कई बार लोग नर्सरी से बेहद खूबसूरत और हरा-भरा पौधा खरीदकर घर लाते हैं, लेकिन गमले में रोपते ही वह कुछ ही दिनों के भीतर मुरझाने या सूखने लगता है। घर की बालकनी या गार्डन को सजाने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए यह एक बेहद आम और निराश करने वाली समस्या है। पौधे के इस तरह सूख जाने से समय और पैसा दोनों ही बर्बाद होते हैं। इस परेशानी के पीछे पौधों की रोपाई से जुड़ी कुछ बेहद बुनियादी जानकारियों की कमी होती है, जिन्हें लोग अक्सर जल्दबाजी में नजरअंदाज कर देते हैं।
पौधे के मुरझाने की मुख्य वजह और गलत रोपाई
बिहार के जहानाबाद जिले में पिछले 10 वर्षों से नर्सरी का संचालन कर रहे सत्येंद्र नारायण सिंह बताते हैं कि पौधों की सामान्य वृद्धि के लिए सही मिट्टी का होना सबसे अनिवार्य शर्त है। यदि मिट्टी पौधे के अनुकूल नहीं होगी, तो उसकी जड़ें पनप नहीं पाएंगी। अक्सर लोग नर्सरी से अच्छा पौधा खरीद तो लाते हैं, लेकिन घर पर उसे किसी भी प्रकार की मिट्टी में जैसे-तैसे लगाकर ऊपर से पानी डालकर छोड़ देते हैं। इस लापरवाही के कारण न तो पौधे को जरूरी पोषक तत्व मिल पाते हैं और न ही उसकी सही रोपाई हो पाती है। इसके परिणामस्वरूप कुछ ही दिनों में पौधा मुरझा जाता है।
दोमट मिट्टी और जैविक खाद का सही संतुलन
सत्येंद्र नारायण सिंह के अनुसार गमले में पौधा लगाने के लिए हमेशा दोमट मिट्टी का ही इस्तेमाल करना चाहिए। दोमट मिट्टी की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि यह हमेशा मुलायम बनी रहती है। मुलायम मिट्टी पौधों की जड़ों के फैलाव और समग्र विकास में काफी मददगार साबित होती है। इस तरह की मिट्टी आमतौर पर नदियों के किनारे आसानी से मिल जाती है। इसके साथ ही मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में जैविक खाद मिलाना बेहद जरूरी है। जैविक खाद मिट्टी को आवश्यक पोषक तत्वों से समृद्ध रखती है, जिससे पौधे को लगातार पोषण मिलता रहता है। रोपाई से पहले मिट्टी और जैविक खाद को एक साथ अच्छे से मिलाकर रख लेना चाहिए।
गमले में ड्रेनेज और रोपाई की सही विधि
पौधे को गमले में रोपने की प्रक्रिया में जल निकासी का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है। सबसे पहले गमले के निचले हिस्से में एक छोटा सा छेद कर देना चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। इस छेद के ऊपर गिट्टी या पत्थर का एक छोटा टुकड़ा रखें, जिससे मिट्टी बाहर न बहे और पानी धीरे-धीरे निकलता रहे। इसके बाद गमले में खाद मिश्रित मिट्टी भरें और पौधे को बिल्कुल बीचों-बीच लगाएं। पौधा लगाने के बाद मिट्टी को हल्के हाथों से दबाएं ताकि पौधा सीधा स्थिर रह सके।
सिंचाई का सही तरीका और पानी की मात्रा
पौधे को स्वस्थ रखने के लिए सिंचाई की सही तकनीक अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। गमले में समय-समय पर पानी डालते रहें, लेकिन पानी की मात्रा का विशेष ध्यान रखें। गमले में सिर्फ उतना ही पानी डालना चाहिए जितना कि मिट्टी आसानी से सोख सके। यदि गमले के निचले छेद से पानी बाहर निकलने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि पानी आवश्यकता से अधिक हो गया है। अत्यधिक पानी देने से पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं और पौधा खराब हो सकता है। संतुलित सिंचाई और सही मिट्टी के उपयोग से पौधा पूरी तरह स्वस्थ और हरा-भरा बना रहेगा।



















