किचन की टोकरी में जब कोई हरी सब्जी न बची हो और समझ न आए कि खाने में क्या पकाया जाए, तब उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की पारंपरिक रसोई एक बेहद आसान समाधान देती है। यहां के ग्रामीण और कस्बाई घरों में आज भी बेसन की मिजनी बनाने का पुराना चलन कायम है। यह एक ऐसी देसी डिश है जो रसोई में मौजूद रोजमर्रा के बेसिक मसालों और बेसन के साथ झटपट तैयार हो जाती है। इसके लिए बाजार से किसी खास सामग्री को लाने की दरकार नहीं पड़ती और स्वाद ऐसा मिलता है जो रोज की सब्जियों को भी पीछे छोड़ दे।
बेसन से दानेदार मिजनी तैयार करने का अनोखा हुनर
मिजनी बनाने की तकनीक आम कढ़ी या बेसन गट्टे जैसी दूसरी डिशेज से काफी जुदा है। इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले एक कप बेसन को छलनी से अच्छी तरह छानकर किसी चौड़े मुंह वाले बर्तन या परात में फैला लें। अब इसमें स्वादानुसार नमक और पिसी लाल मिर्च का मिश्रण कर लें। इसके बाद का चरण सबसे अहम होता है, जिसमें बेसन में एक साथ पानी उड़ेलने की बजाय हाथों से केवल हल्के छींटे मारे जाते हैं। पानी को बहुत थोड़ी मात्रा में छिड़कते हुए उंगलियों की मदद से बेसन को गोल-गोल घुमाया जाता है।
हल्के हाथों से बेसन को लगातार घुमाने पर उसमें छोटे-छोटे दानेदार छर्रे या गांठें बनने लगती हैं। जब परात में भरपूर दाने बन जाएं, तब इस पूरे मिश्रण को एक बड़ी छन्नी में डालकर छान लिया जाता है। छानने से तैयार हो चुके दानेदार टुकड़े अलग निकल आते हैं और परात में बचा हुआ सूखा बेसन नीचे रह जाता है। इस बचे हुए सूखे बेसन में फिर से पानी की कुछ बूंदें छिड़ककर वही प्रक्रिया दोहराई जाती है, ताकि बेसन का एक भी कण बेकार न जाए और पूरी मिजनी एकसमान आकार में तैयार हो सके।
मसालेदार ग्रेवी तैयार करने की विधि
मिजनी के दाने अलग रखने के बाद ग्रेवी पकाने के लिए कड़ाही में तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें। तेल गर्म होते ही उसमें जीरे का तड़का लगाएं और साथ में एक चुटकी हींग डालें। तड़के के चटकते ही कड़ाही में बारीक कटी प्याज डालकर उसे करछुल से चलाते हुए तब तक भूनें जब तक वह हल्की सुनहरी न दिखने लगे। प्याज के अच्छे से भुन जाने पर उसमें अदरक और लहसुन का पेस्ट मिला दें।
इसके तुरंत बाद आंच को संतुलित करते हुए हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर डालें। इस पूरे मसाले को धीमी आंच पर तब तक भूनते रहें जब तक कि मसालों से खुशबू न आने लगे और किनारे से तेल अलग होता साफ न दिखाई देने लगे। जब मसाला पूरी तरह पककर तेल छोड़ दे, तो समझें कि ग्रेवी का आधार तैयार हो चुका है।
ग्रेवी में मिजनी को पकाने का तरीका
मसाला भुनने के बाद कड़ाही में अपनी जरूरत और गाढ़ेपन के हिसाब से पानी मिलाएं और ग्रेवी में तेज उबाल आने का इंतजार करें। जब पानी में उबाल आ जाए, तब पहले से तैयार करके रखे गए बेसन के दानों यानी मिजनी को धीरे-धीरे कड़ाही में डालें। इस दौरान करछुल को बिल्कुल हल्के हाथों से चलाएं ताकि बेसन के दाने एक-दूसरे से चिपकें नहीं और बिखरें भी नहीं। इसके बाद कड़ाही पर ढक्कन लगाकर आंच को धीमा या मध्यम कर दें और कुछ देर तक पकने दें। पकने के दौरान बेसन के ये दाने तरी को अपने भीतर सोख लेते हैं और एकदम मुलायम व रसीले बन जाते हैं।
परोसने का अंदाज और समय की बचत
प्राची बताती हैं कि ग्रामीण इलाकों में यह रेसिपी आज के दौर में भी खासी लोकप्रिय बनी हुई है। जब घर में अचानक सब्जियां खत्म हो जाएं, तब साधारण बेसन और मसालों की मदद से करीब 30 मिनट के भीतर यह लजीज देसी सब्जी बनकर दस्तरखान पर आ जाती है। इस मसालेदार और खुशबूदार तरी वाली सब्जी को गर्मागर्म रोटियों, कुरकुरे पराठों या फिर सादे उबले चावल के साथ परोसा जा सकता है। खास तौर पर ताजी सिकी रोटियों के साथ इसका गाढ़ा और चटपटा रसा बेहद लाजवाब लगता है।

















