मिठाई निर्माण और डेयरी व्यवसाय में कच्चे माल की गुणवत्ता सीधे तौर पर दूध के फैट और उसकी शुद्धता से तय होती है। सीतामढ़ी के स्थानीय डेयरी कारोबारियों के अनुभव के मुताबिक, एक किलो शुद्ध फुल क्रीम गाय या भैंस के दूध से औसतन 200 से 250 ग्राम तक छेना तैयार होता है। यदि दूध में फैट का स्तर सही है और उसमें किसी भी प्रकार की मिलावट नहीं की गई है, तो उत्पादन का यह पैमाना बिल्कुल सटीक बैठता है। इसके विपरीत, यदि दूध में पानी मिला दिया जाए या प्राकृतिक फैट कम हो, तो प्रति किलो छेने की मात्रा घटकर केवल 150 से 200 ग्राम या उससे भी कम रह जाती है। टोंड अथवा कम फैट वाले दूध का प्रयोग करने पर प्रति किलो मात्र 150 से 180 ग्राम छेना ही प्राप्त होता है, इसलिए हलवाई हमेशा गाढ़े और बिना मिलावट वाले दूध को ही प्राथमिकता देते हैं।
दूध की मात्रा से मिलावट और गुणवत्ता की पहचान
डेयरी और छेना व्यापार से जुड़े सीतामढ़ी के स्थानीय कारोबारी श्याम कुमार बताते हैं कि वे सीधे ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों से दूध एकत्र करते हैं। इस दूध को भट्टी पर उबालकर छेना बनाया जाता है और फिर स्थानीय बाजार में आपूर्ति की जाती है। व्यापारियों के लिए छेने की कुल मात्रा ही उनकी लागत और मुनाफे का आधार होती है। अगर दूध में पानी मिला हो, तो छेना कम वजन का निकलता है, जिससे सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ग्रामीण किसानों और पशुपालकों के साथ लंबे समय का संपर्क आपसी विश्वास बनाए रखता है, फिर भी दूध उबलने और फटने के बाद मिलने वाले छेने का वजन तुरंत बता देता है कि दूध में कितना पानी मिलाया गया था।
शादी-ब्याह और बड़े आयोजनों में दूध की खपत का गणित
पारिवारिक समारोहों, दावतों और शादी-विवाह के मौकों पर जब सैकड़ों मेहमानों के लिए मिठाइयां बनानी होती हैं, तो दूध की सटीक मात्रा का अनुमान लगाना सबसे अहम काम होता है। उदाहरण के लिए, यदि 500 अतिथियों के लिए प्रति व्यक्ति दो-दो पीस के हिसाब से कुल 1,000 पीस मिठाई बनानी हो, तो इसके लिए लगभग डेढ़ क्विंटल यानी 150 किलो दूध या छेने के घोल की आवश्यकता होती है। मिठाई बनाने वाले अनुभवी कारीगर इसी फार्मूले के आधार पर दूध का ऑर्डर तय करते हैं, जिससे आयोजन के दौरान न तो मिठाई कम पड़े और न ही उसकी बनावट या स्वाद में कोई कमी आए।
घर पर नरम और स्पंजी छेना फाड़ने की सही विधि
छेना कितना कोमल और स्पंजी बनेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि दूध को किस तापमान और तरीके से फाड़ा गया है। सबसे पहले दूध को अच्छी तरह उबाल लें और फिर आंच बंद करके 2 से 3 मिनट तक थोड़ा ठंडा होने दें। उबलते हुए दूध में सीधे खट्टा पदार्थ डालने के बजाय, नींबू के रस, सिरके (विनेगर) या टाटरी को थोड़े सादे पानी में घोलकर धीरे-धीरे दूध में मिलाना चाहिए। जैसे ही दूध पूरी तरह फट जाए और हरा पानी अलग दिखने लगे, तुरंत उसे मलमल या महीन सूती कपड़े में छान लें। इसके बाद छेने को तुरंत साफ ठंडे पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है ताकि नींबू या सिरके का खट्टापन पूरी तरह निकल जाए। अंत में कपड़े को पोटली की तरह बांधकर हल्के हाथों से दबाएं ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाए और आपको एकदम मुलायम छेना मिले।


















