अरावली और विंध्य पर्वतमालाओं के मिलन स्थल पर बसा रणथंभौर कभी जयपुर के राजघराने की निजी संपत्ति हुआ करता था, जिसका इस्तेमाल शाही शिकारगाह के तौर पर किया जाता था। सवाई माधोपुर से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान आज बाघों को करीब से निहारने के शौकीनों का पसंदीदा ठिकाना बन चुका है। यहां रॉयल बंगाल टाइगर की मौजूदगी काफी सामान्य मानी जाती है, जिसके चलते देश भर से पर्यटक जंगल के इस रोमांचक माहौल का गवाह बनने पहुंचते हैं।
विशाल भूभाग और समृद्ध जैव विविधता
इस राष्ट्रीय उद्यान का प्राकृतिक भूगोल बेहद अनूठा और मनमोहक है। यहां ऊंची-नीची पहाड़ियां, पथरीली चट्टानें, दूर तक फैले घास के खुले मैदान, खूबसूरत झीलें और मौसमी जलप्रपात देखने को मिलते हैं। इस विविध प्राकृतिक बनावट की वजह से कई तरह के वन्यजीवों को एक साथ देखने का मौका मिलता है। जंगल में बाघों के साथ-साथ स्लॉथ भालू, तेंदुआ, कैराकल, सियार, लोमड़ी, लकड़बग्घा और अत्यंत दुर्लभ भारतीय भेड़िया भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं।
मांसाहारी शिकारियों के अलावा इस जंगल में शाकाहारी जीवों का भी बड़ा कुनबा फलता-फूलता है। इनमें चीतल, सांभर, नीलगाय, रीसस मकाक बंदर और लंगूर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही विभिन्न प्रजातियों के पक्षी भी यहां के पेड़ों पर बसेरा करते हैं। यह पूरा क्षेत्र धोक, बरगद और अंजीर जैसे घने वृक्षों से आच्छादित है, जो प्रकृति में रुचि रखने वालों के लिए इसे एक शानदार गंतव्य बनाता है।
सफारी के दौरान दिखने वाले जीवंत दृश्य
रणथंभौर का सफारी अनुभव कई अनोखे दृश्यों से भरा होता है। झीलों के शांत किनारों पर मगरमच्छों का धूप सेंकना, ऊंचे पेड़ों की शाखाओं पर गिद्धों का बैठना, सर्प ईगल की तीखी गूंज और बाघ की आहट पाकर चीतल की चेतावनी भरी आवाजें इस जंगल यात्रा को यादगार बना देती हैं। इन्हीं सब खूबियों के चलते रणथंभौर की जंगल सफारी को देश के सबसे रोमांचक वन्यजीव अनुभवों में गिना जाता है।
दिल्ली से कैसे पहुंचे रणथंभौर
यदि कोई दिल्ली में रहता है, तो दो से तीन दिन की छुट्टियों में परिवार या दोस्तों के साथ यहां आकर वन्यजीवन का आनंद लिया जा सकता है। दिल्ली से रणथंभौर की दूरी लगभग 360 से 380 किलोमीटर पड़ती है। पर्यटक अपनी निजी कार चलाकर सड़क मार्ग से यहां पहुंच सकते हैं या फिर सवाई माधोपुर के लिए सीधी ट्रेन सेवा का विकल्प चुन सकते हैं। यह राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों के भ्रमण के लिए हर साल अक्टूबर से जून तक खुला रहता है।
सफारी और ठहरने के लिए बुकिंग प्रक्रिया
सवाई माधोपुर शहर में हर तरह के बजट के अनुकूल होटल और रिसॉर्ट उपलब्ध हैं। चूंकि यहां साल भर भारी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं, इसलिए ठहरने की व्यवस्था और सफारी परमिट पहले से सुनिश्चित कर लेना समझदारी भरा कदम होता है। सफारी की ऑनलाइन बुकिंग के लिए आधिकारिक पोर्टल http://fmdss.forest.rajasthan.gov.in/ पर जरूरी विवरण देखा जा सकता है। प्रति व्यक्ति सफारी का शुल्क लगभग 1800 से 2300 रुपये तक हो सकता है, इसलिए समय रहते अग्रिम आरक्षण कराना बेहद जरूरी है।



















