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पहाड़ों का सुकून जब सन्नाटा बन गया, 21 हजार रुपये के बजट में मनाली बसे दिल्ली के अजय शर्मा 70 दिन में क्यों लौटे वापसजीवनशैली
21 अग॰ 2026, 6:50 pm (22 दिन पहले)· 2

पहाड़ों का सुकून जब सन्नाटा बन गया, 21 हजार रुपये के बजट में मनाली बसे दिल्ली के अजय शर्मा 70 दिन में क्यों लौटे वापस

दिल्ली के अजय शर्मा ने शहर का शोर छोड़कर मनाली के सियाल गांव में 21,000 रुपये के महीने के खर्च पर रहना शुरू किया था, लेकिन रिमोट वर्क, बारिश और अकेलेपन की वजह से 70 दिन में दिल्ली लौट आए।

मेट्रो शहरों में काम करने वाले कई नौकरीपेशा लोगों का सपना होता है कि वे कंक्रीट के जंगल और भागदौड़ भरी जिंदगी को छोड़कर पहाड़ों की शांत वादियों में स्थायी रूप से बस जाएं। दिल्ली के रहने वाले अजय शर्मा ने भी अपनी जिंदगी के इस बड़े सपने को सच करने का फैसला किया। इसी साल मई के महीने में वे दिल्ली की आपाधापी से दूर हिमाचल प्रदेश में मनाली के करीब स्थित सियाल गांव पहुंचे। उनका इरादा एक पर्यटक की तरह कुछ दिन बिताने का नहीं, बल्कि वहां के स्थानीय निवासी की तरह रचने-बसने का था। हालांकि, पहाड़ों की जिस खामोशी को वे सुकून मानकर गए थे, वही खामोशी कुछ ही हफ्तों में भारी सन्नाटे में बदल गई। नतीजा यह हुआ कि महज 70 दिन बिताने के बाद अगस्त में वे वापस दिल्ली की भीड़भाड़ में लौट आए। सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि पहाड़ों पर रहने का सपना और वहां की व्यावहारिक सच्चाई एक-दूसरे से काफी अलग हैं।

मनाली में आशियाना और 21 हजार रुपये के मासिक खर्च का गणित

अजय शर्मा ने जब पहाड़ों में शिफ्ट होने की योजना बनाई, तो उन्होंने अपने खर्चों को बहुत ही सीमित और अनुशासित रखा। वे सियाल गांव में एक किराए के मकान में रहने लगे ताकि वहां की ग्रामीण जिंदगी को करीब से महसूस कर सकें। मनाली में उनके रहने-खाने का कुल मासिक खर्च 21,000 रुपये से ज्यादा नहीं बैठता था। उन्होंने एक कमरे का फ्लैट किराए पर लिया था, जिसके लिए वे हर महीने 14,000 रुपये चुकाते थे। इस 14,000 रुपये के किराए में बिजली और वाईफाई की सुविधा भी शामिल थी।

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खान-पान की बात करें तो अजय ज्यादातर खाना घर पर ही खुद तैयार करते थे। इसके चलते उनका महीनेभर का राशन और ग्रोसरी का खर्च मात्र 3,500 रुपये आता था। अपने पूरे प्रवास के दौरान उन्होंने सिर्फ एक दिन बाहर रेस्टोरेंट में खाना खाया, जिसका बिल 500 रुपये बना था। अपनी सेहत और फिटनेस बनाए रखने के लिए उन्होंने गांव के पास ही एक स्थानीय जिम की सदस्यता ली थी, जिसका मासिक शुल्क 1,500 रुपये था। इतने कम बजट में रहने के बावजूद वे वहां ज्यादा समय तक नहीं टिक सके।

55 वीडियो में कैद हुआ 70 दिनों का अनुभव

मनाली के इस प्रवास के दौरान अजय शर्मा (जिन्हें संदर्भों में अरुण शर्मा के नाम से भी जाना गया) ने अपने हर पल को कैमरे में दर्ज किया। उन्होंने कुल 55 वीडियो बनाकर अपने पूरे अनुभव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा किया। उनका मुख्य उद्देश्य यह जानना और लोगों को बताना था कि जिस मनाली की खूबसूरती को देखने हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक आते हैं, वहां स्थायी रूप से रहना क्या वाकई उतना ही खुशनुमा होता है जितना छुट्टियों में लगता है। लेकिन महज 2 महीने पूरे होते-होते उनका मन वहां से भर गया और वे राजधानी वापस लौटने को मजबूर हो गए।

रिमोट वर्क, नेटवर्क और बारिश की बड़ी चुनौतियां

पहाड़ों पर रहने के दौरान अजय को जिन व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ा, उनमें सबसे पहली और प्रमुख वजह नेटवर्क की थी। अजय रिमोट वर्किंग करते थे और अपने काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए उन्हें एक तेज और स्थिर इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत थी। सियाल गांव में उन्हें लगातार अच्छे इंटरनेट की समस्या झेलनी पड़ी, जिससे उनके पेशेवर काम में बाधा आने लगी।

इसके अलावा मानसून के मौसम में पहाड़ों का मौसम और वहां का भूगोल सबसे बड़ा रोड़ा बनकर सामने आया। पहाड़ों पर अचानक होने वाली मूसलाधार बारिश ने उनके दैनिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। बारिश की वजह से सड़कें खराब हो जाती थीं और रास्ते बंद हो जाते थे। साथ ही घंटों तक बिजली गुल रहना और इंटरनेट पूरी तरह ठप हो जाना आम बात बन गई थी। मानसून में सड़कों की बदहाली के कारण कहीं भी आना-जाना किसी जोखिम से कम नहीं रह गया था।

अकेलापन और सन्नाटे से भरा जीवन

भौतिक सुविधाओं के अलावा मानसिक स्तर पर अकेलापन अजय के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुआ। वे मनाली में अकेले रह रहे थे, जिसके कारण सुबह का नाश्ता बनाने से लेकर रात के खाने, बर्तन धोने, कमरे की सफाई और अपने ऑफिस का काम संभालने की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी।

दिल्ली जैसे शहर में जहां दिन-रात गाड़ियों की आवाजें और चहल-पहल रहती है, वहीं मनाली के गांव में छाने वाली शांति शुरुआत में तो बहुत लुभाती थी, लेकिन धीरे-धीरे वही शांति एक नीरस सन्नाटे में बदलने लगी। रोजमर्रा के कामों के बीच बात करने के लिए अपनों का न होना और लगातार बने रहने वाले सन्नाटे ने उनकी जिंदगी को उबाऊ बना दिया।

सपने और सच्चाई का फर्क, अब बीच लाइफ का अनुभव

दिल्ली लौटने के बाद अजय शर्मा ने सोशल मीडिया पर अपनी पूरी कहानी साझा करते हुए लोगों को ख्वाब और हकीकत के बीच का अंतर समझाया। उनका कहना है कि पहाड़ों पर 4 दिन की छुट्टी बिताना और वहां सालभर रहना दो बिल्कुल अलग बातें हैं। उन्होंने उन सभी लोगों को सचेत किया जो शहरों की भागदौड़ से तंग आकर बिना पूरी तैयारी के पहाड़ों का रुख करने की सोचते हैं। मनाली का अध्याय खत्म करने के बाद अब अजय शर्मा का अगला पड़ाव समुद्र तट यानी बीच लाइफ के माहौल में रहकर वहां की जिंदगी का अनुभव साझा करने का है।

सवाल-जवाब

अजय शर्मा दिल्ली छोड़कर मनाली कब और किस गांव में रहने गए थे?
अजय शर्मा मई के महीने में दिल्ली छोड़कर मनाली के पास स्थित सियाल गांव में रहने गए थे।
मनाली में अजय शर्मा का महीने का कुल कितना खर्च आता था?
मनाली में अजय शर्मा का रहने, खाने, वाईफाई, बिजली और जिम मिलाकर महीने का कुल खर्च लगभग 21,000 रुपये आता था।
मनाली में 1 बेडरूम फ्लैट का किराया कितना था और उसमें क्या शामिल था?
सियाल गांव में 1 बेडरूम फ्लैट का किराया 14,000 रुपये महीना था, जिसमें बिजली और वाईफाई का खर्च भी शामिल था।
अजय शर्मा कितने दिन मनाली में रहे और उन्होंने कितने वीडियो बनाए?
अजय शर्मा मनाली में कुल 70 दिन (लगभग 2 महीने) रहे और उन्होंने अपने अनुभव पर 55 वीडियो बनाए।
मनाली छोड़कर वापस दिल्ली लौटने की मुख्य वजहें क्या थीं?
रिमोट काम के लिए अच्छा इंटरनेट न मिलना, बारिश के दौरान बिजली और रास्ते बंद होना, खराब सड़कें और अकेलेपन की वजह से वे दिल्ली वापस लौट आए।
अजय शर्मा का अगला प्लान क्या है?
मनाली के बाद अजय शर्मा का अगला प्लान बीच यानी समुद्र तट के किनारे की जिंदगी का अनुभव साझा करने का है।
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