घर की बालकनी या छत पर ताजे फल उगाने का अलग ही आनंद मिलता है। जब बाजार से चीकू खरीदने के बजाय अपने ही गमले में लगे पौधे से फल मिलने लगते हैं, तो सारी मेहनत सफल हो जाती है। हालांकि, कई लोगों के सामने यह समस्या आती है कि चीकू का पौधा लगाने के बाद या तो उसकी ग्रोथ बहुत धीमी हो जाती है या फिर लंबे समय तक उसमें फल नहीं आते हैं। इसके पीछे गलत पौधे का चयन, बहुत छोटा गमला, अपर्याप्त धूप और जरूरत से ज्यादा पानी देना मुख्य कारण हो सकते हैं। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शुरुआती दौर में पौधे की सही देखभाल की जाए, तो गमले में भी चीकू के पौधे को शानदार तरीके से विकसित किया जा सकता है।
बीज की तुलना में ग्राफ्टेड या एयर-लेयर्ड पौधा लगाना एक बेहतर विकल्प साबित होता है क्योंकि इससे फल मिलने का इंतजार काफी कम हो जाता है। गमले में चीकू उगाने की प्रक्रिया में कुछ छोटी-छोटी लेकिन बेहद जरूरी बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है। आइए जानते हैं कि नर्सरी से पौधा चुनने से लेकर उसकी देखरेख तक का पूरा तरीका क्या है ताकि आपके पौधे पर भी ढेर सारे फल आ सकें।
सबसे पहले सही और स्वस्थ चीकू का पौधा चुनें
अगर आपकी इच्छा जल्द से जल्द फल पाने की है, तो बीज से पौधा तैयार करने के झंझट में पड़ने के बजाय किसी भरोसेमंद नर्सरी से ग्राफ्टेड या एयर-लेयर्ड पौधा खरीदना चाहिए। बीज से उगाए गए चीकू के पौधे को फल देने में कई साल का लंबा समय लग सकता है, जबकि अच्छी किस्म का तैयार पौधा अपेक्षाकृत कम समय में ही फल देने की अवस्था में आ जाता है। जब आप पौधा खरीदने जाएं, तो उसकी पत्तियों का रंग हरा और तना मजबूत होना चाहिए। यदि पत्तियों पर किसी तरह के कीड़े या सफेद दाग दिखाई दें, तो ऐसे पौधे को खरीदने से बचना चाहिए।
गमले का आकार और मिट्टी का सही चुनाव
चीकू का पौधा धीरे-धीरे आकार में बड़ा होता है, इसलिए इसे बहुत छोटे गमले में लंबे समय तक रखना उचित नहीं है। शुरुआत करने के लिए लगभग 12 से 15 इंच का गमला उपयुक्त रहता है। जैसे-जैसे पौधे का विकास हो, उसे जरूरत के अनुसार बड़े गमले में रीपोट कर देना चाहिए। गमले की मिट्टी तैयार करते समय सामान्य मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद मिलाएं और ऐसी सामग्री का उपयोग करें जिससे अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। गमले में जल निकासी के लिए ड्रेनेज होल का होना अनिवार्य है क्योंकि मिट्टी में पानी जमा होने से पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं।
शुरुआती फूल और छोटे फलों को लेकर न दिखाएं जल्दबाजी
अक्सर नर्सरी से लाए गए छोटे चीकू के पौधों में शुरुआत में ही फूल या छोटे फल नजर आने लगते हैं। इन्हें देखकर खुशी होना स्वाभाविक है, लेकिन बहुत छोटे और कमजोर पौधे पर अधिक फल छोड़ देने से उसकी समग्र वृद्धि रुक सकती है। यदि पौधा अभी छोटा है और उसकी शाखाएं पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं हुई हैं, तो शुरुआती फूलों या छोटे फलों को हटा देना ही बेहतर होता है। इससे पौधे की सारी ऊर्जा उसकी जड़ों, मुख्य तने और नई शाखाओं के मजबूत विकास में लगती है।
समय पर प्रूनिंग और धूप की सही व्यवस्था
चीकू के पौधे में समय-समय पर सूखी, कमजोर या आपस में उलझने वाली शाखाओं को छांटते रहना चाहिए। हल्की और सही तरीके से की गई प्रूनिंग से पौधे का आकार नियंत्रण में रहता है और नई शाखाओं के पनपने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। हालांकि, एक साथ बहुत सारी शाखाएं काट देना भी ठीक नहीं है, विशेषकर स्वस्थ और फल देने वाली शाखाओं को बिना किसी वजह के बिल्कुल न हटाएं। इसके अलावा, गमले में रखे चीकू के पौधे के लिए भरपूर रोशनी बहुत जरूरी है। पौधे को ऐसी जगह पर रखें जहां उसे प्रतिदिन कई घंटों तक सीधी धूप मिल सके, क्योंकि कम रोशनी में इसकी ग्रोथ कमजोर हो सकती है।
पानी देने का सही तरीका और जैविक खाद का उपयोग
पौधे को पानी देते समय केवल यह न देखें कि मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी है या नहीं, बल्कि यह भी जांच लें कि नीचे की मिट्टी गीली है या नहीं। यदि अंदर की नमी बनी हुई है, तो तुरंत दोबारा पानी देने की कोई आवश्यकता नहीं है। गर्मियों के मौसम में पानी की जरूरत बढ़ जाती है, जबकि बरसात या सर्दियों के दिनों में पानी देने के अंतराल को बढ़ाना पड़ता है। पौधे की बेहतरीन ग्रोथ के लिए वर्मीकंपोस्ट, अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या अन्य जैविक खादों का इस्तेमाल किया जा सकता है। खाद की मात्रा पौधे की आयु और गमले के आकार के हिसाब से ही तय करें। हर 15 से 20 दिन में खाद देना हर पौधे के लिए जरूरी नहीं होता, इसलिए पौधे की वास्तविक स्थिति और स्वास्थ्य को देखकर ही पोषण दें।
चीकू आने का समय और धैर्य की अहमियत
चीकू के पौधे में फल आने की अवधि उसकी किस्म, उम्र, मौसम, पौधे के स्वास्थ्य और उसकी देखभाल पर पूरी तरह निर्भर करती है। इसलिए यह दावा करना सही नहीं होगा कि हर पौधे में छह महीने के भीतर फल आने लगेंगे। तैयार ग्राफ्टेड या एयर-लेयर्ड पौधे जल्दी फल दे सकते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में धैर्य रखना बहुत जरूरी है। यदि पौधे की पत्तियां हरी-भरी हैं, नई शाखाएं निकल रही हैं और तना मजबूत हो रहा है, तो समझ लीजिए कि पौधा सही दिशा में बढ़ रहा है। पर्याप्त धूप, सही मात्रा में पानी, उचित पोषण और समय पर की जाने वाली छंटाई के साथ गमले में लगा चीकू का पौधा धीरे-धीरे मजबूत होकर आपको मीठे फल देने के लिए तैयार हो जाता है।



















