रसोई घरों में रोजाना बनने वाली चाय, सब्जियों, दालों और विभिन्न गरम मसाला मिश्रणों में काली मिर्च एक अनिवार्य हिस्सा मानी जाती है। भोजन का स्वाद बढ़ाने के अलावा घरेलू नुस्खों में भी इसका नियमित प्रयोग होता है। ऐसे में जब रोजमर्रा के इस बुनियादी मसाले में मिलावट का मामला सामने आता है, तो आम उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी हो जाती हैं। गाजियाबाद में कथित तौर पर गोंद और मैदा मिलाकर नकली काली मिर्च तैयार करने वाली एक अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ है। इस खुलासे के बाद बाजार से काली मिर्च की खरीदारी करते समय हर ग्राहक को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है ताकि नकली और हानिकारक सामान की जगह केवल शुद्ध उत्पाद ही घर पहुंचे।
दानों की बनावट और बाहरी सतह की सावधानी से जांच
काली मिर्च की असल पहचान उसके दानों की प्राकृतिक संरचना से भलीभांति की जा सकती है। जब काली मिर्च स्वाभाविक रूप से सूखती है, तो उसके दाने एक समान गोल नहीं रहते बल्कि उनकी बाहरी सतह स्वाभाविक रूप से खुरदरी, झुर्रीदार और हल्की सी अंदर की तरफ धंसी हुई दिखती है। अगर बाजार में मिलने वाले दानों की बनावट असामान्य रूप से बिल्कुल चिकनी नजर आए या फिर सारे के सारे दाने मशीन से तराशे हुए एक ही नाप और आकार के दिखें, तो यह मिलावट का बड़ा संकेत हो सकता है। प्राकृतिक उपज में हमेशा दानों के आकार और सतह में थोड़ा फर्क देखने को मिलता है, इसलिए अत्यधिक पॉलिश या चिकने दिखने वाले दानों पर तुरंत संदेह करना चाहिए।
कुचलने पर मिलने वाली प्राकृतिक खुशबू और तीखापन
असली काली मिर्च की एक और सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वाभाविक तीखी और विशिष्ट महक होती है। जब भी काली मिर्च के किसी दाने को हाथ या किसी कठोर चीज से कुचला जाता है, तो उसमें से तुरंत एक बेहद साफ, तेज और प्राकृतिक सुगंध निकलती है जो सीधे नाक तक पहुंचती है। यदि दाने को मसलने या तोड़ने के बाद उसमें से किसी भी प्रकार की गंध न आए, महक बेहद हल्की महसूस हो या फिर कोई अजीब सी रासायनिक बदबू मिले, तो उस सामग्री की शुद्धता संदिग्ध मानी जानी चाहिए। असली मसाले की खुशबू को कृत्रिम तौर पर पूरी तरह हूबहू तैयार करना बेहद मुश्किल होता है।
चखकर परखने के खतरे और पैकेजिंग की बारीकियां
अक्सर लोग दुकानों पर किसी भी मसाले की शुद्धता जांचने के लिए उसे तुरंत मुंह में डालकर चखने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह आदत स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। अगर काली मिर्च में मैदा, अखाद्य गोंद या किसी अन्य हानिकारक तत्व की मिलावट की गई है, तो उसे कच्चा चखने से पेट संबंधी समस्याएं या अन्य स्वास्थ्य विकार हो सकते हैं। इसलिए केवल जीभ के स्वाद पर निर्भर रहने के बजाय अन्य भौतिक तरीकों से ही जांच करनी चाहिए। इसके अलावा जब भी पैकेटबंद काली मिर्च खरीदी जाए, तो पैकेट की सील बंद स्थिति, पैकेजिंग की सही तारीख, बैच नंबर, इस्तेमाल की गई सामग्री की सूची और आधिकारिक फूड सेफ्टी मानकों से संबंधित जानकारी को गौर से देखना चाहिए। यदि किसी स्थानीय दुकान या स्रोत पर पूरा भरोसा हो, तो कई बार संदिग्ध पैकेटबंद उत्पाद के मुकाबले खुली और साबुत काली मिर्च परखकर खरीदना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
अस्वाभाविक रूप से सस्ती कीमतों से बचें और शिकायत दर्ज कराएं
बाजार में बिकने वाली काली मिर्च का एक तय औसत भाव होता है। यदि कोई विक्रेता प्रचलित बाजार भाव की तुलना में बहुत ही कम दामों पर काली मिर्च बेच रहा हो, तो ग्राहकों को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। असामान्य रूप से भारी छूट या सस्ता दाम अक्सर घटिया या मिलावटी माल खपाने का जरिया होता है। यदि कभी ऐसा लगे कि खरीदी गई काली मिर्च में मिलावट है या उसकी गुणवत्ता खराब है, तो उसका सेवन फौरन बंद कर देना चाहिए। ऐसी स्थिति में खरीदार अपने पास मौजूद उस उत्पाद के नमूने, खरीद की रसीद या बिल और संबंधित दस्तावेजों के साथ नजदीकी खाद्य सुरक्षा विभाग में आधिकारिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं ताकि मिलावटखोरों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।


















