोई रासायनिक रंग नहीं निकलता।
पानी में भिगोने पर सामने आती है छिलके और पानी की सच्चाई
घरों में बादाम को रातभर पानी में भिगोकर खाने का पुराना चलन है, और यह तरीका उसकी शुद्धता जांचने की सबसे बेहतरीन कसौटी भी है। जब प्राकृतिक बादाम को रातभर भिगोया जाता है, तो सुबह उसका छिलका बेहद आसानी से उतर जाता है और अंदर का दाना बिल्कुल सफेद या हल्के क्रीमी रंग का निकलता है। वहीं नकली या केमिकल से उपचारित बादाम का छिलका आसानी से नहीं छूटता और अंदर की गिरी का रंग पीला या असामान्य दिख सकता है। इसके साथ ही, यदि बादाम पर रासायनिक रंग चढ़ा होगा, तो भिगोने के बाद कटोरी का पानी अपना रंग बदल देगा। शुद्ध बादाम वजनदार होकर पानी में नीचे बैठ जाते हैं, जबकि प्लास्टिक या हल्के नकली बादाम पानी की सतह पर तैरने लगते हैं।
सफेद कागज और प्राकृतिक तेल का आसान परीक्षण
शुद्ध मेवों के भीतर प्राकृतिक तेल मौजूद होता है, जो सेहत के लिए सबसे जरूरी माना जाता है। इस तेल की मौजूदगी जांचने के लिए बादाम को एक सादे सफेद कागज में लपेटकर हल्के हाथों से दबाएं। यदि दाना असली है, तो कागज पर प्राकृतिक तेल का हल्का सा पारदर्शी धब्बा छूट जाएगा। वहीं अगर कागज पर भूरा या लाल रासायनिक रंग लगने लगे, तो यह साफ संकेत है कि बादाम पर कृत्रिम कोटिंग की गई है। इसके अलावा बादाम को हल्का सा तोड़कर हथेली के बीच दबाने पर भी असली गिरी से तेल की नमी महसूस होती है, जबकि नकली गिरी में ऐसा कोई गुण नहीं दिखता।
स्वाद, महक और जलाने पर गंध की परख
बादाम की पहचान उसकी प्राकृतिक खुशबू और स्वाद से भी आसानी से हो जाती है। असली बादाम चबाने पर हल्का सा मीठा स्वाद और स्वाभाविक सौंधी खुशबू देता है। दूसरी तरफ मिलावटी या खराब हो चुके बादाम मुंह में कड़वाहट छोड़ते हैं और उनसे अजीब सी बासी दुर्गंध आती है। यदि संदेह गहरा हो, तो एक दाने को आग में जलाकर भी देखा जा सकता है। आग की चपेट में आने पर नकली या प्लास्टिक वाले बादाम से रासायनिक धुंआ और तेज गंध उठने लगती है, जबकि प्राकृतिक बादाम जलने पर अपने भीतर मौजूद तेल को धीरे-धीरे छोड़ता है और सामान्य रूप से सुलगता है।



















