गोंडा जिले में उन महिलाओं के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है, जो अपने घरों में ताजी और हरी सब्जियां उगाने का शौक रखती हैं। दीनदयाल शोध संस्थान गोपालग्राम की तरफ से महिलाओं को किचन गार्डन विकसित करने के लिए मुफ्त में सब्जियों और साग के बीज बांटे जा रहे हैं। इस अभियान का मुख्य मकसद महिलाओं को घर की खाली जगह, छतों और आंगनों का सदुपयोग करने के लिए प्रेरित करना है ताकि वे बाजार पर निर्भर रहने के बजाय अपने ही घर में शुद्ध सब्जियां तैयार कर सकें।
कम जगह में ऐसे तैयार करें किचन गार्डन
दीनदयाल शोध संस्थान की गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. ममता त्रिपाठी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आजकल बाजार की सब्जियों के मुकाबले लोग घर की शुद्ध और ताजी उपज को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी सोच को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को किचन गार्डन बनाने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए बहुत ज्यादा जमीन की कोई आवश्यकता नहीं होती है। महिलाएं चाहें तो अपने घर की छत, छोटे आंगन या किसी भी खाली कोने का उपयोग आसानी से कर सकती हैं। जगह की कमी होने पर पुराने डिब्बों, गमलों या छोटी क्यारियों का इस्तेमाल करके भी सब्जियां और साग उगाए जा सकते हैं।
महिला किसान दिवस पर दी गई विशेष ट्रेनिंग
हाल ही में महिला किसान दिवस के मौके पर महिला किसानों के वास्ते एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को घर पर ही किचन गार्डन तैयार करने, पौधों की सही देखभाल करने और वैज्ञानिक तरीकों से सब्जियां उगाने के गुर सिखाए गए। विशेषज्ञों ने उन्हें समझाया कि किचन गार्डन के जरिए न केवल पूरे परिवार को ताजी और पोषण से भरपूर सब्जियां मिल सकती हैं, बल्कि बाजार से सब्जी खरीदने में होने वाले मासिक खर्च में भी काफी कमी लाई जा सकती है।
जैविक खाद के इस्तेमाल से मिलती है शुद्ध उपज
डॉ. ममता त्रिपाठी ने आगे बताया कि घर के किचन गार्डन में उगाई जाने वाली सब्जियों में किसी भी प्रकार की रासायनिक खाद का इस्तेमाल करने की कोई जरूरत नहीं होती है। इसकी जगह पूरी तरह से प्राकृतिक और जैविक खादों का प्रयोग किया जाना चाहिए। इसके लिए रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे से तैयार खाद, सड़ी हुई गोबर की खाद या फिर वर्मी कंपोस्ट का उपयोग सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। इससे पौधों को भरपूर पोषण मिलता है और पैदा होने वाली सब्जियां पूरी तरह से सेहतमंद होती हैं। यदि महिलाएं पौधों की नियमित रूप से देखभाल करें, उनमें समय पर पानी डालें और सही पोषण का ध्यान रखें, तो वे अपने परिवार की जरूरतभर की सब्जियां आसानी से पैदा कर सकती हैं।
इन सब्जियों के बांटे गए मुफ्त बीज
कार्यक्रम के आखिरी चरण में वहां मौजूद सभी महिलाओं को विभिन्न प्रकार की सब्जियों के निशुल्क बीज वितरित किए गए। इन बीजों में सुआ, मेथी, पालक, लौकी, तोरई और करेला जैसी कई जरूरी सब्जियां शामिल हैं। इन बीजों की सहायता से अब महिलाएं अपने घरों में आसानी से हरा-भरा किचन गार्डन तैयार कर पाएंगी। इस पूरी पहल का मूल उद्देश्य महिलाओं को स्वावलंबी बनाना और हर घर तक ताजी हरी सब्जियां पहुंचाना है, जिससे उनके स्वास्थ्य और बजट दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सके।



















