महिला पाठकों के बीच खेल आधारित प्रेम कहानियों की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए नेशनल हॉकी लीग ने अपने प्रचार का रुख फिक्शन की ओर मोड़ा है। 'हॉट फॉर हॉकी' नाम की इस नई प्रचार मुहिम के तहत पुरुष खिलाड़ियों को केंद्र में रखकर ऑडियोबुक मंचों पर छोटी कहानियां पेश की जा रही हैं। खेल कारोबार से जुड़े जानकारों के अनुसार इस परियोजना के लिए साठ से नब्बे सेकंड की पटकथाएं तैयार कराई गई हैं, जिनकी आवाज और लेखन के लिए किताबों की दुनिया से जुड़े रचनाकारों की मदद ली गई है। इसके प्रचार के लिए टिकटॉक पर किताबों की चर्चा करने वाले लोकप्रिय समूह बुकटॉक का भी सहारा लिया जाना तय हुआ है। लेकिन पेशेवर बर्फ हॉकी की सबसे बड़ी संस्था की यह कोशिश प्रशंसकों और इस विधा के लेखकों के गले नहीं उतर रही है।
प्रचार मुहिम की शुरुआत और कहानियों का सीमित दायरा
इस नई शृंखला की पहली कड़ी में फिलाडेल्फिया फ्लायर्स के ट्रेवर जेग्रास, कैरोलिना हरीकेन्स के सेबेस्टियन आहो तथा लास वेगास गोल्डन नाइट्स के जैक आइकेल जैसे जाने-माने खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। इन कहानियों को 'पकिंग रॉन्ग' की लेखिका सी.आर. जेन ने तैयार किया है। हालांकि पाठक जब इन्हें सुनते हैं तो यह किसी संपूर्ण प्रेम उपन्यास के बजाय किसी किताब के पिछले कवर पर लिखी जाने वाली संक्षेपिका जैसी अधिक प्रतीत होती हैं। नाम भले ही रूमानी विधा का लिया गया हो, मगर इनमें खिलाड़ियों के साथ कोई प्रेम पात्र नहीं जोड़ा गया है। पूरी पटकथा का असल मकसद दर्शकों को सिर्फ मैच देखने के लिए टीवी स्क्रीन या स्टेडियम तक खींचना दिखाई देता है।
उदाहरण के लिए ट्रेवर जेग्रास पर आधारित कहानी सिर्फ एक साधारण सारांश में सिमट जाती है, जिसमें बताया गया है कि वह फिलाडेल्फिया में एक नई शुरुआत की तलाश में पहुंचे थे, लेकिन पिछले वर्ष पिट्सबर्ग के खिलाफ कड़े मुकाबलों के बाद उन्हें समझ आया कि खेल कितना सख्त हो सकता है। एक गर्म गर्मी बीतने के बाद शहर का सुंदर खिलाड़ी अब मैदान पर कहीं अधिक आक्रामक नजर आ रहा है। इस तरह के कथ्य को सुनने के बाद इस विधा के नियमित पाठकों को निराशा ही हाथ लगी है, क्योंकि प्रचार में जिस आकर्षण का दावा किया गया था, वह पूरी तरह गायब है।
लोकप्रिय लेखिकाओं का तीखा विरोध और असहज सवाल
प्रशंसकों का एक बड़ा वर्ग इस तरह के प्रचार को सतही और गैर-जिम्मेदाराना मान रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह तरीका एक तरफ खिलाड़ियों को अवांछित टिप्पणियों के प्रति संवेदनशील बनाता है, तो दूसरी तरफ खेल के अंदर मौजूद विषैले पौरुष और पूर्वाग्रहों के गंभीर मुद्दों से आंखें मूंद लेता है। 'जैकसनविले रेज' जैसी लोकप्रिय हॉकी रोमांस शृंखला लिखने वाली बेस्टसेलर लेखिका एमिली राथ ने सोशल मीडिया पर इस परियोजना का हिस्सा बनने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा,
"I cannot begin to describe the depths of my rage that this is actually happening."राथ ने खुलासा किया कि उनसे भी लीग ने संपर्क साधा था, मगर उन्होंने तुरंत प्रस्ताव ठुकरा दिया।
एमिली राथ के अनुसार, लीग के शुरुआती प्रस्तावों में ऐसे मजाक शामिल थे जो पूरे विधा का उपहास उड़ाते प्रतीत होते थे। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि किताबों के कवर के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से तैयार की गई तस्वीरों का उपयोग किया गया था। 'डी.सी. स्टार्स' की लेखिका चेल्सी कर्टो ने भी इसी वजह से दूरी बनाई। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी अपनी किताबें अक्सर खेल प्रशासन की कमियों की कड़ी आलोचक रही हैं। राथ का तर्क है कि संस्था यह मान बैठी है कि महिलाएं खेल को केवल तभी पसंद करेंगी जब उसे प्रेम कहानी के रूप में परोसा जाए। उनके मुताबिक संस्था अपनी धूमिल छवि को सुधारने और नए पाठक बटोरने के लिए चर्चित लेखकों की साख का फायदा उठाने की फिराक में है।
सांस्कृतिक प्रभाव और पुरानी संस्थागत विसंगतियां
बर्फ हॉकी और रोमांस उपन्यासों का यह नाता अचानक शुरू नहीं हुआ है। न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी ने वर्ष 2019 में ही इस विधा के तेजी से लोकप्रिय होने की बात रेखांकित की थी। इसके बाद 'हीटेड राइवलरी' और 'ऑफ कैंपस' जैसे उपन्यासों की भारी सफलता तथा उनके ऑनलाइन रूपांतरणों ने इसे मुख्यधारा में ला खड़ा किया। एनएचएल के प्रवक्ता जॉन वेनस्टीन ने इस प्रचार का बचाव करते हुए कहा है कि यह मौजूदा सांस्कृतिक रुझान को खेल भावना के साथ अपनाने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा,
"We were very proud to partner with real hockey authors, illustrators and voice actors in the space, and we're grateful the players were willing to have a little fun with it too."
इसके विपरीत, खेलों में हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए कपड़े का ब्रांड 'डबल हॉकी स्टिक्स' चलाने वाली लेसी कोनाइन का मानना है कि लीग प्रशंसकों के दर्द को समझे बिना केवल मुनाफा तलाश रही है। उन्होंने कहा,
"I think that they see dollar signs."कोनाइन के अनुसार एक तरफ प्रबंधन लोकप्रिय किताबों के प्रशंसकों को खींचने का ढोंग करता है, तो दूसरी तरफ प्राइड नाइट्स जैसे समावेशी आयोजनों से हाथ खींच लेता है।
लीग आयुक्त गैरी बेटमैन ने भले ही दावा किया था कि हर टीम ऐसे समावेशी आयोजन करती है, लेकिन डलास स्टार्स जैसी टीमों ने इस बार प्राइड नाइट आयोजित न करने का फैसला किया है। पिछले पांच वर्षों में यह पहला मौका है जब डलास स्टार्स ऐसा कार्यक्रम नहीं कर रही है, जबकि उसने फैंटेसी उपन्यास 'आयरन फ्लेम' पर आधारित एक शाम आयोजित करने का निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि इस आयोजन की कमाई का एक हिस्सा एलजीबीटीक्यू युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काम करने वाले गैर-सरकारी संगठन द ट्रेवर प्रोजेक्ट को दिया जाएगा। इससे पहले जून 2023 में लीग ने विशेष संदेश वाली जर्सी और उपकरणों पर प्रतिबंध लगा दिया था, हालांकि बाद में स्टिक पर रंगीन टेप लगाने की छूट फिर से दे दी गई थी।
गंभीर आरोपों की अनदेखी और खिलाड़ियों की सुरक्षा पर चिंता
कई महिला समर्थकों का कहना है कि संस्था का यह रुख यौन उत्पीड़न से जुड़े पुराने विवादों के कारण और भी असहज लगता है। मॉन्ट्रियल कैनेडियन्स की एक समर्थक एको के अनुसार खेल संस्कृति की गहरी विसंगतियों को छिपाने के लिए ऐसे रूमानी आख्यानों का सहारा लिया जा रहा है। कनाडा में इस खेल की सर्वोच्च संस्था हॉकी कनाडा पर वर्ष 2022 में यह तथ्य सामने आया था कि खिलाड़ियों के पंजीकरण शुल्क से बने कोष का इस्तेमाल यौन उत्पीड़न के दावों और कानूनी मुकदमों के निपटारे के लिए किया जाता रहा। हॉकी कनाडा के प्रवक्ता जेरेमी नाइट का कहना है कि पिछले चार वर्षों में व्यवस्था में सुधार के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा पिछले वर्ष कनाडा के जूनियर वर्ग के पांच पूर्व खिलाड़ियों को एक चर्चित मामले में बरी होने के बाद पेशेवर लीग में खेलने की पात्रता दी गई, जिनमें से तीन खिलाड़ी वर्तमान में खेल रहे हैं।
इसके अलावा खिलाड़ियों की निजी गरिमा भी बहस के केंद्र में आ गई है। वर्ष 2023 में सिएटल क्रैकेन के खिलाड़ी अलेक्जेंडर वेनबर्ग और उनकी पत्नी फेलिशिया ने सोशल मीडिया पर अत्यधिक आपत्तिजनक और शोषणकारी टिप्पणियों की बाढ़ आने की शिकायत की थी, जो टीम के एक बुकटॉक केंद्रित प्रचार के बाद शुरू हुई थी। हालांकि लीग का दावा है कि इस बार खिलाड़ियों ने खुद सामग्री को मंजूरी दी है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि वास्तविक खिलाड़ियों को काल्पनिक रूमानी पात्रों की तरह पेश करना खतरनाक सीमाओं को लांघना है। लीड्स विश्वविद्यालय में मीडिया अध्ययन की शोधकर्ता जेस राउचबर्ग कहती हैं कि वास्तविक लोगों पर आधारित काल्पनिक कथाएं नब्बे के दशक से मौजूद हैं, लेकिन जब कोई आधिकारिक खेल संस्था खुद इन सीमाओं को धुंधला करने लगे तो प्रशंसकों और खिलाड़ियों के बीच का अंतर मिटने लगता है।



















