घर की बालकनी, छत या गार्डन में लगा गुलाब का पौधा जब मुरझाने लगता है, तो आमतौर पर लोग यही मान लेते हैं कि अब यह पूरी तरह नष्ट हो चुका है। इस स्थिति में पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, शाखाएं सूख जाती हैं और फूलों का खिलना बिल्कुल रुक जाता है। कई लोग निराशा में पौधे को गमले से उखाड़कर फेंक देते हैं, लेकिन ऐसा कदम उठाने से पहले उसकी सही ढंग से देखभाल करने का प्रयास करना चाहिए। अक्सर पौधा अंदर से मरा नहीं होता, बल्कि उसे अतिरिक्त देखभाल और उचित पोषण की आवश्यकता होती है। यदि उचित समय पर कुछ आसान कदम उठा लिए जाएं, तो वही मृतप्राय दिखने वाला गुलाब कुछ ही हफ्तों में फिर से लहलहा सकता है और उसमें पहले की तुलना में अधिक संख्या में फूल भी आ सकते हैं।
सूखी और खराब टहनियों की करें छंटाई
गार्डनर राम सागर ने बताया कि यदि गुलाब का पौधा सूखने की कगार पर है, तो सबसे पहला और आवश्यक कदम उसकी सूखी, काली या रोगग्रस्त शाखाओं को काटना है। इस तरह की मृत टहनियां पौधे की ऊर्जा को अनावश्यक रूप से सोखती रहती हैं और नई कोपलों को विकसित होने से रोकती हैं। एक साफ और तेज प्रूनिंग कैंची की मदद से केवल सूखे हुए हिस्सों को अलग करें। इस प्रक्रिया के दौरान यह सावधानी बरतें कि पौधे की स्वस्थ और हरी टहनियों को कोई क्षति न पहुंचे। प्रूनिंग के बाद पौधे में नई ग्रोथ शुरू होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।
सख्त मिट्टी को ढीला कर डालें खाद
कई बार पौधे के सूखने का मुख्य कारण गमले की मिट्टी का अत्यधिक सख्त हो जाना होता है। ऐसी संघनित मिट्टी में पानी और हवा का संचार जड़ों तक सुचारू रूप से नहीं हो पाता है। इसलिए किसी छोटे बागवानी उपकरण या लकड़ी की सहायता से गमले की मिट्टी को बहुत सावधानी से हल्का-हल्का खोदकर ढीला करना चाहिए। इसके पश्चात उसमें अच्छी तरह से डीकंपोज हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का मिश्रण मिला देना चाहिए। इस उपाय से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और जड़ों को ऊर्जावान पोषण प्राप्त होता है। यदि मिट्टी बहुत पुरानी और निष्प्राण हो चुकी है, तो गमले के ऊपरी हिस्से की कुछ मिट्टी निकालकर उसकी जगह ताजा मिट्टी भी भरी जा सकती है।
गुलाब में जरूरत से ज्यादा पानी न दें
जब गुलाब का पौधा कमजोर होने लगता है, तो कई लोग अत्यधिक मात्रा में पानी डालना शुरू कर देते हैं, जो कि सबसे बड़ी भूल साबित होती है। आवश्यकता से अधिक जलभराव होने पर जड़ें गलने लगती हैं और पौधा और अधिक दुर्बल हो जाता है। हमेशा गमले की मिट्टी की नमी की जांच करने के बाद ही पानी दें। जब ऊपरी सतह की मिट्टी सूखी नजर आए, तभी उसमें सिंचाई करें। विशेष तौर पर बरसात के दिनों में पानी का प्रयोग बहुत कम करना चाहिए क्योंकि इस मौसम में मिट्टी में नमी प्राकृतिक रूप से बनी रहती है।
रोज 5 से 6 घंटे की धूप है जरूरी
गुलाब एक ऐसा सूर्यप्रेमी पौधा है जिसे स्वस्थ रहने के लिए भरपूर धूप की आवश्यकता होती है। यदि इसे लंबे समय तक छायादार स्थान पर रखा जाए, तो इसका विकास अवरुद्ध हो जाता है और फूलों का उत्पादन भी कम हो जाता है। हमेशा यह प्रयास करें कि पौधे को प्रतिदिन कम से कम पांच से छह घंटे की धूप अवश्य मिले। इसके साथ ही इसे ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां हवा का आवागमन भी उत्तम हो। इन परिस्थितियों से पौधा तेजी से अपनी रिकवरी करता है और उस पर फंगस या अन्य बीमारियों का खतरा भी न्यूनतम हो जाता है.



















