भोजन करते समय स्क्रीन से दूरी और सही नियम क्यों हैं पाचन के लिए बेहद जरूरीधीमी विकास दर को धर्म से जोड़ना गलत, आचार्य प्रशांत ने देश में गरीबी के बुनियादी कारण गिनाए26वें आईफा अवार्ड्स में 'धुरंधर' का जलवा, रणवीर सिंह और अनीत पड्डा बने सर्वश्रेष्ठ अभिनेतासरदार पटेल की जयंती पर लखनऊ में बोले सीएम योगी, देश में दो विधान नहीं चलेंगेदेहरादून के सांस्कृतिक उत्सव में मध्य पूर्व के लजीज व्यंजनों की धूम, कुनाफा और बकलावा का जादू सिर चढ़कर बोलादिल्ली कॉन्सर्ट में आलोचकों पर गरजे दिलजीत दोसांझ, कहा पंजाबियों को संघर्ष सिखाने की जरूरत नहींथेनी जेल ब्रेक पर बड़ा प्रशासनिक एक्शन, डिप्टी जेल अधीक्षक निलंबित और कर्मचारियों पर गिरी गाजसिंह मासिक राशिफल नवंबर 2026: गुरु का गोचर लाएगा परिपक्वता, मंगल और शनि के प्रभाव से जिम्मेदारी और खर्चों का रखें ध्यानअज्ञात नंबरों से आने वाले फोन पर अब दिखेगा असली नाम, दूरसंचार कंपनियों को मिला नई व्यवस्था लागू करने का आदेशराज्य के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार दिलाने चंडीगढ़ में शुरू हुआ हुनर पंजाब पोर्टल
फसलों को जड़ गलन और उकठा से बचाने के लिए आया चार घटकों वाला जैविक मिश्रणजीवनशैली
31 अक्तू॰ 2026, 12:31 pm (3 मिनट पहले)· 0

फसलों को जड़ गलन और उकठा से बचाने के लिए आया चार घटकों वाला जैविक मिश्रण

खेतों में जड़ सड़न और उकठा जैसी फंगल बीमारियों से मुरझाते पौधों के लिए ट्राइकोकवच जैविक उपाय बनकर उभरा है। इसमें मौजूद चार सूक्ष्मजीव मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ जड़ों को सुरक्षित रखते हैं।

खेतों में खड़ी फसल जब अचानक सूखने लगे या उसकी जड़ें गलने लगें, तो किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। फसलों में जड़ सड़न, गलन, उकठा और जड़-गांठ जैसे रोग मुख्य रूप से भूमिगत फंगस व हानिकारक जीवाणुओं के कारण फैलते हैं। ये रोग सीधे जड़ों पर हमला करते हैं, जिससे पौधा जमीन से पानी और जरूरी पोषक तत्व खींचना बंद कर देता है और धीरे-धीरे मुरझाकर सूख जाता है। इस तरह के रोगों की रोकथाम के लिए ट्राइकोकवच नाम का जैविक उत्पाद एक असरदार विकल्प के रूप में सामने आया है, जो फसल को नुकसान पहुंचाए बिना मिट्टी के स्वास्थ्य को भी सुधारता है।

चार असरदार जीवाणुओं का अनूठा मेल

अमन कुमार सिंह के अनुसार, इस खास उत्पाद के भीतर चार प्रमुख जैविक घटक मौजूद हैं। इनमें एज़ोटोबैक्टर, ट्राइकोडर्मा विरिडी, वर्टिसिलियम लेकानी और सूडोमोनास पुटिडा का सम्मिश्रण तैयार किया गया है। ये चारों तत्व मिलकर दोतरफा काम करते हैं। एक तरफ जहां यह मिश्रण पौधों की जड़ों को घातक बीमारियों से सुरक्षा घेरा प्रदान करता है, वहीं दूसरी तरफ यह मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्वों को पौधों के अवशोषण के अनुकूल बनाने में भी सहायता करता है।

ये भी पढ़ें

सब्जियों में उपयोग का सही समय और तरीका

सब्जी वर्गीय फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए इसका शुरुआती अवस्था में प्रयोग अधिक लाभकारी बताया गया है। अमन कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि जब सब्जी के पौधे रोपाई या अंकुरण के बाद 10 से 15 दिन की आयु पूरी कर लें, तब इसका छिड़काव या प्रयोग शुरू कर देना चाहिए। पौधों के विकास के इस दौर में जड़ों के आसपास इसका प्रयोग करने से नई विकसित हो रही जड़ों को सुरक्षा मिलती है।

घोल बनाने का अनुपात और ड्रेंचिंग की प्रक्रिया

ट्राइकोकवच के पाउडर रूप को इस्तेमाल करने के लिए एक निश्चित अनुपात निर्धारित किया गया है। प्रति लीटर पानी में 5 ग्राम पाउडर डालकर अच्छी तरह घोल तैयार करने की सिफारिश की गई है। इस तैयार तरल को सीधे पौधों की जड़ों के समीप ड्रेंचिंग तकनीक द्वारा डाला जाता है, ताकि दवा सीधे जड़ क्षेत्र तक पहुंच सके। हालांकि, प्रयोग की सटीक मात्रा और सुरक्षा सावधानियों के लिए पैकेट पर दर्ज दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ना आवश्यक माना गया है।

मिट्टी की उर्वरता में दीर्घकालिक सुधार

यह उत्पाद केवल बीमारियों को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेत की मिट्टी को लंबे समय के लिए समृद्ध भी बनाता है। अमन कुमार सिंह ने बताया कि इस मिश्रण के नियमित छिड़काव से मिट्टी के भीतर लाभदायक जीवाणुओं की सक्रियता में वृद्धि होती है। यदि कोई किसान अपने खेतों में करीब तीन साल तक निरंतर इसका उपयोग जारी रखता है, तो मिट्टी की संरचना में व्यापक सुधार आने के साथ-साथ मिट्टी जनित रोगों पर स्थायी नियंत्रण पाने में भी मदद मिल सकती है।

बाजार में उपलब्धता और तय दरें

किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए यह उत्पाद तरल और चूर्ण दोनों विकल्पों में उपलब्ध कराया गया है। कीमत की बात करें तो इसका लिक्विड फॉर्म ₹450 प्रति लीटर की दर पर मिलता है, जबकि पाउडर फॉर्म के लिए ₹250 प्रति किलोग्राम की दर तय की गई है। इस उत्पाद की खरीद के लिए किसान टीसीएल महिला उद्यमी प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, बहराइच से सीधा संपर्क स्थापित कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

ट्राइकोकवच किन प्रमुख फसल बीमारियों से बचाव में मदद करता है?
यह मुख्य रूप से फसलों को जड़ सड़न, गलन, उकठा और जड़-गांठ जैसी मिट्टी जनित बीमारियों से बचाने में सहायता करता है।
इस जैविक उत्पाद में कौन-कौन से चार घटक शामिल हैं?
इसमें एज़ोटोबैक्टर, ट्राइकोडर्मा विरिडी, वर्टिसिलियम लेकानी और सूडोमोनास पुटिडा शामिल हैं।
सब्जी वर्गीय फसलों में इसका प्रयोग कब शुरू करना चाहिए?
अमन कुमार सिंह के अनुसार, सब्जियों के पौधों की उम्र 10 से 15 दिन होने पर इसका इस्तेमाल शुरू किया जा सकता है।
पाउडर का घोल बनाते समय क्या अनुपात रखना चाहिए?
पाउडर को 5 ग्राम प्रति लीटर पानी के अनुपात में घोलकर पौधों की जड़ों के पास ड्रेंचिंग करने की सलाह दी गई है।
मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए इसे कितने समय तक इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है?
मिट्टी की सेहत में टिकाऊ सुधार और बीमारियों के प्रबंधन के लिए इसे करीब तीन साल तक लगातार इस्तेमाल करने की बात कही गई है।
बाजार में इसकी कीमत और उपलब्धता क्या है?
यह लिक्विड रूप में ₹450 प्रति लीटर और पाउडर रूप में ₹250 प्रति किलोग्राम पर टीसीएल महिला उद्यमी प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, बहराइच से उपलब्ध है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp